राजस्थान के खनिज

राजस्थान के खनिज संसाधन

  • राजस्थान खनिज सम्पदा की दृष्टि से एक सम्पन्न राज्य है। देश के खनिज क्षेत्र में राजस्थान प्रमुख राज्य होने के कारण ‘खनिजों का अजायबघर’ कहा जाता है।
  • राजस्थान के अरावली पर्वतमाला क्षेत्र तथा दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग में खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
  • राज्य में 81 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं। उनमें से वर्तमान में 57 प्रकार के खनिजों का उत्पादन हो रहा है।
  • खनिज-जो पदार्थ प्राकृतिक रूप में उपलब्ध हैं और जिनकी निश्चित आंतरिक संरचना होती है।
  • खनिज से तात्पर्य वे पदार्थ जो जमीन या चट्‌टानों से खोदकर निकाले जाते हैं तथा अयस्क वे खनिज जिनसे धातु प्राप्त की जाती है।
  • खनिजों की विविधता की दृष्टि से भारत में राजस्थान का प्रथम स्थान है।
  • खनिजों की भण्डारण की दृष्टि से राजस्थान का भारत में झारखण्ड के बाद दूसरा स्थान है।
  • राजस्थान में GDP में खनिज का 5 प्रतिशत योगदान है।
  • खनिज उत्पादन की दृष्टि से भारत में राजस्थान का तीसरा स्थान है। (प्रथम – झारखण्ड, द्वितीय-मध्य प्रदेश)
  • खनिजों से आय की दृष्टि से भारत में राजस्थान का पाँचवाँ स्थान है।
  • पेट्रोलियम उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान का भारत में महाराष्ट्र (बोम्बे हाई) के बाद दूसरा स्थान है।
  • लौह धात्विक खनिज की दृष्टि से राजस्थान का भारत में चौथा स्थान है।
  • अलौह धात्विक खनिज की दृष्टि से राजस्थान का भारत में प्रथम स्थान है।
  • अप्रधान अधात्विक खनिज की दृष्टि से राजस्थान का भारत में प्रथम स्थान है।
  • राजस्थान राज्य खान एवं खनिज निगम लिमिटेड (RSMML) की स्थापना वर्ष 1974 में की गई।
  • राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड (RSMDC) की स्थापना वर्ष 1979 में की गई।

खनिज नीतियाँ:-

  • राज्य की प्रथम खनिज नीति वर्ष 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत के काल में बनी।
  • द्वितीय खनिज नीति वर्ष 1991 में घोषित की गई।

खनिज नीति वर्ष 1994:- 

  • 16 अगस्त 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरो सिंह शेखावत ने आधुनिक तकनीक को अपनाने, वैज्ञानिक पद्धति से खनन करने, खनिज आधारित उद्योग की स्थापना करने एवं उत्पादन से निर्यात व वृद्धि के उद्देश्य से इस खनिज नीति की घोषणा की गई।

ग्रेनाइट व मार्बल नीति वर्ष 2002:-

  • मार्बल व ग्रेनाइट उद्योग के समुचित विकास के उद्देश्य से प्रथम ग्रेनाइट नीति वर्ष 1991 में, प्रथम मार्बल नीति अक्टूबर, 1994 में, द्वितीय ग्रेनाइट नीति वर्ष 1995 एवं नवीनतम मार्बल एवं ग्रेनाइट नीति 8 जनवरी, 2002 को घोषित की गई।

खनिज नीति 2011:-

  • यह नीति 28 जनवरी, 2011 को जारी की गई।

नई खनिज नीति 2015:-

  • तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंध रा राजे ने 4 जून, 2015 को नई दिल्ली में आयोजित एम्बेसडर्स राउण्ड- टेबल कॉन्फ्रेन्स में राजस्थान खनिज नीति 2015 जारी की गई।
  • राजस्थान के खान एवं भू-विज्ञान निदेशालय ने राज्य में खनन क्षेत्र का विकास करने के लिए ‘विजन 2020’ की योजना 15 अगस्त, 1999 को लागू की गई।
  • राजस्थान में पाए जाने वाले खनिजों को मुख्यत: दो प्रकार के खनिजों में वर्गीकृत किया जाता है-

खनिज को दो भागों में विभाजित किया गया है-

1. धात्विक खनिज:-
 (i) लौह धात्विक खनिज – लौह अयस्क, मैंगनीज
 (ii) अलौह धात्विक खनिज – ताँबा, सोना, सीसा, जस्ता, चाँदी, एल्युमिनियम (बॉक्साइट), टंगस्टन
 (iii) आण्विक खनिज – यूरेनियम, थोरियम, लीथियम, बेरिलियम

2. अधात्विक खनिज:-
 (i) बहुमूल्य पत्थर खनिज – तामड़ा, पन्ना, हीरा, अकीक
 (ii) रासायनिक उर्वरक खनिज – जिप्सम, पाइराइट्स, रॉक-फॉस्फेट, पोटाश
 (iii) ईंधन खनिज – कोयला, पेट्रोलियम पदार्थ, प्राकृतिक गैस
 (iv) अन्य अधात्विक खनिज

1. धात्विक खनिज:-

  • ऐसे खनिज जिनसे धातुएँ प्राप्त होती है धात्विक खनिज कहलाते हैं।
  • धात्विक खनिज लौह और अलौह दोनों प्रकार के होते हैं जैसे- लौहा, मैंगनीज, सीसा-जस्ता, चाँदी, ताँबा, सोना, बॉक्साइट, टंगस्टन, बेरिलियम आदि

