राजस्थान का सामान्य परिचय

राजस्थान का कुल क्षेत्रफल 3,42,239 वर्गकि.मी. है। जो कि देश का 10.41प्रतिशत है और क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का देश में प्रथम स्थानहै।



राजस्थान की स्थिति, विस्तार, आकृति, एवं भौतिक स्वरूप

भुमध्य रेखा के सापेक्ष राजस्थान उतरी गोलाद्र्व में स्थित है। ग्रीन वीच रेखा के सापेक्ष राजस्थान पुर्वी गोलाद्र्व में स्थित है।



राजस्थान की अन्य राज्य से सीमा

राजस्थान के दो जिलो की सीमा पंजाब से लगती है।तथा पंजाब के दो जिले फाजिल्का व मुक्तसर की सीमा राजस्थान से लगती है।पंजा



राजस्थान के संभाग

1. जयपुर संभाग- जयपुर, दौसा, सीकर, अलवर, झुंझुनू 2. जोधपुर संभाग- जोधपुर, जालौर, पाली, बाड़मेर, सिरोही, जैसलमेर 3. भरतपुर संभाग- भरतपुर



राजस्थान के प्रतीक चिन्ह

रेगिस्तान का गौरव" अथवा "थार का कल्पवृक्ष" जिसका वैज्ञानिक नाम "प्रोसेसिप-सिनेरेरिया" है। इसको 1983 में राज्य वृक्ष घोषित किया गया।



राजस्थान की जलवायु

राजस्थान की जलवायु शुष्क से उपआर्द्र मानसूनी जलवायु है अरावली के पश्चिम में न्यून वर्षा, उच्च दैनिक एवं



राजस्थान के भौतिक विभाग

पृथ्वी अपने निर्माण के प्रराम्भिक काल में एक विशाल भू-खण्ड पैंजिया तथा एक विशाल महासागर पैंथालासा के रूप में विभक्त था कलांन्तर में पैंजिया के दो टुकडे़ हुए उत्तरी भाग अंगारालैण्ड तथा दक्षिणी भाग गोडवानालैण्ड के नाम जाना जाने लगा। तथा इन दोनों भू-खण्डों के मध्य



राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के भौगोलिक नाम

भोराठ/भोराट का पठार:- उदयपुर के कुम्भलगढ व गोगुन्दा के मध्य का पठारी भाग। लासडि़या का पठारः- उदयपुर में जयसमंद



राजस्थान की झीले

खारेपानी की झीले मीठे पानी की झीलें



राजस्थान की नदियां

राजस्थान का अधिकांश भाग रेगिस्तानी है अतः वहां नदीयों का विशेष महत्व है। पश्चिम भाग में सिचाई के साध



राजस्थान की सिचाई परियोजनाऐं

वर्षा के अभाव में भूमि को कृत्रिम तरीके से जल पीलाने की क्रिया को सिंचाई



प्राचीन सभ्यताऐं

कालीबंगा सभ्यता जिला - हनुमानगढ़ नदी - सरस्वती(वर्तमान की घग्घर) समय - 3000 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व तक काल - कास्य युगीन काल



राजस्थान का इतिहास जानने के स्त्रोत

राजस्थान इतिहास को जानने के स्त्रोतः- इतिहास का शाब्दिक अर्थ- ऐसा निश्चित रूप से हुआ है।



राजस्थान के वंश

गुर्जर प्रतिहार वंश प्रतिहार-वत्सराज



1857 की क्रान्ति

अग्रेजों की अधीनता स्वीकार करने वाली प्रथम रियासत - करौली(1817) सम्पूर्ण भारत में 562 देशी रियासते थी तथा राजस्थान में 19 देशी रियासत थी। 1857 की क्रान्ति के



राजस्थान के आन्दोलन

बिजौलिया किसान आन्दोलन - (1897-1941 44 वर्षों तक) जिला - भीलवाड़ा बिजौलिया का प्राचीन



राजस्थान का एकीकरण

राजस्थान के एकीकरण के समय कुल 19 रियासतें 3 ठिकाने- लावा(जयपुर), कुशलगढ़(बांसवाड़ा) व नीमराना(अलवर) तथा एक चीफशिफ अजमेर-मेरवा



राजस्थान जनगणना - 2011

राजस्थान की कुल जनसंख्या - 68,548,437 शहरी जनसंख्या - 17,048,085(कुल जनसंख्या का 24.9 प्रतिशत)



राजस्थान के अभ्यारण

वन्य जीवों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य 23 अप्रैल 1951 को राजस्थान वन्य-पक्षी संरक्षण अधिनियम 1951 ला



राजस्थान में कृषि

राजस्थान का कुल क्षेत्रफल 3 लाख 42 हजार 2 सौ 39 वर्ग कि.मी. है। जो की देश का 10.41 प्रतिशत है। राजस्थान



राजस्थान में पशु सम्पदा

राजस्व मण्डल अजमेर- प्रत्येक 5 वर्ष में पशुगणना करता है।



राजस्थान में डेयरी विकास

राजस्थान में विकास कार्यक्रम गुजरात के ‘अमुल डेयरी‘ के सहकारिता के सिद्धान्त पर संचालित किया जा रहा है।



राजस्थान में खनिज संसाधन

राजस्थान खनिज की दृष्टि से एक सम्पन्न राज्य है। राजस्थान को "खनिजों का अजायबघर" कहा जाता है।



राजस्थान में ऊर्जा विकास

राजस्थान के सर्वाधिक ऊर्जा प्राप्ति वाले स्त्रोत 1. ताप विधुत 2. जल विधुत राजस्थान में सर्वाधिक ऊर्जा की संभावना वाला स्त्रोत



