राजस्थान का ऊर्जा संसाधन
ऊर्जा:-
- किसी भी देश के आर्थिक विकास में ऊर्जा एक महत्वपूर्ण संसाधन है, विश्व में भारत के समान ही राजस्थान का ऊर्जा क्षेत्र भी विविधता से परिपूर्ण है। राजस्थान निर्माण के समय यहाँ 15 छोटे विद्युत गृह थे जिनसे कुल स्थापित विद्युत क्षमता मात्र 13.27 मेगावॉट थी। राजस्थान में विद्युत विकास हेतु सार्थक प्रयास 1 जुलाई, 1957 को राजस्थान राज्य विद्युत मण्डल की स्थापना के साथ प्रारम्भ किया।
- ऊर्जा संसाधन अथवा ऊर्जा की आपूर्ति वर्तमान युग की प्राथमिक आवश्यकता है क्योंकि ऊर्जा की उपलब्धता ही आर्थिक विकास को नियंत्रित एवं निर्धारित करती है।
- वर्तमान में उद्योग, परिवहन, कृषि से लेकर घरेलू कार्यों आदि सभी क्रियाओं में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, क्योंकि वर्तमान युग मशीनरी युग है और मशीनों को चलाने हेतु ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- संविधान में विद्युत को समवर्ती सूची में स्थान दिया गया है।
अधिष्ठापित क्षमता:-
- राज्य में मार्च, 2019 तक ऊर्जा की अधिष्ठापित क्षमता 21,077.64 मेगावॉट थी। अधिष्ठापित क्षमता वर्ष 2019-20 में (दिसम्बर, 2019 तक) के 736.96 मेगावॉट की वृद्धि हुई। इस प्रकार दिसम्बर, 2019 तक अधिष्ठापित क्षमता बढ़कर 21,175.90 मेगावॉट हो गई है।
ऊर्जा उपलब्धता की प्रवृति:-
- राज्य में मार्च, 2012 तक ऊर्जा की उपलब्धता 5005.38 करोड़ यूनिट थी, जो कि बढ़कर मार्च, 2019 तक 8,116.73 करोड़ यूनिट हो गई। वर्ष 2011-12 से वर्ष 2018-19 तक कुल ऊर्जा उपलब्धता में 62.16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार से कुल शुद्ध ऊर्जा के उपभोग में भी 59.16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
ऊर्जा के स्रोत:-
- ऊर्जा स्रोतों को दो भागों में विभक्त किया जाता है-
1. परम्परागत ऊर्जा स्रोत
2. गैर-परम्परागत अथवा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत
परम्परागत ऊर्जा स्रोत (Conventional Energy):-
- परम्परागत ऊर्जा स्रोत में जल विद्युत, तापीय विद्युत, खनिज तेल/पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और आण्विक ऊर्जा के स्रोत आते हैं।
जल विद्युत
- जल विद्युत वर्तमान में राजस्थान का प्रमुख ऊर्जा का स्रोत है। यद्यपि राज्य की प्राकृतिक परिस्थितियाँ जल विद्युत उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं है फिर भी राज्य में विद्युत आपूर्ति का लगभग 40 प्रतिशत जल है।
- राजस्थान में जहाँ राज्य की नदियों पर बांध बना कर विद्युत उत्पादित की जाती है वहीं अन्य राज्यों से भी बिजली प्राप्त की जाती है।
- राज्य की प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं-
क्र. सं. | परियोजना | साझेदारी | क्षमता MW में |
1. | भांखड़ा-नांगल प्रोजेक्ट (राज्य का अंश 15.2%) | राजस्थान- पंजाब-हरियाणा | 1493 MW, राज. 227.3 |
2. | व्यास परियोजना (देहर एवं पौंग) (राज्य का अंश 20% व 59%) | राजस्थान- हरियाणा-पंजाब | राज. 422.64 MW |