A. लौह धात्विक खनिज:-

1. लौह अयस्क:-

  • ऐसे अयस्क जिनमें लौह ऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है। पृथ्वी के भूगर्भ में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला धात्विक अयस्क लौह अयस्क है। भारत में लौह अयस्क कुडप्पा तथा धारवाड़ क्रम की चट्‌टानों में पाया जाता है। राजस्थान में धारवाड़ क्रम की चट्‌टानों में अरावली पर्वतीय प्रदेश में लौह अयस्क पाया जाता है।

मुख्यत: लौह अयस्क चार प्रकार का होता है-

(i) मेग्नेटाइट:-

  • भारत में मेग्नेटाइट के सर्वाधिक भण्डार कर्नाटक में (72%) तथा राजस्थान में (6%) पाए जाते हैं। मेग्नेटाइट सर्वश्रेष्ठ किस्म का लौह अयस्क होता है किन्तु भारत में कम पाया जाता है। इसे काला लोहा भी कहते हैं। इसमें लौह अयस्क की मात्रा 72% तक होती है। राजस्थान में मेग्नेटाइट किस्म भीलवाड़ा व सीकर जिले में पायी जाती है।

(ii) हेमेटाइट:–

  • इसमें 60-70% तक लौह अयस्क पाया जाता है। भारत में हेमेटाइट के सर्वाधिक भण्डार राजस्थान में पाए जाते हैं। राजस्थान में हेमेटाइट प्रकार का लोहा-जयपुर, दौसा, अलवर आदि में पाया जाता है। यह लाल/गेरुआ रंग का लौह अयस्क है। राजस्थान तथा भारत में सर्वाधिक हेमेटाइट प्रकार का लौह अयस्क पाया जाता है।

(iii) लिमोनाइट:- 

  • इसे जलयोजित लोहा भी कहते हैं। इसमें 45 - 50% तक लौह अयस्क पाया जाता है। यह निम्न कोटि का लौह अयस्क होता है। लिमोनाइट व सिडेराइट का कोई आर्थिक महत्त्व नहीं होता है।

(iv) सिडेराइट:–

  • यह अत्यन्त ही निम्न कोटि का लौह अयस्क होता है। इसमें  45 % से भी कम लौह अयस्क पाया जाता है। यह भूरा लोहा होता है।

राजस्थान में लौह अयस्क उत्पादक क्षेत्र

  • राजस्थान में सर्वाधिक हेमेटाइट प्रकार का लौह अयस्क पाया जाता है।
  • जयपुर के (मोरीजा बानोला) – सर्वाधिक लौह अयस्क उत्पादन क्षेत्र
  • दौसा के (नीमला राइसेला)
  • झुंझुनूँ के (डाबला - सिंघाना)

मेग्नेटाइट प्रकार का लौह अयस्क

  • उदयपुर के नाथरा की पाल व थुर हुण्डेर में
  • भीलवाड़ा के पुर – बनेड़ा में पाया जाता है।

Note:–  

  • लौह अयस्क के उत्पादन में भारत में राजस्थान का सातवाँ स्थान है।
  • लौह अयस्क का सर्वाधिक उत्पादन जयपुर में तथा सर्वाधिक भण्डार उदयपुर में है।
  • भीलवाड़ा के तिरंगा क्षेत्र में भी लौह अयस्क का उत्पादन प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है।

2. मैंगनीज:-

  • मैंगनीज लौह धात्विक खनिज है जो धारवाड़ क्रम की चट‌्टान/अरावली पर्वतीय प्रदेश में पाया जाता है।
  • मैंगनीज का मुख्य अयस्क – पाइरोलुसाइट है जो कि राजस्थान में मुख्यत: बाँसवाड़ा में पाया जाता है।
  • मैंगनीज को ‘Jack of All Trades’ कहा जाता है क्योंकि यह भारत में औद्योगिक इकाइयों की आधारशिला है।
  • इस्पात निर्माण, रासायनिक उद्योग तथा सूखे सेल में मैंगनीज प्रयुक्त होता है।
  • मैंगनीज के उत्पादन तथा भण्डारण की दृष्टि से राजस्थान का देश में 8 वाँ स्थान है।

राजस्थान में मैंगनीज प्राप्ति के प्रमुख स्थान:–
1. बाँसवाड़ा- लीलवाना, तलवाड़ा तिम्मोरिया, कालाखूंटा, कौसाला, घाटियाँ
2. राजसमन्द – नगेड़िया
3. उदयपुर - छोटीसार, बड़ी सार, रामोसन, स्वरूपपुरा

B. अलौह धात्विक खनिज:-

1. ताँबा (ताम्र धातु):-

  • मानव द्वारा प्रयुक्त सबसे पहली धातु ताँबा है। जिसे कॉपर पाइराटीज कहते हैं।
  • ताँबे का रंग लाल भूरा होता है तथा यह आग्नेय, अवसादी, कायान्तरित चट‌्टानों से प्राप्त होता है।
  • ताँबा लचीला तथा विद्युत का उत्तम सुचालक होने के कारण विद्युत उपकरणों में अत्यधिक उपयोगी है।
  • ताँबा भण्डारण की दृष्टि से राजस्थान प्रथम स्थान तथा  उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान दूसरे स्थान पर है।
  • झुंझुनूँ को राजस्थान का ताँबा जिला, गणेश्वर सभ्यता (सीकर) को ताम्र सभ्यता की जननी तथा आहड़ (उदयपुर) को ताम्र नगरी कहते हैं।

