बीकानेर का राठौड़ वंश

संस्थापक

राव बीका (जोधा का पांचवां पुत्र)

1468 ई. में बीकानेर नगर बसाया राव लूणकर्ण (कलियुग का कर्ण) राव जैतसी) राव जैतसी रो छंद-बीठू सोज नागरजोत 1542 पाहोबा का युद्ध राव जैतसी व मालदेव के मध्य हुआ। कल्याण मल रायसिंह
1465 ई. में जोधपुर के संस्थापक राव जोधा के पांचवे पुत्र बीका ने बीकानेर के राठौड़ वंश की नीव रखी। 1488 ई. में राती घाटी नामक स्थान पर बीकानेर की स्थापना कर उसे अपनी राजधानी बनाया। राव बीका के पश्चात् लूणकरण शासक बना अत्यधिक दानी प्रवृति का होने के कारण उसे कलियुग का कर्ण भी कहा जाता है। इसने लूण-करणसर की स्थापना की।
लूणकरण के पश्चात् राव जैतसी बीकानेर का शासक था। जैतसी के पुत्र कल्याणमल ने पहले शेरशाह सूरी की अधिनता स्वीकार की और उसके बाद 1570 ई. में नागौर के दरबार में अकबर की अधीनता स्वीकार की।
कल्याणमल
रायसिंह राठौड़ (1574-1612 ई.)पृथ्वीसिंह राठौड़ अकबर का दरबारीकवि
अकबर ने इसे गागरोण (झालावाड़) का दुर्ग उपहारस्वरूप दिया। पृथ्वीराज राठौड ने "डिंगल शैली में बैली किशन रूकमणी री" ग्रन्थ की रचना की। इसका विवाह राणा प्रताप की भतीजी किरण देवी से हुआ।

रायसिंह राठौड़

जन्म - 20 जुलाई 1541 ई. में, 1574 ई. बीकानेर का शासक बना। अकबर व जहांगीर की सेवा की। 1572 ई. में अकबर ने रायसिंह को मारवाड़ का गर्वनर नियुक्त किया। कठौली की लडाई- 1573 ई. में गुजरात के इब्राहिम हुसैन मिर्जा को शाही सेना के नेतृत्व में रायसिंह ने कठौती नामक स्थान पर पराजित किया।
सम्राट अकबर ने रायसिंह के नेतृत्व में 1574 ई. में सिवाणा गढ़ पर अधिकार करने हेतु भेजा। अकबर ने इसे 4000 का मनसबदार बनाया। जहांगीर के शासनकाल में 5000 की मनसबदारी मिली।
अकबर व जहांगीर की तरफ से जूनागढ़ सोरठ, नागौर, श्शमशाबाद, आदि जागीरें रायसिंह को मिली रायसिंह की वतन जागीर में 47 परगने थे। जहांगीर का रायसिंह में अत्यधिक विश्वास था। 1606 ई. में जहांगीर युद्ध के लिए राजधानी आगरा से बाहर गया तब आगरा की रक्षा के लिए रायसिंह को वहां नियुक्त किया।
मुंशी देवी प्रसाद ने रायसिंह को राजपुताने का कर्ण कहा है।
कर्मचंद की देखरेख में 1589-94 ई. जूनागढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया
रायसिंह प्रशक्ति उत्कीर्ण करवाई।
कर्मचंद वेषोत्कीर्तनकं काब्य में रायसिंह को "राजेन्द्र"कहा गया है।
1612 ई. बुहारनपुर में मृत्यु।

तथ्य

मतीरे की राड़ 1644 ई.
कर्णसिंह -अमरसिंह -अमरसिंह की विजय(बीकानेर )V(नागौर)
17 वीं सदी में बीकानेर के शासक कर्णसिंह ने बीकानेर से 25 कि.मी. दूर देश्नोक नामक स्थान पर करणीमाता का मंदिर बनवाया। -बीकानेर के राठौडो की कुल देवी -करणी माता।
बीकानेर के शासक अनूपसिंह के समय बीकानेर की चित्रकला व साहित्य का सर्वाधिक विकास हुआ।
अनूपसिंह - अनूपविवेक
इसी के समय आनन्दराव ने गीता का राजस्थानी भाषा में अनुवाद किया। बीकानेर के शासक सूरतसिंह ने सूरतगढ़ की स्थापना करवाई। इन्होंने 19 वीं सदी आरम्भ में भटनेर दुर्ग पर अधिकार किया। उस दिन मंगलवार का दिन था परिणामस्वरूप भटनेर का नाम हनुमानजी के नाम पर हनुमानगढ़ कर दिया।

गंगासिंह राठौड़ - (1887-1943 )

56 वर्ष का शासन, पिता का नाम - लाल सिंह
गंगासिंह ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान अपनी ऊंटो की सेना गंगा रिसाला चीन भेजी। इन्हे चीनी पदक से सम्मानित किया गया।
26 अक्टूबर 1927 को गंगानहर का उद्घाटन वायसराय इरविन द्वारा किया गया। इसी दिन से गंगानगर की स्थापना मानी जाती है। गंगासिंह को आधुनिक भारत का भागीरथ माना जाता है। इन्होने लंदन में आयोजित तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया। 1921 में नरेन्द्र मण्डल (चेम्बर आॅफ प्रिंसेज) के प्रथम चासलर गंगासिंह बनाये गये।
गंगासिंह के प्रतिरोध के कारण बीकानेर प्रजामण्डल की स्थापना कोलकत्ता में हुई। वर्ष 1943 में इनकी मृत्यु हो गयी। राजस्थान के एकीकरण के समय बीकानेर के शासक सार्दलसिंह थे।