3. | माही-बजाज सागर (राज्य का अंश 45%) | राजस्थान-गुजरात | 140.00 MW |
4. | चम्बल पावर प्रोजेक्ट,(राज्य का अंश 50%) | राजस्थान-मध्यप्रदेश | 193 MW |
5. | राहूघाट प्रोजेक्ट (करौली) (राज्य का अंश 50%) | राजस्थान-मध्यप्रदेश | 79.00 MW |
6. | अनास प्रोजेक्ट (बाँसवाड़ा) | राजस्थान | 140.00 MW |
7. | जाखम लघु पन बिजली (प्रतापगढ़) | राजस्थान | 5.50 MW |
8. | लघु पन बिजली परियोजनाएँ-अनूपगढ़, चारणवाला, सूरतगढ़, पूगल-II, मांगरोल, बीसलपुर, आदि। | राजस्थान | 23.85 MW |
केन्द्रीय जल परियोजनाओं से राज्य का अंश | |||
1. | सलाल परियोजना, उद्यमपुर (J&K) (राज्य का अंश 2.95%) | नेशनल हाइड्रोपॉवर कॉर्पोरेशन (NHPC) | 690.00 MW |
2. | उरी परियोजना, बारामूला (J&K) (राज्य का अंश 8.960%) | NHPC | 480.00 MW |
3. | चमेरा परियोजना-हिमाचल (राज्य का अंश 19.60% व 9.6%) | NHPC-I | 540.00 MW |
4. | टनकपुर परियोजना, उत्तराखण्ड (राज्य का अंश 11.53%) | NHPC | 94.20 MW |
5. | दुलहस्ती परियोजना (J&K) (राज्य का अंश 10.88%) | NHPC | 390.00 MW |
6. | धौलीगंगा परियोजना, उत्तराखण्ड (राज्य का अंश 9.64%) | NHPC | 280.00 MW |
7. | पार्वती पन विद्युत प्रोजेक्ट (हिमाचल प्रदेश) (राज्य का अंश 10.9%) | NHPC | 520.00 MW |
8. | नाथपा-झाकरी प्रोजेक्ट (हिमाचल प्रदेश) (राज्य का अंश 7.47%) | NHPC | 1500.00 MW |
9. | टिहरी प्रोजेक्ट (उत्तराखण्ड) (राज्य का अंश 7.50%) | जल विद्युत विकास निगम | 1000 MW |
10. | एन.जे.पी.एस (6x250)(एस.जे.वी.एन.एल.) (राज्य का अंश 7.47%) |
| 1500 MW |
11. | सेवा एच.ई.पी.स्टेज-II (यूनिट 1 से 3)(3X40 MW) (राज्य का अंश 10.84%) |
| 120 MW |
12. | कोटेश्वर एच.ई.पी (4X100 MW ) (यूनिट 1 से 4) (राज्य का अंश 8.36%) |
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13. | रामपुर एच.ई.पी.(यूनिट 1 से 6) (6X68.67 MW ) (राज्य का अंश 7.72%) |
| 412.02 MW |
14. | कोलदाम एच.ई.पी.(2X200 MW) (राज्य का अंश 10.72%) |
| 800.00 MW |
| सिगंरोली एच.ई.पी. (2x4 MW) |
| 8.00 MW |
तापीय विद्युत:-
- कोयले द्वारा उत्पादित विद्युत को तापीय विद्युत कहा जाता है। इसके लिए उत्तम कोटि के कोयले की आवश्यकता होती है जो राजस्थान में उपलब्ध नहीं है। अत: अन्य राज्यों से मंगाना पड़ता है।
(I) लिग्नाइट आधारित:-
- राज्य में लिग्नाइट का इतना बड़ा भंडार है कि अगर इसका पूरी तरह से दोहन किया जाए, तो इससे करीब 25,000 मेगावॉट बिजली 25 साल तक बनाई जा सकती है।
- राज्य की प्रमुख तापीय विद्युत परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं-
थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट्स | ||
क्र.सं. | परियोजना (कोयला आधारित) | अधिष्ठापित क्षमता MW (U-यूनिट) |
1. | कोटा सुपर थर्मल पॉवर ( KTPS), कोटा (इकाई 1-7) | प्रथम चरण U I, II X 100 200 MW 1983 द्वितीय चरण U III, IV X 210 420 MW 1988, 89 तृतीय चरण U V 210 MW 1994 चतुर्थ चरण U VI 195 MW 2003 पंचम चरण U VII 195 MW 2009 |
कुल स्थापित क्षमता - 1240 MW | ||