राजस्थान में ताँबा प्राप्ति स्थल –
1. खेतड़ी – झुंझुनूँ,
2. सिंघाना – झंझुनूँ (मदान कुदान क्षेत्र में सर्वाधिक भण्डार मिले।)
3. खो दरीबा – अलवर
4. बीदासर – चूरू
5. पुर बनेड़ा – भीलवाड़ा
6. मीरा का नांगल क्षेत्र – सीकर
7. बन्ने वालों की ढाणी – सीकर
8. नाथा की नांगल - सीकर

2. सीसा-जस्ता:-

  • सीसा – जस्ता को जुड़वाँ खनिज भी कहा जाता है।
  • राजस्थान का सीसा – जस्ता के उत्पादन में एकाधिकार है।
  • राज्य में सीसा – जस्ता में देश के कुल भण्डारों क 89% है।
  • राजस्थान में सीसा – जस्ता के प्रमुख भण्डार उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा व सवाई माधोपुर में हैं।
  • सीसा का अयस्क – गेलेना तथा पाइरोटाइट है।
  • जस्ते का अयस्क – कैलेमीन, जिंकाइट व विलेमाइट है।
  • जस्ता गलाने पर उप उत्पादक कैडमियम तथा कोबाल्ट के रूप में प्राप्त होते हैं।
  • सीसा व जस्ता के साथ सामान्यत: चाँदी भी मिलती है।
  • सीसा – जस्ता व चाँदी की विश्व की सबसे पुरानी खान जावर खान (उदयपुर) है।
  • जावर खान में 14 वीं शताब्दी में मेवाड़ के महाराणा लाखा के शासन काल में खनन कार्य प्रारंभ हो गया था।
  • हिंदुस्तान जिंक लि. भारत की सबसे बड़ी सीसा-जस्ता चाँदी का खनन करने वाली कम्पनी है।

राजस्थान में सीसा – जस्ता की निम्नलिखित खानें  या प्राप्ति स्थल है:-
1. रामपुरा – आगुचा – भीलवाड़ा (गुलाबपुरा)
2. राजपुरा – दरीबा – राजसमंद
3. देबारी – उदयपुर
4. जावर खान - उदयपुर (सीसा – जस्ता के साथ चाँदी भी)
5. चौथ का बरवाड़ा – सवाई माधोपुर
6. गुढ़ा किशोरीदास क्षेत्र – अलवर
7. सिंदेसर खुर्दखान – रेलमगरा (राजसमंद)

हिंदुस्तान जिंक लि. द्वारा राजस्थान में निम्न जिंक  स्मेलटर प्लान्ट स्थापित किए गए-
1. चंदेरिया सीसा - जस्ता स्मेलटर, चित्तौड़गढ (ब्रिटेन के सहयोग से)
2. दरीबा स्मेलटर - राजसमंद
3. देबारी जिंक स्मेलटर – उदयपुर

3. चाँदी:-

  • राजस्थान में सामान्यत: सीसा-जस्ता के साथ मिश्रित धातु के रूप में चाँदी पायी जाती है। राजस्थान के उदयपुर जिले में जावर में तथा भीलवाड़ा के रामपुरा आगुचा में सीसा-जस्ता के साथ चाँदी भी निकाली जाती है। उदयपुर में जावर खान में 14 वीं शताब्दी में राणा लाखा के समय चाँदी की खान प्राप्त हुई थी।
  • चाँदी के भण्डारण व उत्पादन की दृष्टि से भारत में राजस्थान प्रथम स्थान पर है।
  • देश के चाँदी के कुल भण्डार में 87% भण्डार राजस्थान में है।
  • सिंदेसर खुर्द खान-रेलमगरा (राजसमंद) में चाँदी का उत्पादन अधिक मात्रा में हो रहा है।

4. सोना (स्वर्ण भण्डार):-

  • सर्वप्रथम राजस्थान में स्वर्ण भण्डारों की खोज आस्ट्रेलियाई कम्पनी (इण्डो गोल्ड) ने की।
  • सोना सबसे कम क्रियाशील धातुओं में आता है इसके कारण यह प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था में पाया जाता है तथा यह अत्यन्त लचीला होने के कारण इसमें ताँबे की अशुद्धि मिलाई जाती है। स्वर्ण का कोई अयस्क नहीं होता है।

स्वर्ण भण्डार प्राप्ति स्थल:–
आनंदपुर भूकिया – बाँसवाड़ा
 जगतपुरा भूकिया – बाँसवाड़ा
 तिमरान माता – बाँसवाड़ा
 खेड़ा – राजपुरा – उदयपुर
 घाटोल – बाँसवाड़ा
 पादरा की पाल - डूँगरपुर

5. टंगस्टन:-

  • टंगस्टन कठोर व उच्च गलनांक वाली धातु है। यह मुख्यत: विद्युत बल्बों के तंतु (फिलामेंट), अस्त्र शस्त्रों तथा युद्ध के टैंक बनाने में प्रयुक्त किया जाता है।
  • इसका प्रमुख अयस्क – वुल्फ्रेमाइट है।

राजस्थान में टंगस्टन प्राप्ति स्थल:–

  • डेगाना – नागौर (राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन तथा देश की सबसे बड़ी टंगस्टन की खान है)
  • नानाकराब – पाली
  • वाल्दा क्षेत्र – सिरोही
  • आबू, रेवदर – सिरोही

