उच्च न्यायालय

प्रष्ठभूमि


  • भारत की समेकित एकल न्यायिक व्यवस्था में उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय से नीचे होता है, राज्य के न्यायिक प्रशासन में उच्च न्यायालय की स्थिति शीर्ष पर होती है।
  • भारत में उच्च न्यायालय संस्था का सर्वप्रथम गठन वर्ष-1862 में कलकत्ता, बंबई और मद्रास व वर्ष-1866 में चौथे उच्च न्यायालय की स्थापना, इलाहाबाद में हुई।

उच्च न्यायालय व 7वां संविधान संशोधन

  • भारत के संविधान में प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गयी है, लेकिन 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 में सरकार को यह अधिकार दिया गया, कि वह दो या दो से अधिक राज्यों एवं एक संघ राज्य के लिए साझा उच्च न्यायालय की स्थापना कर सकती है।

वर्तमा न में उच्च न्यायालय

  • इस समय भारत में कुल 25 उच्च न्यायालय हैं। दिल्ली एकमात्र ऐसा संघ क्षेत्र है, जिसका अपना उच्च न्यायालय है। न्यायालय की अधिकारिता में संशोधन का अधिकार संसद का है।

उच्च न्याया लय का संगठन                       

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 216 उच्च न्यायालय के गठन का उल्लेख किया गया है|
  • इसमें यह कहा गया है कि प्रत्येक उच्च न्यायालय मुख्य न्यायमूर्ति और अन्य न्यायाधीशों से मिलकर बनेगा जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति समय-समय पर करेगा।

न्यायाधीशों  की नियुक्ति-

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान है।
  • उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा उस राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाएगी। इसी संदर्भ में तृतीय न्यायाधीश वाद (वर्ष-1998) में कहा गया, कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को अपने दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों से परामर्श करना चाहिए, अकेले नहीं।
  • अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा उस राज्य के राज्यपाल से परामर्श करता है|

न्यायाधीशों की  योग्यता-

  • अनुच्छेद 217(2) के अनुसार-

1. वह भारत का नागरिक हो।
2. कम से कम 10 वर्ष तक अधीनस्थ न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर रहा हो अथवा किसी भी उच्च न्यायालय में लगातार 10 वर्ष तक वकालत की हो
3. राष्ट्रपति की दृष्टि में वह पारंगत अथवा प्रतिष्ठित अधिवक्ता हो।

 शपथ/प्र तिज्ञान-

  • संविधान के अनुच्छेद-219 के अनुसार न्यायाधीश राज्यपाल या उसके द्वारा किसी नियुक्त अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ लेता है।

न्यायाधीशों  का कार्यकाल-

  • उनके कार्यकाल के संदर्भ में 62 वर्ष की आयु तक का प्रावधान है।
  • न्यायाधीशों की आयु से संबंधित किसी प्रश्न का निश्चय भारत के मुख्य न्यायाधीश की सलाह से राष्ट्रपति द्वारा किया जायेगा।

न्यायाधीशों का  त्यागपत्र-

  • उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीश राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र देते हैं।

न्यायाधीशों को  हटाने की प्रक्रिया-

  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को राष्ट्रपति द्वारा दो आधारों पर हटाया जा सकता है

(i) दुर्व्यवहार के आधार पर।
(ii) सिद्ध कदाचार के आधार पर।

  • संविधान में न्यायाधीशों को हटाने के लिए संसद की विशेष प्रक्रिया का उल्लेख है। न्यायाधीश को संसद की कुल सदस्य संख्या का बहुमत एवं उपस्थित तथा मत देने वाले 2/3 सदस्यों के बहुमत से हटाया जाएगा।

वेतन व  भत्ते-  

  • वर्तमान में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को दो लाख पच्चास हजार प्रति माह तथा अन्य न्यायाधीशों को दो लाख पच्चीस हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं।    