2. | सूरतगढ़ सुपर थर्मल पॉवर (श्रीगंगानगर), (इकाई 1-6)
सुपर क्रिटिकल
| प्रथम चरण U I 250 MW 1999 U II 250 MW 2000 द्वितीय चरण U III 250 MW 2002 U IV 250 MW 2002 तृतीय चरण U V 250 MW 2003 चतुर्थ चरण U VI 250 MW 2009 |
स्थापित क्षमता = 1500 MW | ||
पंचम चरण U VII 660 MW U VIII 660 MW षष्ठम चरण U IX 660 MW 12वीं योजना U X 660 MW | ||
3. | गिरल थर्मल पॉवर (बाड़मेर), (1000 MW) (राज. राज्य विद्युत उत्पादन निगम + KLF जर्मनी) पहला गैसीकरण लिग्नाइट तकनीकी आधारित | प्रथम चरण U I 125 MW 2007 U II 125 MW 2008 |
स्थापित क्षमता - 250 MW | ||
4. | छबड़ा सुपर थर्मल पॉवर (बाराँ), (इकाई 1-4)
छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट (इकाई 5-6) का मुख्यमंत्री द्वारा लोकापर्ण 30 जून, 2019 को किया गया। यह प्रदेश की पहली सुपर क्रिटिकल इकाइयाँ हैं। | प्रथम चरण U I 250 MW 2009 U II 250 MW 2010 द्वितीय चरण U III 250 MW 2013 U IV 250 MW 2014 तृतीय चरण U V 660 MW 9.8.2018 U VI 660 MW 2.4.2019 |
कुल क्षमता = 2320 MW | ||
5. | नैवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन | 1. बीकानेर 2 x 250 500 MW 2. पलाना-हाडला 2 x 125 250 MW 3. बीठनोक 2 x 125 250 MW 4. बरसिंहसर 2 x 125 250 MW |
कुल क्षमता = 1250 MW | ||
6. | भादेशर सुपर थर्मल पॉवर (बाड़मेर) (सार्वजनिक + निजी राजवेस्ट पॉवर लिमिटेड) | कुल - 8 x 125 = 1000 MW |
7. | हाड़ला थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट (बीकानेर) | = 125-00 MW |
8. | दानपुर सुपर पॉवर प्रोजेक्ट ( बाँसवाड़ा-निजी क्षेत्र) | = 1320-00 MW |
9. | दानपुर सुपर थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट (बाँसवाड़ा-राज्य विद्युत उत्पादन निगम) | = 1320-00 MW |
10. | झालावाड़ सुपर थर्मल पॉवर (सुपर किस्टिकल) | प्रथम चरण U I 600 MW स्वीकृत U II 600 MW |
11. | जालीपा-कपूरड़ी सुपर थर्मल- बाड़मेर (मैसर्स वेस्ट पॉवर जयपुर) | कुल क्षमता 1080 MW 2008 से |
12. | कालीसिंध सुपर थर्मल पॉवर- झालावाड़
| प्रथम चरण U I 600 MW 2014 U II 600 MW 2015 |
अधिष्ठापित क्षमता = 1200 MW | ||
13. | कवई सुपर थर्मल पॉवर (बाराँ) निजी क्षेत्र अडानी समूह द्वारा | प्रथम चरण U I 330 MW U II 330 MW द्वितीय चरण U III 330 MW U IV 330 MW |
कुल क्षमता 1320.00 MW | ||
14. | गुढ़ा थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट (बीकानेर) (निजी क्षेत्र की पहली लिग्नाइट आधारित-मरूधरा क. आन्ध्रा) | = 125.00 MW |
15. | बाँसवाड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल पॉवर प्रोजक्ट | प्रथम चरण U I 660 MW U II 660 MW द्वितीय चरण U III 500 MW |
(II) खनिज तेल/पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस
- खनिज तेल अथवा पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन का यौगिक है जो अवसादी शैलों में विशिष्ट स्थानों पर पाया जाता है तथा प्राकृतिक गैस के साथ निकलता है।