Note:–

  • टंगस्टन की डेगाना खान को हिंदुस्तान जिंक लि. को दिया गया था लेकिन अभी वर्तमान में उत्पादन बंद है।
  • डेगाना स्थित खानदेश एकमात्र खान है जहाँ अभी टंगस्टन का उत्पादन हो रहा है।

6. एल्युमिनियम (बॉक्साइट):-

  • बॉक्साइट एल्युमिनियम का एक अयस्क है। एल्युमिनियम उद्योग में प्रमुख स्त्रोत बॉक्साइट है।
  • राजस्थान में इसके कुछ भण्डार बाराँ के माजोला, सहरोल, व शाहबाद तहसील में पाए गए हैं।

C. आण्विक खनिज:-

  • रेडियो सक्रिय खनिज जिनका सामरिक दृष्टि, ऊर्जा उत्पादन आदि के संदर्भ में उपयोग किया जाता है।

1. यूरेनियम:-

  • ‘मेटल ऑफ गुड हॉफ’ कहा जाता है।
  • पिचब्लैड यूरेनियम का अयस्क है।
  • राजस्थान में उत्पादक क्षेत्र:-

 1. उमरा क्षेत्र (उदयपुर)
 2. खण्डेला-रोहिला क्षेत्र (सीकर)
 3. भूणास-जहाजपुरा क्षेत्र (भीलवाड़ा)
 4. डूँगरपुर
 5. बाँसवाड़ा

2. थोरियम:-

  • राजस्थान में थोरियम मोनोजाइट प्रकार का थोरियम निकाला जाता है।
  • राजस्थान में थोरियम के भण्डार थार के मरुस्थल में हैं।
  • प्रमुख उत्पादक क्षेत्र-

 1. भद्रावन (भद्रावटी) (पाली)
 2. जैसलमेर
 3. बाड़मेर

3. बेरिलियम:-

  • यह षट्कोणीय आकृति का खनिज है।
  • बेरिलियम एल्युमिनियम का सिलिकेट है।
  • भारत में बेरिलियम का सर्वाधिक भण्डारण की दृष्टि से राजस्थान का प्रथम स्थान है।
  • प्रमुख क्षेत्र –

 1. गुजरवाड़ा (जयपुर)
 2. बांदर सिंदरी (अजमेर)
 3. शिकारबाड़ी (उदयपुर)
 4. सिले का गवाड़ा (उदयपुर)
 5. चम्पागुढ़ा (उदयपुर)
 6. शिवराती व तिलोली (टोंक)
 7. सागवाड़-पादेरी (डूँगरपुर)

4. लिथीयम:-

  • राजस्थान में राजगढ़ क्षेत्र (अजमेर) से निकाला जाता है।
  • राजस्थान में नगण्य मात्रा में पाया जाता है।

2. अधात्विक खनिज:- 

  • राजस्थान अधात्विक खनिजों की दृष्टि से समृद्ध है।
  • यहाँ अनेक प्रकार के अधात्विक खनिज पाए जाते हैं जिन्हें विभिन्न श्रेणियों में विभक्त किया गया है-

1. बहुमूल्य पत्थर:-

(i) तामड़ा:-

  • फिरोजा, रक्तमणि, गार्नेट कहा जाता है।
  • लौक ऑक्साइड (फेरस ऑक्साइड) के कारण इसका रंग लाल होता है।
  • इस खनिज में राजस्थान का एकाधिकार है।
  • राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन टोंक जिले के राजमहल, कुशालपुर, जनकपुरा से होता है।
  • अन्य उत्पादक क्षेत्र –

 1. खरखारी, सरवाड़ क्षेत्र (अजमेर)
 2. दादीया, कमपुरा (भीलवाड़ा)
 3. सीकर

(ii) पन्ना:-

  • जिसे हरी अग्नि/ग्रीन फायर कहा जाता है।
  • लौह सल्फाइड (फेरस सल्फाइड) के कारण इसका हरा रंग होता है।
  • एशिया की सबसे बड़ी पन्ना मण्डी जयपुर में है।
  • कालागुमान क्षेत्र (राजसमंद) से बुबानी/मुहामी राजगढ़ (अजमेर) तक 221 कि.मी. की पन्ना जमाव पेटी की खोज वर्ष 1943 में माइन्स मेनेजमेंट कम्पनी (इंग्लैण्ड) ने की।

(iii) हीरा:-

  • वर्तमान में केशरपुरा (प्रतापगढ़) में हीरे के भण्डार है।
  • हाल ही में बाड़मेर के मालाणी रायोलाइट क्रम की चट्‌टानों में हीरे के भण्डारों की खोज की गई।

(iv) अकीक/गोमेद/सुलेमानी पत्थर:-

  • राजस्थान में भण्डार – कोटा, झालावाड़, बाराँ, बूँदी, चित्तौड़गढ़ आदि जिलों में हैं।

2. रासायनिक उर्वरक खनिज:-

  • वे खनिज जिनका उपयोग मृदा संरक्षण हेतु रासायनिक खाद बनाने में किया जाता है।

(i) जिप्सम:- 

  • इसे हरसौंठ, खड़िया, सेलेनाइट (रवेदार जिप्सम)
  • जिप्सम के उत्पादन एवं भण्डारण में राजस्थान का प्रथम स्थान है।
  • सेलेनाइट (रवेदार जिप्सम) में राजस्थान का एकाधिकार है।
  • जिप्सम का उपयोग क्षारीयता की समस्या का समाधान के लिए प्रयोग किया जाता है।
  • राजस्थान में प्रमुख उत्पादक क्षेत्र:-

