राजपुतों की उत्पत्ति

  • केन्द्र शासित प्रदेश / चीफ कमीश्नर - अजमेर - मेरवाड़ा
  • राजपूताना रेजीडेंसी - 1818 ई. में स्थापना - मुख्यालय - दिल्ली
  • मुख्य अधिकारी - रेजीडेंसी को 1832 ई. में अजमेर - मेरवाड़ा किया गया।
  • (रेजीडेंट ऑफ राजपूताना प्रथम) – डेविड ऑक्टर लोनी
  • राजपूताना रेजीडेंसी को 1832 ई. में अजमेर मेरवाड़ा मुख्य अधिकारी - AGG (एजेन्ट टु गर्वनर जनरल)
  • राजस्थान का प्रथम AGG - मिस्टर लॉकेट
  • 1845 ई. में माउण्ट आबू (सिरोही) अस्थायी राजपूताना रेजीडेंसी स्थापित की गई। (मई- जून)  
  • सर्वप्रथम 1857 की क्रांति की सूचना राजपूताना के AGG पैट्रिक लॉरेंस के पास पहुँचती हैं, इस वक्त यह अस्थायी रेजीडेंसी माउंट आबू में था।
    ठिकाने - नीमराणा - अलवर
    लावा (वर्तमान टोंक) - जयपुर रियासत   
    कुशलगढ़ - बांसवाड़ा

राजपूतों की उत्पत्ति के सिद्धांत

  • गौरी शंकर हीराचन्द ओझा के अनुसार - राजपूत आर्यों की संतान (क्षत्रिय)
  • सी.वी. वैद्द - राजपूत शुद्ध रुप से भारतीय हैं अर्थात् वैदिक आर्यों की संताने हैं। 

    डी.आर. भण्डारकर व गोपीनाथ शर्मा - राजपूतों की उत्पत्ति ब्राह्मणों या गुर्जरों से हुई है।
  • मिश्रित अवधारणा - देवी प्रसाद चट्टोपाध्याय

    नोट - राजपूतों को 5वीं जाति की संज्ञा कर्नल जेम्स टॉड ने दी।
  • देवी प्रसाद (D. P.) चट्‌टोपाध्याय - राजपूत ना तो देशी न ही विदेशी हैं।

देशी + विदेशी = मिश्रण → राजपूत

  •  B.L. चट्‌टोपाध्याय - राजपूत सामाजिक व आर्थिक क्रियाओं की उपज हैं।