राजस्थान में कृषि जलवायु प्रदेश

राजस्थान में कृषि जलवायु प्रदेश
(शस्य जलवायु प्रदेश)

कृषि विभाग द्वारा कृषि पद्धति, जल की उपलब्धता, फसलों के प्रारूप तथा कृषि विकास के आधार पर राजस्थान को (10) कृषि जलवायु प्रदेश (शस्य जलवायु प्रदेश) में विभाजित किया गया है। राजस्थान सरकार ने कृषि विकास का आधार पर (10) ‘कृषि जलवायु प्रदेशों’ को स्वीकार किया है।
राजस्थान में 5 जलवायु प्रदेश हैं- इन 5 जलवायु प्रदेशों को कृषि विकास के आधार पर 10 कृषि जलवायु प्रदेशों में विभक्त किया है-
जो कि निम्नलिखित हैं:-

शुष्क

अर्द्धशुष्क

उपआर्द्र

आर्द्र

अतिआर्द्र

IA

IIA

IIIA

IVA

V

IB

IIB

IIIA

IVB

 

IC

 

IA – शुष्क पश्चिमी रेतीला मैदान

  • विस्तार क्षेत्र – 2 जिले (बाड़मेर, जोधपुर)
  • ग्राहय परीक्षण केन्द्र – रामपुरा (जोधपुर)

विशेषताएँ

  • वर्षा – 20-37 सेमी
  • मृदा – रेतीली बलुई मृदा (एन्टीसोल)
  • राजस्थान में सर्वाधिक कृषित क्षेत्रफल वाला कृषि जलवायु प्रदेश
  • बालुकों स्तूपों की प्रधानता
  • मुख्य फसलें - बाजरा, गेहूँ, दलहन, तिलहन आदि

I-B – सिंचित उत्तर पश्चिम मैदान

  • विस्तार क्षेत्र – श्री गंगानगर, हनुमानगढ़
  • ग्राहय परीक्षण केन्द्र – श्री करणपुर (श्री गंगानगर)

विशेषता

  • वर्षा – 10 - 35 सेमी.
  • मृदा – लवणता युक्त जलोढ़ मृदा
  • राजस्थान में सर्वाधिक सिंचित कृषि क्षेत्र वाला कृषि जलवायु प्रदेश
  • राजस्थान में सर्वाधिक सेम या जल प्लावन की समस्या से ग्रसित
  • मुख्य फसलें – गेहूँ (श्री गंगानगर), बासमती चावल (हनुमानगढ़)
  • कपास (अमेरीकन कपास) (हनुमानगढ़)
  • अगेती कपास (श्री गंगानगर)
  • गन्ना

IC – उच्च शुष्क एवं सीमित सिंचित मैदान

  • विस्तार क्षेत्र – चूरू, बीकानेर, जैसलमेर
  • ग्राहय परीक्षण केन्द्र – लूणकरणसर (बीकानेर)

विशेषताएँ

  • वर्षा – 10-35 सेमी.
  • मृदा – रेतीली बलुई मृदा
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा कृषि जलवायु प्रदेश (7.7 मिलियन हेक्टेयर)
  • राजस्थान में सर्वाधिक दैनिक तथा वार्षिक तापान्तर वाला कृषि जलवायु प्रदेश
    (सर्वाधिक दैनिक तापान्तर जिला - जैसलमेर)
    (सर्वाधिक वार्षिक तापान्तर जिला - चुरू)

प्रमुख फसलें – मूंगफली, चना,

  • राजस्थान का राजकोट (लूणकरणसर, बीकानेर)

II-A अंत: प्रवाह शुष्क मैदान

  • विस्तार क्षेत्र -  झुंझुनूँ, सीकर, नागौर
  • ग्राहय परीक्षण – आबुसर (झुंझुनूँ)

विशेषताएँ

  • वर्षा – 30-50 सेमी
  • मृदा – चूना युक्त मृदा /धूसर मृदा/सीरोज्म मृदा
  • मुख्य नदी कांतली नदी है और सिंचाई का प्रमुख साधन जोहड़ है।
  • मुख्य फसलें – दलहन, मसाले (पान मैथी), अलसी

IIB लूनी बेसिन का संक्रांति मैदान

  • विस्तार – पाली, जालोर, सिरोही
  • ग्राहय परीक्षण केन्द्र – सुमेरपुर (पाली)

विशेषताएँ

  • वर्षा – 30-50 सेमी.
  • मृदा – भूरी दोमट मिट्‌टी
  • राजस्थान में मृदा सम्बन्धी विषमता सर्वाधिक IIB/पाली/सुमेरपुर में पाई जाती है।
  • मुख्य फसलें – जीरा, ईसबगोल (जालोर)
  • सौंफ (सिरोही)
  • तिल (पाली)