 1. गोठ मांगलोद - नागौर
 2. धाकोरिया - नागौर
 3. भदवासी - नागौर
 4. जामसर - बीकानेर
 5. सियासर - बीकानेर
 6. हरकासर - बीकानेर
 7. लुणकरणसर - बीकानेर
 8. उतरलाई - बाड़मेर
 9. पीर की ढाणी - बाड़मेर
 10. कुरला - बाड़मेर
 11. श्यौकर - बाड़मेर
 12. खूटानी – पाली

हार्डपन:-

(ii) रॉक-फॉस्फेट:-

  • राजस्थान सर्वाधिक उत्पादन वाला खनिज (अधात्विक खनिज) है।
  • भारत में रॉक-फॉस्फेट की सबसे बड़ी खान झामरकोटड़ा (उदयपुर) है।
  • इस खान को वर्ष 1999 में भारत सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ खदान का पुरस्कार दिया गया।
  • रॉक-फॉस्फेट का प्रयोग मिट्टी की अम्लीयता/लवणीयता की समस्या के समाधान हेतु किया जाता है।
  • उदयपुर में रॉक-फॉस्फेट के भण्डार अरावली महासंघ की चट्‌टानों में हैं।
  • राजस्थान में रॉक-फॉस्फेट के उत्पादक क्षेत्र-

 1. झामरकोटड़ा (उदयपुर)
 2. धाकन कोटड़ा (उदयपुर)
 3. मटून (उदयपुर)
 4. डोल्कीपात (उदयपुर)
 5. कानपुर (उदयपुर)
 6. कारबेरिया (उदयपुर)
 7. डाफन कोटड़ा (उदयपुर)
 8. सीसारमा (उदयपुर)
 9. नीमच माता (उदयपुर)
 10. बड़ागाँव (उदयपुर)
 11. सलोपेट (बाँसवाड़ा)
 12. बिरमानिया (जैसलमेर)
 13. फतेहगढ़ (जैसलमेर)
 14. अडूका-अदवानी (जयपुर)
 15. करपुरा (सीकर)
 16. अचरोल (जयपुर)

  • राजस्थान में रॉक-फॉस्फेट का सर्वाधिक उत्पादन व भण्डारण उदयपुर में है।

(iii) पाइराइट:-

  • राजस्थान से निकलने वाला रासायनिक उर्वरक का नवीन खनिज है।
  • राजस्थान में सलादीपुरा (सीकर) से निकाला जाता है। 

(iv) पोटाश:-

 

  • ह राजस्थान से निकलने वाला एक रासायनिक उर्वरक खनिज है।
  • यह खनिज पर्मीयन काल की चट्टानों में पाया जाता है।
  • राजस्थान में बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, नागौर जिलों में पोटाश के भण्डार पाए जाते हैं।
  • राजस्थान में सर्वाधिक पोटाश के भण्डार बीकानेर में पाए जाते हैं।
  • राजस्थान में पोटाश के दो ग्रेड पाए जाते हैं-
  • 1. 2.1K ग्रेड (श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, नागौर) 2. 3.1K ग्रेड (बीकानेर)
  • उपबेसिन में विभाजित है-

 1. बीकानेर
 2. हंसेरा
 3. अर्जुनसर
 4. घरसीसर
 5. जैतपुर
 6. सतीपुर
 7. भैरूसारी
 8. लाखासर

3. ईंधन खनिज (ऊर्जा संसाधन):-

  • ईंधन खनिज अवसादी चट्‌टानों में पाए जाते हैं।
  • राजस्थान में मरुस्थलीय प्रदेश में ईंधन खनिज के भण्डार है।

(i) कोयला:-

  • सामान्यत: कायेला चार प्रकार को होता है-

1. एन्थ्रासाइट:-

  • 94-98 प्रतिशत कार्बन पाया जाता है।
  • यह रूपांतरित चट्टानों में पाया जाता है।
  • यह जीवाश्म रहित कोयला है जो धुँआ कम देता है।

2. बिटुमिनस:-

  • 78-86 प्रतिशत कार्बन की मात्रा पाई जाती है।
  • यह गौंडवाना लैण्ड की अवसादी चट्‌टानों में पाया जाता है।

3. लिग्नाइट:-

  • 55 प्रतिशत से कम कार्बन की मात्रा पाई जाती है।
  • यह कोयला टर्शियरीकालीन अवसादी चट्टानों में पाया जाता है।
  • राजस्थान में लिग्नाइट प्रकार का कोयला पाया जाता है।

4. पीट:-

  • इस कोयले की लकड़ी को जलाकर बनाया जाता है।
  • इसमें 27 प्रतिशत तक कार्बन की मात्रा पाई जाती है।
  • निम्न श्रेणी का कोयला है-

कोयला लिग्नाइट:-

  • तृतीयक/साइनोजोइक/टर्शियरी की अवसादी चट्‌टानों में पाया जाता है।
  • राजस्थान में लिग्नाइट के भण्डार

बीकानेर:-
 1. पलाना – एशिया की सबसे बड़ी लिग्नाइट की खान है।
 2. बरसिंगसर
 3. हाड़ला
 4. केसर-देसर
 5. गुढ़ा
 6. बीठनोक 