- राजस्थान के भूगर्भित एवं चुम्बकीय सर्वेक्षण से यह तथ्य स्पष्ट हुए कि पश्चिमी राजस्थान क्षेत्र में खनिज तेल और गैस के भण्डार हो सकते हैं।
गैस आधारित पॉवर प्रोजेक्ट | ||
क्र. सं. | परियोजना | उत्पादन क्षमता |
1. | रामगढ़ गैस पॉवर (जैसलमेर) (गैस आधारित) (इकाई 1-6) | प्रथम चरण U I 3.00 MW 1994 U II 35.05 MW 1996 द्वितीय चरण U III 37.5 MW 2002 U IV 37.5 MW 2003 तृतीय चरण U V 110.00 MW 2013 U VI 50.00 MW 2014 चतुर्थ चरण U VII 160 MW |
कुल क्षमता - = 273.5 MW | ||
2. | धौलपुर गैस कम्बाइंड (GAIL द्वारा आपूर्ति) (इकाई 1-3) | U I 110 MW 2008 U II 110 MW 2008 U III 110 MW 2008 |
दो गैस आधारित तथा 1 भाप आधारित होगी | स्थापित क्षमता = 330 MW | |
द्वितीय चरण U IV, V, VI 330 MW | ||
3. | केशोरायपाटन गैस थर्मल पॉवर (बूँदी) | 3 X 110 330 MW |
4. | झामर-कोटड़ा गैस थर्मल पॉवर (उदयपुर- RSMML+ हिन्दुस्तान जिंक) | = 4 MW |
5. | कोटा गैस | प्रथम चरण U I 3 x 110 = 330.00 MW प्रथम चरण U I 3 x 110 = 330.00 MW |
6. | छबड़ा गैस | |
राज्य की प्रमुख खनिज तेल/पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं-
केन्द्रीय थर्मल प्रोजेक्ट्स से राज्य का अंश | ||||
क्र. सं. | परियोजना | राज्य का अंश | क्षमता | राज. में उपलब्ध क्षमता |
1. | सिंगरौली थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट(उत्तर प्रदेश) NTPC | 15% | 2000 MW | 300.00 |
2. | रिहन्द थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट(उत्तर प्रदेश) I NTPC | 9.5% | 1000 MW | 95.00 |
3. | रिहन्द थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट(उत्तर प्रदेश) II | 10% | 1000 MW | 100.00 |
4. | सतपुड़ा थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट(मध्यप्रदेश) |
| 313 MW |
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5. | ऊँचाहार थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट(उत्तर प्रदेश) |
| 1050 MW | 81.00 |
6. | कहलगाँव सुपर थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट(पटना, बिहार) NTPC |
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7. | अन्ता गैस थर्मल पॉवर प्लांट (बाराँ) राज्य में स्थापित प्रथम गैस प्लांट NTPC | 19.81% | 419 MW | 83.07 |
8. | औरया थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट(उत्तर प्रदेश) NTPC | 9.2% | 663.36MW | 61.03 |
9. | दादरी थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट(उत्तर प्रदेश) NTPC | 9.28% | 830 MW | 77.00 |
10. | खेलगाँव टी.पी.एस. स्टेज-I, यूनिट- I (1 x 125) | 4.87 | 1500 MW | 73.00 |
आण्विक/परमाणु ऊर्जा:-
- ऊर्जा की कमी को दूर करने हेतु भारत में परमाणु ऊर्जा के विकास को प्रारम्भ किया गया। इसके लिए सर्वप्रथम तारापुर में परमाणु केन्द्र स्थापित किया गया और दूसरा केन्द्र राजस्थान परमाणु शक्ति परियोजना के रूप में प्रारम्भ किया गया।
- राज्य की प्रमुख आण्विक/परमाणु ऊर्जा परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं-