न्यायाधीशों  का स्थानांतरण-

  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में राष्ट्रपति के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से स्थानांतरण किया जाता है।

उच्च न्यायाल य की स्वतंत्रता

  • नियुक्ति- राष्ट्रपति द्वारा न्यायपालिका के ही सदस्यों के परामर्श से।
  • हटाने की प्रक्रिया भी जटिल है।
  • सेवा एवं शर्तें निश्चित होती है।
  • वेतन व भत्ते, भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं।
  • न्यायाधीशों के कार्यों पर चर्चा नहीं की जा सकती है।
  • अवमानना के लिए दण्ड देने की शक्ति होती है। 

उच्च न्यायालय का न्यायिक अधिकार क्षेत्र-

  • वर्तमान में उच्च न्यायालयों को निम्न न्यायिक क्षेत्र और शक्तियाँ प्राप्त हैं-

1. प्रारंभिक क्षेत्राधिकार-

  • उच्च न्यायालय को निम्न मामलों पर प्रथम दृष्टया सुनवाई करने का अधिकार प्राप्त है|
  • अधिकारिता का मामला, वसीयत, विवाह, तलाक, कंपनी कानून एवं न्यायालय की अवमानना में, सांसद एवं विधायक के निर्वाचन संबंधी विवादों में, राजस्व मामले या राजस्व संग्रहण के लिए बनाये गये किसी अधिनियम अथवा आदेश के संबंध में, नागरिकों के मूल अधिकारों के प्रवर्तन में,संविधान की व्याख्या के संबंध में अधीनस्थ न्यायालय से स्थानांतरित मामलों की सुनवाई करता है।

2. रिट क्षे त्राधिकार

  • अनुच्छेद-226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को भी निम्न पाँच रिट अधिकारिता जारी करने का अधिकार है|
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, उत्प्रेषण, प्रतिषेध व अधिकार उत्प्रेक्षा|

3. अपीलीय  क्षेत्राधिकार-

  • उच्च न्यायालय, मूलतः एक अपीलीय न्यायालय है, इसमें संबंधित राज्य क्षेत्र के अंतर्गत् आने वाले अधीनस्थ न्यायालयों के आदेशों के विरुद्ध सुनवाई की जाती है।

4.   पर्यवेक्षी य क्षेत्राधिकार-

  • उच्च न्यायालय को यह अधिकार प्राप्त है, कि वह अपने क्षेत्राधिकार के सभी न्यायालयों व सह-न्यायालयों पर नजर रखे, परंतु इसमें सैन्य न्यायालय और अधिकरण नहीं आते हैं।

5. अधीनस्थ  न्यायालयों पर नियंत्रण-

  • उच्च न्यायालय के पास अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक नियंत्रण जैसी अन्य शक्तियाँ भी प्राप्त होती हैं।

6. अभिलेख  न्यायालय-

  • अभिलेख न्यायालय के रूप में उच्च न्यायालय को दो प्रकार की शक्तियाँ प्राप्त हैं-

(i) उच्च न्यायालय के फैसले, कार्यवाही और कार्य, शाश्वत स्मृति और परिसाक्ष्य के लिए रखे जाते हैं। इन अभिलेखों को साक्ष्य के तौर पर रखा जाता है और अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यवाही के समय इन पर सवाल नहीं उठाए जा सकते तथा इन्हें कानूनी परंपरा और संदर्भो की तरह माना जाता है।
(ii) इन्हें न्यायालय की अवमानना पर साधारण कारावास, आर्थिक दण्ड अथवा दोनों प्रकार के दण्ड देने का अधिकार है।

7. अधीक्षण  संबंधी अधिकारिता-

  • उच्च न्यायालय के पास न्यायिक तथा प्रशासनिक दोनों प्रकार की अधीक्षण अधिकारिता प्राप्त हैं।

8. न्यायिक  पुनर्विलोकन की शक्ति-

  • उच्च न्यायालय की न्यायिक-पुनर्विलोकन की शक्ति राज्य विधान मण्डल व केन्द्र सरकार दोनों के अधिनियमों और कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता के परीक्षण के लिए है।