बाड़मेर:-
 1. कपूरड़ी
 2. जालीपा
 3. गिरल
 4. जोगेश्वर तला
- राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन होता है।

नागौर:-
 1. मेड़ता
 2. मातासुख
 3. कास्नाऊ इग्यार
 4. इन्दावर

(ii) पेट्रोलियम पदार्थ:-

  • यह खनिज अवसादी चट्‌टानों में पाया जाता है।
  • राजस्थान में सर्वप्रथम वर्ष 1954 में ONGC (Oil and Natural Gas Corporation Limited) द्वारा बाड़मेर के गुढ़ामालानी क्षेत्र में पेट्रोलियम पदार्थ (खनिज तेल) की खोज प्रारंभ की गई।
  • सन् 1999 में केयर्न एनर्जी द्वारा (स्कॉटलैण्ड) बाड़मेर के गुढ़ामालानी क्षेत्र में पेट्रोलियम (खनिज तेल) की खोज की गई।
  • 29 अगस्त, 2009 को केयर्न एनर्जी द्वारा बाड़मेर में मंगला नामक प्रथम तेल के कुँए की स्थापना की गई।
  • राजस्थान में तेल के कुएँ:-

  • केयर्न एनर्जी (स्कॉटलैण्ड) द्वारा संचालित कुएँ:-

 1. मंगला
 2. भाग्यम
 3. ऐश्वर्या

  • राजस्थान में खनिज तेल उत्पादन में कार्यरत कम्पनियाँ:-

 1. ONGC – ऑयल एण्ड नेचुरल गैस कम्पनी (भारत)
 2. ऑयल इण्डिया लिमिटेड (भारत)
 3. रिलायंस (भारत)
 4. केयर्न एनर्जी (स्कॉटलैण्ड)
 5. ENI – (इटली)
 6. PDVSA (वेनेजुएला)
 7. बिर्कबेक (मॉरीशस)

राजस्थान में पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र:-

1. बाघेवाला क्षेत्र:- (हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर)

  • ऑयल इण्डिया लिमिटेड व PDVSA (वेनेजुएला)/कार्यरत है।

2. जैसलमेर बेसिन/शाहगढ़ सब बेसिन:- (जैसलमेर)

  • फीनीक्स ओवर सीज कम्पनी कार्यरत है।

3. बीकानेर-नागौर बेसिन:-

  • एस्सार ऑयल एण्ड गैस लिमिटेड (महाराष्ट्र) कार्यरित है।

4. विंध्य कगार क्षेत्र:-

  • ONGC (Oil and Natural Gas Corporation Limited) कार्यरत है।
  • राजस्थान का सबसे प्राचीन/सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र – बाड़मेर-सांचौर बेसिन।
  • राजस्थान में नवीन पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र – बीकानेर-नागौर बेसिन (पूनम क्षेत्र) – 2016

(iii) प्राकृतिक गैस:-

  • वर्तमान सदी (शताब्दी) का ईंधन या पर्यावरण मित्र कहा जाता है।
  • वर्ष 1999 में प्राकृतिक गैस की खोज जैसलमेर के घोटारू में की गई जहाँ हीलियम गैस के भण्डार मिले हैं।
  • राजस्थान में प्राकृतिक गैस की खोज फोकस एनर्जी (USA) द्वारा राजस्थान शेल्फ (जैसलमेर बेसिन) में की गई।
  • राजस्थान में प्राकृतिक गैस के उत्पादक क्षेत्र:-

4. अन्य अधात्विक खनिज:-

1. अभ्रक:-

  • अभ्रक के भण्डारण में राजस्थान का प्रथम स्थान है।

 1. रूबी अभ्रक (श्वेत अभ्रक) – पेग्मेटाइट
 2. बायोफाइट (श्याम अभ्रक) – मेग्नेटाइट/पेग्मेटाइट
 3. मास्कोवाइट – (गुलाबी अभ्रक) – पेग्मेटाइट

  • अभ्रक विद्युतरोधी खनिज है जिसका उपयोग विद्युतरोधी उपकरण बनाने में किया जाता है।
  • अभ्रक ईंट उद्योग – भीलवाड़ा
  • अभ्रक के चूर्ण से ईंट या चद्दर बनाने की क्रिया माइकासाइट कहलाती है।

राजस्थान में अभ्रक उत्पादन क्षेत्र-
 1. भीलवाड़ा – दांता, भूणास, टूंका, बनेड़ी, नात की नेरी
 2. सीकर – रोहिला – खण्डेला क्षेत्र
 3. उदयपुर – चम्पागुढ़ा
 4. राजसमंद – नाथद्वारा
 5. जयपुर – मोची की खान
 6. अलवर – मकरी मुंडा की खान

(ii) एस्बेस्टॉस:-

  • राजस्थान से निकलने वाला एकमात्र रेशा खनिज जिसे मिनरल वूल, रॉकवूल नेचुरल फाइबर मिनरल के नाम से जाना जाता है।
  • तापरोधी खनिज है – तापरोधी उपकरण/सामग्री जैसे अग्निरोधी ईंट बनाने में प्रयोग किया जाता है।
  • राजस्थान का एस्बेस्टॉस उत्पादन में प्रथम स्थान है।
  • एस्बेस्टॉस तीन प्रकार का होता है।

 1. क्राइसोलाइट – सर्वश्रेष्ठ एस्बेस्टॉस है।
 2. ट्रिमोलाइट
 3. एम्फीबोलाइट – राजस्थान में सर्वाधिक उत्पादन होता है।