राजस्थान परमाणु शक्ति परियोजना (RAAP):-
- राजस्थान परमाणु शक्ति परियोजना भारत की ऐसी पहली परियोजना है जो प्राकृतिक यूरेनियम, भारी जल एवं प्रशीतन द्वारा चालित है।
- इसकी पहली इकाई 11 अगस्त, 1972 को प्रारम्भ की गई जिसकी क्षमता 400 मेगावॉट की है।
- वर्तमान में इसकी 6 इकाइयों से विद्युत उत्पादन हो रहा है तथा 7वीं और 8वीं इकाई निर्माणाधीन है।
- अभी इसकी कुल स्थापित क्षमता 1280 मेगावॉट है।
- रावतभाटा स्थित केन्द्र सरकार के उपक्रम भारी पानी संयंत्र से अमेरिका को भारी पानी निर्यात किया जाता है। रावतभाटा के भारी पानी की उच्च गुणवत्ता होने के कारण अमेरिका में इसकी भारी मांग है।
बाँसवाड़ा न्यूक्लियर पॉवर:-
- बाँसवाड़ा न्यूक्लियर पॉवर माही नदी के किनारे पर स्थित है जो शत प्रतिशत राज्य सरकार की परियोजना है जो प्रस्तावित है।
- यह राज्य का दूसरा परमाणु बिजलीघर है जिसकी उत्पादन क्षमता 700 मेगावॉट है।
गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत (Non Conventional Energy):-
- गैर परम्परागत स्रोत में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, बायो गैस आदि आते हैं।
सौर ऊर्जा:-
- सौर ऊर्जा अर्थात् सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का एक अनवरत स्रोत है। राजस्थान में सौर ऊर्जा की अपार सम्भावनाएँ हैं क्योंकि यहाँ वर्ष भर आकाश साफ रहता है और सूर्य का ताप प्राप्त होता रहता है।
- सौर ऊर्जा का उपयोग घरेलू कार्यों में, कृषि एवं उद्योगों में किया जा सकता हैं। प्रकाश हेतु लाइटें, कुओं से पानी खींचने, कृषि जिन्सों को सुखाने तथा शीत भण्डारण के अतिरिक्त खाना बनाने, तथा पानी गर्म करने आदि में इसका उपयोग किया जा सकता हैं। इसी के साथ कुटीर उद्योग में भी ऊर्जा हेतु इसका उपयोग संभव है।
- सौर ऊर्जा का सीधा उपयोग नहीं किया जा सकता है अपितु इसे संग्रहित करने हेतु ‘सौर संग्राहक’ का प्रयोग किया जाता है।
- सौर ऊर्जा से प्रकाश प्राप्त करने के लिए ‘फोटोवोल्टिक तकनीक’ का उपयोग होता है।
- राजस्थान में सौर ऊर्जा निसन्देह ऊर्जा का एक ऐसा स्रोत है जो भविष्य में ऊर्जा की कमी को दूर करने में सहायक होगा।
- राज्य में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में संचालित परियोजनाएँ- मथानिया (जोधपुर), गौरीर (झुंझुनूँ), फागी (जयपुर), बालेसर (जोधपुर), रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) है।
- राज्य में दिसम्बर, 2019 तक 4,637 मेगावॉट क्षमता तक के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा निवेशकों के अनुकूल राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2019 जारी की गई है।
सोलर पार्क एवं मेगा सोलर पॉवर प्रोजेक्ट्स:-
- राज्य में संयुक्त उपक्रम क्षेत्र में सोलर पार्कों की स्थापना हेतु निम्नलिखित तीन संयुक्त उपक्रम कम्पनियों का गठन किया जा चुका है-
1. मैसर्स सौर्य ऊर्जा कम्पनी ऑफ राजस्थान लि. (सुराज)
2. मैसर्स अढानी रिन्युएबल एनर्जी पार्क राजस्थान लि.
3. मैसर्स एसेल सौर्य ऊर्जा कम्पनी ऑफ राजस्थान लि.