राजस्थान में पर्यटन विकास

राजस्थान पर्यटन विभाग का पंचवाक्य - “जाने क्या दिख जाये”। राजस्थान में सर्वाधिक पर्यटक(देशी व विदेशी दोनों) - 1. पुष्कर - अजमेर 2. माउण्ट आबू - सिरोही।



राजस्थान में लोक देवता

मारवाड़ के पंच पीर रामदेव जी, गोगा जी, पाबु जी,हरभू जी, मेहा जी



राजस्थान में लोक देवियां

.करणी माता देश नोक (बीकानेर) में इनका मंदिर है। चुहों वाली देवी



राजस्थान में सम्प्रदाय

जसनाथी सम्प्रदाय संस्थापक - जसनाथ जी जाट जसनाथ जी का जन्म 1432 ई. में कतरियासर



राजस्थान में त्यौहार

महिने चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाठ, श्रावण, भाद्रपद, आषिवन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन । (बदी) कृष्ण पक्ष - अमावस्या(15) (सुदी) शुक्ल पक्ष - पूर्णिमा(30)



राजस्थान के मेले

(अ) राज्य के पशु मेले 1. श्रीबलदेव पशु मेला मेड़ता सिटी (नागौर) में आयोजित होता है। इस मेले का आयोजन चेत्र मास के सुदी पक्ष में होता हैं नागौरी नस्ल से संबंधित है। 2. श्री वीर तेजाजी पशु मेला परबतसर (नागौर) में आयोजित होता है। श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक



राजस्थान के रीति -रिवाज

1. गर्भाधान 2. पुंसवन- पुत्र प्राप्ति हेतू 3. सिमन्तोउन्नयन- माता व गर्भरथ शिशु की अविकारी शक्तियों से रक्षा करने के लिए। 4. जातकर्म 5. नामकरण



राजस्थान में प्रचलित प्रथाएं

1. कन्या वध प्रथा- राजपूतों में प्रचलित प्रथा जिसके अन्तर्गत लड़की के जन्म लेते ही उसे अफीम देकर अथवा गला दबाकर मार दिया जाता था। इस प्रथा पर सर्वप्रथम रोक हाडौती के पोलिटिकल



राजस्थान में आभूषण व वेश भूषा

. सिर के आभूषण 1.शीशफूल 2. रखडी (राखड़ी) 3 बोर 4 टिकड़ा 5. मेमन्द 2. माथा/ मस्तक के आभूषण 1 बोरला 2 टीका 3 मांग टी



राजस्थान की जनजातियां

निवास स्थान- जयपुर के आस-पास का क्षेत्र/पूर्वी क्षेत्र "मीणा" का शाब्दिक अर्थ मछली है। "मीणा" मीन धातु से बना है।



राजस्थान के दुर्ग

राजस्थान के राजपूतों के नगरों और प्रासदों का निर्माण पहाडि़यों में हुआ, क्योकि वहां शुत्रओं के विरूद्ध प्राकृतिक सुरक्षा के साधन



राजस्थान की प्रमुख संगीत गायन शैलियां

. ध्रुपद गायन शैली जनक - ग्वालियर के शासक मानसिंह तोमर को माना जाता है। महान संगीतज्ञ बैजू बावरा मानसिंह के दरबार में था। संगीत सामदेव का विषय है।



राजस्थान में नृत्य

1 बम नृत्य, 2 ढोल नृत्य 3 डांडिया नृत्य, 4 डांग नृत्य 5 बिन्दौरी नृत्य 6 अग्नि नृत्य 7 चंग नृत्य 8 ढफ नृत्य 9 गीदड़ नृत्य



राजस्थान में लोकनाट्य

1. रम्मत- होली के अवसर पर खेली जाती है। - ढोल व नगाडे।



वाद्य यंत्र व प्रमुख वादक

वाद्य यंत्रों को मुख्यतः चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है। 1. तत् वाद्य यंत्र तार युक्त वाद्य यंत्र -यथा- सितार, इकतारा



राजस्थान की चित्र शैलियां व चित्रकला की प्रमुख संस्थाऐं

राजस्थान की चित्रकला शैली पर गुजरात तथा कश्मीर की शैलियों का प्रभाव रहा है।



राजस्थान की लोक कलाएं

1. फड़ चित्रांकन रेजी अथवा खादी के कपडे़ पर लोक देवता के जीवन को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करना फड़ चित्रांकन कहलाता है। फड़ चित्रांकन में मुख्य पात्र को



राजस्थान की लोक गायन शैलियां

. माण्ड गायन शैली 10 वीं 11 वीं शताब्दी में जैसलमेर क्षेत्र माण्ड क्षेत्र कहलाता था। अतः यहां विकसित गायन शैली माण्ड गायन शैली कहलाई। एक श्रृंगार प्रधान गायन शैली है।



राजस्थान में हस्तकला

1. स्वर्ण और चांदी के आभूषण - जयपुर 2. थेवा कला - प्रतापगढ़ कांच पर हरे रंग से स्वर्णिम



राजस्थान में छतरियां

1. गैटोर की छतरियां नाहरगढ़ (जयपुर) में स्थित है। ये कछवाहा शासको



राजस्थान के महल

1. जयपुर स्थापना - 18 नवम्बर, 1727 को, कच्छवाहा नरेश सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा की गई। उपनाम- "भारत का पेरीस" "गुलाबी नगर" "रंग श्री को द्वीप (Island of Glory)



राजस्थान की हवेलियां

1. सुराणों की हवेलियां - चुरू 2. रामविलास गोयनका की हवेली- चुरू



राजस्थान के प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल

1. जवाहर कला केन्द्र-जयपुर स्थापना - 1993 ई. इस संस्था द्वारा सर्वाधिक सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। 2. जयपुर कत्थक केन्द्र-जयपुर