  • राजस्थान में प्रमुख उत्पादक क्षेत्र-

 1. अजमेर – नरैला, अर्जुनपुरा, कनवाली
 2. पाली – सेन्द्रा
 3. उदयपुर – ऋषभदेव, खेरवाड़ा, सलुम्बर, जांजर की पाल
 4. राजसमंद – तीखी-गुढ़ा
 5. डूँगरपुर – नलवा, घंटीघला, घोघरा, देवल

(iii) संगमरमर:-

  • संगमरमर में राजस्थन का भारत में प्रथम स्थान है।
  • राजस्थान में संगमरमर का सर्वाधिक उत्पादन-राजसमंद में होता है।
  • सफेद संगमरमर – मकराना (नागौर)
  • काला संगमरमर – भैंसलाना (जयपुर)
  • हरा संगमरमर – ऋषभदेव (उदयपुर)
  • पीला संगमरमर – जैसलमेर
  • गुलाबी संगमरमर – भरतपुर
  • लाल संगमरमर – धौलपुर
  • बादामी संगमरमर – जोधपुर
  • सतरंगी/इंद्रधनुषी संगमरमर – खांदरा (पाली)

(iv) ग्रेनाइट:-

  • राजस्थान में सबसे ज्यादा ग्रेनाइट जालोर जिले में पाया जाता है इसलिए जालोर को ग्रेनाइट सिटी कहा जाता है।
  • काला ग्रेनाइट – कालाडेरा (जयपुर)
  • पीला ग्रेनाइट – पीथला गाँव (जालोर)
  • गुलाबी ग्रेनाइट – बाबरमाला (जालोर)
  • मरकरी/लाल ग्रेनाइट – सिवाणा (बाड़मेर)
  • नोट:- संगमरमर तथा ग्रेनाइट के सबसे ज्यादा प्रकार राजस्थान में हैं।

(v) वोलेस्टोनाइट:-

  • इस खनिज में राजस्थान का एकाधिकार है।
  • राजस्थान वोलेस्टोनाइट- खिल्ला बैटका (सिरोही) खेड़ा सायरा (उदयपुर) व पाली से निकाला जाता है।

(vi) बेन्टोनाइट:-

  • मुल्तानी मिट्टी
  • हाथी की ढाणी, गिरल, अकाली (बाड़मेर), बीकानेर, सवाई माधोपुर से निकाला जाता है।

(vii) फायर क्ले:- बीकानेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़

(viii) चाइना क्ले:- बीकानेर, बाड़मेर, अलवर, चित्तौड़गढ़, से निकाला जाता है।

  • राजस्थान का उत्तर प्रदेश के बाद दूसरा स्थान है।

(ix) बॉल क्ले:- बीकानेर

  • राजस्थान का प्रथम स्थान है।

(x) बेराट्स:-

  • बेराइट्स बेरियम सल्फेट होता है जिसका उपयोग पेट्रोलियम उद्योग, तेल कुओं की ड्रिलिंग मड बनाने, पेंट उद्योग तथा कागज उद्योग में किया जाता है।
  • राजस्थान में बेराइट्स के सबसे बड़े भण्डार उदयपुर तथा अलवर में हैं।
  • उदयपुर-गिर्वा, बाबरमल
  • अलवर-भानखेड़ा (बेराइट्स का भण्डार) 

(xi) चूना पत्थर-लाइम स्टोन:-

  • चूना पत्थर अवसादी शैलों में पाया जाने वाला अधात्विक खनिज है।
  • चूना पत्थर के भण्डारों की दृष्टि से राजस्थान का देश में तीसरा स्थान है।
  • राजस्थान में सीमेन्ट ग्रेड, स्टील ग्रेड व केमिकल ग्रेड का चूना पत्थर पाया जाता है।
  • चित्तौड़गढ़ को राजस्थान का ‘lime stone district’ कहा जाता है।
  • बाँसवाड़ा में सीमेन्ट ग्रेड व हाइग्रेड लाइमस्टोन पाया जाता है।

(xii) फेल्सपार:-

  • देश में फेल्सपार में सर्वाधिक भण्डार राजस्थान (90 प्रतिशत) में है और राजस्थान में अजमेर जिले से (95 प्रतिशत) फेल्सपार प्राप्त होता है। फेल्सपार खनिज की उत्पत्ति अभ्रक की खानों से सह उत्पाद के रूप में होती है।
  • फेल्सपार सोडियम, पोटाश व कैल्सियम का सिलिकेट है। राज्य में यह खनिज अरावली पहाड़ियों की पेग्मेटाइट में पाया जाता है।
  • फेल्सपार का उपयोग सिरेमिक उद्योग्र चीनी के बर्तन, टाइल्स बनाने, सफेद सीमेन्ट तथा काँच उद्योग में किया जाता है।

राजस्थान में फेल्सपार के प्राप्ति स्थल:-
 1. अजमेर – मकरेडा, बांदरसिंदरी, ब्यावर, जवाजा, मसूदा, पीसांगन, लोहार्गल
 2. भीलवाड़ा – जहाजपुर
 3. पाली – चानोदिया