III-A अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदान

  • विस्तार क्षेत्र -  जयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक
  • ग्राहय परीक्षण केन्द्र -  तबीजी (अजमेर)

विशेषताएँ –

  • वर्षा – 50-70 सेमी.
  • मृदा – लाल पीली मृदा (भूरी मृदा)
  • मुख्य फसल – ज्वार (अजमेर)
  • मटर (जयपुर)
  • आँवला (जयपुर)
  • तबीजी (अजमेर) में – राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान संस्थान भी है।

III-B बाढ़ प्रभावित पूर्वी मैदान

  • विस्तार क्षेत्र – अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर
  • ग्राहय परीक्षण केन्द्र – मलिकपुर (भरतपुर)

विशेषताएँ –

  • वर्षा - 50-70 सेमी.
  • मृदा -  जलोढ़ मृदा (एल्फीसोल)
  • सर्वाधिक उपजाऊ कृषि जलवायु प्रदेश (उपजाऊ मैदानी प्रदेश)
  • मुख्य फसलें – बाजरा, (सर्वाधिक - अलवर), सरसों (भरतपुर)
  • अवनालिका अपरदन से ग्रसित प्रदेश
  • राजस्थान में सर्वाधिक मिश्रित कृषि इसी कृषि जलवायु प्रदेश में होती है। (कृषि+पशुपालन)

IV-A- अर्द्ध आर्द्र दक्षिणी मैदान

  • विस्तार क्षेत्र – राजसमन्द, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़
  • ग्राहय परीक्षण केन्द्र – चित्तौड़गढ़

विशेषताएँ

  • वर्षा - 50-90 सेमी.
  • मृदा -  लाल मृदा (मक्का हेतु उपयोगी)
  • मुख्य फसलें -  मक्का  उत्पादन – भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़)
  • अफीम (चित्तौड़गढ़)
  • राजस्थान में तालाबों से सर्वाधिक सिंचाई – भीलवाड़ा में होती है।

IV-B- आर्द्र दक्षिणी मैदान

  • विस्तार क्षेत्र – उदयपुर, प्रतापगढ़, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा
  • ग्राहय परीक्षण केन्द्र – कोई नहीं है।

विशेषताएँ

  • वर्षा - 50-90 सेमी.
  • मृदा – लाल लोमी
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा कृषि जलवायु प्रदेश (1.2 मिलियन हेक्टेयर)
  • मुख्य फसलें – चावल (माही, सुगन्धा - बाँसवाड़ा), मक्का -  (सर्वाधिक उदयपुर में बोया जाता है जबकि उत्पादन IVA में होता है)
  • गन्ना

V- अति आर्द्र दक्षिण- पूर्वी मैदान

  • विस्तार क्षेत्र – कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़ा
  • ग्राहय परीक्षण केन्द्र – छत्रपुर (बूंदी)

विशेषताएँ

  • वर्षा - 65-110 सेमी.
  • मृदा – मध्यम काली मृदा (वर्टीसोल)
  • सर्वाधिक वर्षा/ आर्द्रता वाला कृषि जलवायु प्रदेश
  • मुख्य फसलें – सोयाबीन (बाराँ), धनिया, कपास (नरमा), गन्ना

राजस्थान में कृषि जलवायु प्रदेश

प्रदेश

प्रदेश का नाम

जिले (विस्तार)

ग्राहय परीक्षण केंद्र

1. I -A-

पश्चिमी मरुस्थलीय मैदान -

बाड़मेर, जोधपुर

रामपुरा (जोधपुर)

2. I-B-

सिंचित उत्तर पश्चिम मैदान -

श्री गंगानगर, हनुमानगढ़

श्रीकरणपुर (श्री गंगानगर)

3. I-C-

उच्च शुष्क एवं सीमित सिंचित क्षेत्र -

जैसलमेर बीकानेर, चुरू

लूणकरणसर (बीकानेर)

4. II-A-

अंत: प्रवाह शुष्क मैदान -

झुंझुनूँ, सीकर, नागौर

आबुसर (झुंझुनूँ)

5. II-B-

लूनी बेसिन का संक्रांति क्षेत्र -

पाली, जालोर, सिरोही

सुमेरपुर (पाली)

6. III-A-

अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदान -

जयपुर, अजमेर, दौसा, टोंक

तबीजी (अजमेर)

7. III-B-

बाढ़ प्रभावित पूर्वी मैदान -

अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर

मलिकपुर (भरतपुर)

8. IV-A-

अर्द्ध आर्द्र दक्षिणी मैदान -

राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़

चित्तौड़गढ़

9. IV-B-

आर्द्र दक्षिणी मैदान -

उदयपुर, प्रतापगढ़, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा

नहीं है।

10. V -

अति आर्द्र दक्षिणी पूर्वी मैदान -

कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़

छत्रपुर (बूँदी)