राजस्थान उ च्च न्यायालय

  • राजस्थान के पहले उच्च न्यायालय का उद्घाटन जयपुर सवाई मानसिंह II के द्वारा 29 अगस्त, 1949 को जोधपुर में किया गया था। जिसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश कमलकांत वर्मा थे।
  • राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर बेंच को वर्ष 1958 में समाप्त कर दिया गया लेकिन पूर्वी राजस्थान के जिलों की मांग के फलस्वरूप 8 दिसंबर, 1976 को राजस्थान के राज्यपाल और राजस्थान के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श के बाद जयपुर में स्थायी पीठ की स्थापना की। 

प्रमुख उच्च न्यायालय और उनका न्यायिक क्षेत्र

 नाम 

न्यायिक क्षेत्र

1.

इलाहाबाद

उत्तर प्रदेश

2.

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश

3.

बंबंई  

महाराष्ट्र, गोवा, दादरा और नागर हवेली

4.

कलकत्ता

पश्चिम बंगाल तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

5. 

छत्तीसगढ़ 

छत्तीसगढ़ 

6.

दिल्ली 

दिल्ली 

7.

गुवाहाटी

असम, नागालैंड, मिजोरम और अरूणाचल

8.

गुजरात 

गुजरात 

9. 

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश

10.

जम्मू एवं कश्मीर

जम्मू एवं कश्मीर

11.

झारखंड

झारखंड

12.

कर्नाटक

कर्नाटक

13.

केरल

केरल और लक्षद्वीप

14.

मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश

15.

मद्रास   

तमिलनाडु और पुडुचेरी

16.

मणिपुर

मणिपुर

17.

मेघालय

मेघालय

18.

उड़ीसा 

ओडिशा

19.

पटना

बिहार

20.

पंजाब और हरियाणा

पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़

21.

राजस्थान

राजस्थान

22.

सिक्किम

सिक्किम

23.

त्रिपुरा

त्रिपुरा

24.

उत्तराखण्ड 

उत्तराखण्ड 

25.

तेलगांना

तेलगांना

   

अनुच्छेद

विषय-वस्तु

214

राज्यों के लिए उच्च न्यायालय

215

उच्च न्यायालय अभिलेखों के न्यायालय के रूप में

216

उच्च न्यायालय का गठन

217

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद के लिए नियुक्ति तथा दशाएँ

218

उच्च् न्यायालय में उच्च्तम न्यायालय से संबंधित कतिपय प्रावधानों का लागू होना

219

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का शपथ ग्रहण

220

स्थायी न्यायाधीश बहाल होने के बाद प्रैक्टिस पर प्रतिबंध

221

न्यायाधीशों का वेतन इत्यादि

222

किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण

223

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति

224

अतिरिक्त एवं कार्यवाहक न्यायाधीशों की नियुक्ति

224ए

उच्च न्यायालयों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति

225

उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार

226

कतिपय याचिकाएँ जारी करने की उच्च न्यायालयों की शक्ति

226ए

अनुच्छेद 226 के तहत केन्द्रीय अधिनियमों की संवैधानिक वैधता पर विचार नहीं किया जाना (निरस्त)

227

उच्च न्यायालय के सभी न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति

228

उच्च न्यायालयों में कतिपय मामलों का स्थानांतरण

228ए

राज्य अधिनियमों की संवैधानिक वैधता से संबंधित प्रश्नों के विस्तारण के लिए विशेष प्रावधान (निरस्त)

229

पदाधिकारी तथा सेवक एवं उच्च न्यायालयों में व्यय

230

उच्च न्यायालयों में क्षेत्राधिकार संघीय क्षेत्रों तक विस्तार

231

दो या अधिक राज्यों के लिए एक साझे उच्च न्यायालय की स्थापना

232

व्याख्या (निरस्त)