(xiii) फ्लोर्सपार/फ्लोराइट:-

  • फ्लोर्सपार को फ्लोराइट भी कहते हैं।
  • फ्लोराइट का उपयोग कीटनाशक दवाई बनाने में किया जाता है।
  • फ्लोर्सपार का सर्वाधिक उत्पादन माण्डो की पाल (डूँगरपुर) में होता है।
  • फ्लोर्सपार के भण्डारण में राजस्थान दूसरा तथा उत्पादन में तीसरे स्थान पर है।
  • जालोर के भीनमाल तहसील के कराड़ा गाँव में फ्लोर्सपार के बड़े भण्डार मिले हैं।
  • फ्लोर्सपार उदयपुर के काला मगरा व झालरा क्षेत्र तथा अजमेर के मुंडोती, तिलोरा व रिछमालिया क्षेत्र में भी पाया जाता है।

(xiv) डोलोमाइट:-

  • कैल्शियम और मैग्नीशियम युक्त चूना पत्थर को डोलोमाइट कहते हैं।
  • राजस्थान में डोलोमाइट का सर्वाधिक उत्पादन उदयपुर व राजसमंद में होता है।
  • डोलोमाइट का उपयेाग लोहा-इस्पात उद्योगों में तथा फर्श के लिए पाउडर बनाने में किया जाता है।
  • डोलोमाइट के नवीन भण्डार राजसमंद जिले में मिले हैं।
  • डोलोमाइट के प्राप्ति स्थल-

 1. बाँसवाड़ा- विट्ठलदेव, त्रिपुरा सुन्दरी
 2. उदयपुर- धारियावाद, ईसवाल
 3. राजसमंद- नाथद्वारा, हल्दीघाटी, तलाई
 4. अलवर, सीकर, झुंझुनूँ, भीलवाड़ा, नागौर जिलों में भी डोलोमाइट के निक्षेप हैं।

(xv) पाइराइट्स:-

  • पाइराइट्स का उपयोग गंधक का तेजाब व उर्वरक बनाने में किया जाता है।
  • राजस्थान में पाइराइट्स केवल सीकर के सलादीपुरा में पाया जाता है।

(xvi) वर्मीक्यूलाइट:-

  • यह तापरोधी व ध्वनि रोधी होती है।
  • राजस्थान में वर्मीक्यूलाइट का उत्पादन अजमेर होता है।

(xvii) मैग्नेसाइट:-

  • यह मैग्नीशियम का स्रोत है।
  • इसका उपयोग फर्टीलाइजर व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में होता है।
  • राजस्थान में अजमेर के सरूपा, छाजा, गाफा क्षेत्र तथा डूँगरपुर व पाली में इसका उत्पादन होता है।

(xviii) क्वार्ट्ज:-

  • क्वार्ट्ज अर्थात् स्फटिक पृथ्वी के भू-पर्पटी (क्रस्ट) पर सर्वाधिक पाया जाने वाला दूसरा खनिज है। (प्रथम-फेल्सपार) क्वार्ट्ज रंगहीन, पारदर्शी व कठोर खनिज होता है।
  • क्वार्ट्ज का प्रयोग घड़ी बनाने, शिवलिंग और मूर्तियाँ बनाने में किया जाता है।
  • राजस्थान में क्वार्ट्ज का उत्पादन अजमेर व भीलवाड़ा में होता है।

(xix) सिलिका सैंड/काँच बालुका:-

  • सिलिका सैंड का उपयोग काँच बनाने में होता है इसलिए इसे काँच बालुका भी कहते हैं।
  • राजस्थान में सर्वाधिक सिलिका का उत्पादन जयपुर में होता है तथा राज्य में उत्पादित सिलिका का उपयोग धौलपुर की काँच फैक्ट्री में किया जाता है।
  • सिलिका सैंड प्राप्ति स्थल

 1. जयपुर
 2. बाराँ-अटरू व छबड़ा
 3. बाड़मेर-शिव तहसील
 4. बूँदी-बारोदिया

(xx) सैण्ड स्टोन:-

  • बलुआ पत्थर या बालुकाश्म (सैण्ड स्टोन) बालू के कणों का दवाब पाकर जम जाने से बनता है। बलुआ पत्थर में स्फटिक(क्वार्ट्ज) की बहुतायत होती है। बलुआ पत्थर दानेदार और छिद्रित होता है जिससे इसकी परतों में भूमिगत जल एकत्र हो जाता है। अत: ये महत्वपूर्ण जलस्त्रोत होते हैं। 

राजस्थान में sand stone (बलुआ पत्थर) प्राप्ति  स्थल:-

  • बंसी पहाडपुर (भरतपुर)
  • बाडी, बसेड़ी (धोलपुर में गुलाबी सैण्ड स्टोन)
  • खैराबाद तहसील (कोटा  में सफेद सेण्ड स्टोन)
  • राजस्थान में देश का 90% सैण्ड स्टोन उत्पादित होता है।

(xxi) घीया पत्थर/soap stone:-

  • घीया पत्थर का उपयोग खिलौने, रंगीन पेन्सिल, टेलकम पाउडर, कीटनाशक आदि बनाने में होता है।
  • राजस्थान में राजसमंद, उदयपुर, दौसा, अजमेर, डूँगरपुर, बाँसवाडा, करौली जिलों में घीया पत्थर होता है।

(xxii) लैटेराइट:-

  • लैटेराइट अधिकांशत: बॉक्साइट के साथ पाया जाता है।
  • लैटेराइट मुख्यत: रोड मैटल व बिल्डिंग स्टोन के रूप में प्रयुक्त होता है।
  • राजस्थान में चित्तौड़गढ़ में लैटेराइट की खान है। 
  • चित्तौड़गढ़ के अलावा बाराँ, झालावाड़ में भी लैटेराइट पाया जाता है।