पवन ऊर्जा:-
- पवन ऊर्जा अर्थात् हवाओं द्वारा ऊर्जा प्राप्त करना सौर ऊर्जा के समान प्रकृति प्रदत्त है।
- पवन ऊर्जा प्राप्त करने हेतु ‘पवन चक्की’ लगाकर इसे वायु से परिचालित किया जाता है और उससे उत्पन्न शक्ति को एकत्रित कर जनरेटर चलाने, पम्पसेट चलाने, विद्युत व्यवस्था आदि में उपयोग में लिया जाता हैं।
- राजस्थान में विशेषकर पश्चिमी राजस्थान में इसका विकास सर्वाधिक किया जा सकता है क्योंकि यहाँ वायु की गति 20 से 40 किमी. होती है।
- राज्य का पवन ऊर्जा के क्षेत्र में क्रमश: तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र के बाद चौथा स्थान है।
- विश्व में सर्वाधिक जर्मनी, यू.एस.ए., स्पेन, भारत में पवन ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है।
- पवन द्वारा ऊर्जा प्राप्त करने के लिए उस क्षेत्र में 15 किलोमीटर प्रति घण्टा का न्यूनतम वेग पवन का होना आवश्यक है।
- राज्य में मार्च, 2000 में पवन ऊर्जा विद्युत उत्पादन नीति की घोषणा की गई। इस नीति के तहत सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र में पवन ऊर्जा की योजनाएँ निम्नलिखित हैं-
सार्वजनिक क्षेत्र में:-
- जैसलमेर में 2 मेगावॉट की पहली पवन ऊर्जा परियोजना अगस्त, 1999 में राजस्थान स्टेट पावर कॉरपोरेशन ने प्रारम्भ की।
- चित्तौड़गढ़ जिले में देवगढ़ ग्राम में जून, 2000 में 2.25 मेगावॉट पवन ऊर्जा परियोजना प्रारम्भ की गई।
- जोधपुर जिले के फलोदी में 2.10 मेगावॉट की पवन ऊर्जा परियोजना का प्रारम्भ मार्च, 2001 में किया गया।
- जैसलमेर के बड़ाबाग में 4.9 मेगावॉट का पवन ऊर्जा संयंत्र लगाया गया।
- जोधपुर के मथानिया में 140 मेगावॉट क्षमता की एकीकृत और चक्रीय परियोजना स्थापित की गई।
निजी क्षेत्र में:-
- राजस्थान में निजी क्षेत्र में पवन ऊर्जा के लिए गेल कालानी इंडस्ट्रीज लि., इन्दौर ने तथा विशाल ग्रुप अहमदाबाद द्वारा पवन ऊर्जा संयंत्र लगाकर विद्युत उत्पादन किया जा रहा है।
बायोगैस:-
- केन्द्र सरकार ने बढ़ती ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत्र के उद्देश्य से वर्ष 1981-82 में राष्ट्रीय बायोगैस विकास योजना शुरू की थी। बायोगैस संयंत्र में पशुओं के गोबर को काम में लिया जाता है। बायोगैस के रासायनिक संगठन में 65% मीथेन, 30% कार्बन-डाई-ऑक्साइड, 2% हाइड्रोजन, 1.1 हाइड्रोजन सल्फाइड एवं नाइट्रोजन, 0.9% ऑक्सीजन तथा 0.8% कार्बन मोनोक्साइड होती है। मीथेन अत्यन्त ज्वलनशील गैस होती है। बायोगैस संयंत्रों के दो प्रकार के मॉडल होते हैं-
1. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड का मॉडल
2. जनता मॉडल अथवा दीनबन्धु मॉडल
- एक बायोगैस संयंत्र पर सरकार 60 प्रतिशत तक अनुदान देती है।
बायोमास ऊर्जा:-
- विभिन्न प्रकार के कचरे, जैसे- सरसों की भूसी, चावल की भूसी, गन्ने के कचरे पर आधारित विद्युत उत्पादन परियोजना स्थापित करने के लिए एक नीति 2004 में घोषित की गई।
- राजस्थान में बॉयोमास के महत्वपूर्ण स्रोत सरसों की भूसी एवं विलायती बबूल (जूली फ्लोरा) हैं।
- बायोगैस में मुख्यत: मिथेन (65%) तथा कार्बनडाई ऑक्साइड (30%) होती है।
- राज्य में बायोगैस आधारित सर्वाधिक संयंत्र उदयपुर जिले में स्थित हैं।
- राज्य में बायोमास की संभावना निम्न जगह पर है- पदमपुर (श्रीगंगानगर), केथोली (उणियारा, टोंक), रंगपुर (कोटा), कोटपुतली (जयपुर), चंदेरिया (चित्तौड़गढ़), पचार (बाराँ), सांगरिया (हनुमानगढ़), रामपुर (सिरोही), चांदली-देवली (टोंक), सांचौर (जालौर), मेड़ता (नागौर) आदि।
राजस्थान की ऊर्जा नीतियाँ:-
राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2014:-
- ‘राजस्थान ऊर्जा नीति, 2014’, 8 अक्टूबर, 2014 को जारी की गई।
- राज्य सरकार ने प्रदेश में 2500 मेगावॉट की सौर क्षमता की स्थापना को मूर्त रूप देने के लिए ऊर्जा विभाग द्वारा राजस्थान सौर ऊर्जा नीति-2014 जारी की गई।
- इस नीति का मुख्य उद्देश्य सौर ऊर्जा में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाना व ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्र जहाँ पर वर्तमान विद्युत आपूर्ति नहीं है, वहाँ पर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना।
राजस्थान सौर ऊर्जा नीति, 2011:-
- राजस्थान में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 19 अप्रैल, 2011 को राज्य की पहली सौर ऊर्जा नीति लागू की गई थी, तब राजस्थान सौर ऊर्जा नीति मंजूर करने वाला देश का पहला राज्य बना था।
नई पवन ऊर्जा नीति, 2012:-
- 18 जुलाई, 2012 को राज्य सरकार ने नई पवन ऊर्जा नीति- ‘Policy of Promoting Generation of Electricity from Wind-2012’ जारी की है।
- 17 जून, 2014 को इसमें संशोधन किया गया है। इससे राज्य में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में प्रतिवर्ष लगभग 400 मेगावॉट के संयंत्र स्थापित होंगे व 2500 करोड़ रुपये का निवेश हो सकेगा। इससे पूर्व 2004, 2003 व 2000 में पवन ऊर्जा प्रोत्साहन नीतियाँ जारी की गई थी।
बायोमास पॉलिसी, 2010-
- बॉयोमास पॉलिसी 26 फरवरी, 2010 को जारी की गई।
- इस नीति से बॉयोमास विद्युत उत्पादन संयंत्रों को उचित दर पर पर्याप्त मात्रा में बॉयोमास की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी व राज्य में 300 मेगावॉट से अधिक विद्युत उत्पादन का लक्ष्य अर्जित किया जा सकेगा।
कैप्टिव पॉवर प्लांट नीति-
- राज्य सरकार द्वारा 166 मेगावॉट क्षमता एक के नये कैप्टिव प्लांट निजी क्षेत्र में स्थापित करने हेतु संशोधित कैप्टिव पॉवर प्लांट नीति 15 जुलाई, 1999 को जारी की गई।
- इसका मुख्य उद्देश्य नये कैप्टिव पॉवर प्लांट की स्थापना करना एवं राज्य में विद्युत आपूर्ति एवं उपलब्धता के अंतर को कम करना था।
राज्य में अक्षय ऊर्जा के स्रोतों के विकास हेतु जारी नीतियाँ:-
गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत से विद्युत उत्पादन प्रोत्साहन नीति (1999):-
- इस नीति के तहत निजी उद्यमियों द्वारा स्थापित 25 मेगावॉट तक के विद्युत गृहों द्वारा उत्पादित विद्युत राज्य द्वारा क्रय करने का प्रावधान है।
पवन ऊर्जा प्रोत्साहन नीति (2000 व 2003):-
- इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में निजी पूँजी निवेश से 100 MW क्षमता तक पवन ऊर्जा परियोजनाएँ स्थापित करना है।
गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों से विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति (2004):-
- इस नीति के अन्तर्गत सौर, पवन, बायोमास आदि द्वारा विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देना।
नई निजी निवेश नीति (2007):-
- इस नीति के तहत निजी क्षेत्र को बड़े एनर्जी प्रोजेक्ट्स लगाने के लिए आमंत्रित किया गया।
- गुढ़ा, बीकानेर में मरुधरा कम्पनी, आन्ध्रप्रदेश द्वारा राज्य में पहला निजी क्षेत्र का 125 MW का लिग्नाइट पॉवर प्लांट लगाया गया है।
नई बायोमास नीति:-
- इस नीति का क्रियान्वयन 26 फरवरी, 2010 में किया गया।
नई सौर ऊर्जा नीति:-
- इस नीति का क्रियान्वयन 18 दिसम्बर, 2019 में किया गया।
नई पवन और हाईब्रिड ऊर्जा नीति:-
- इस नीति का क्रियान्वयन 18, दिसम्बर 2019 में किया गया।


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