राष्ट्रपति
- अनुच्छेद-61 के अनुसार राष्ट्रपति को संविधान का अतिक्रमण या उल्लंघन करने पर उसके पद से कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व महाभियोग के द्वारा हटाया जा सकता है।
- महाभियोग प्रस्ताव राष्ट्रपति के विरुद्ध संसद के किसी भी सदन द्वारा लाया जा सकता है लेकिन ऐसा कोई आरोप तब लाया जायेगा जब वह –
- प्रस्तावित आरोप एक संकल्प के रूप में हो,
- कम से कम 14 दिन की लिखित सूचना देने के बाद प्रस्तुत किया गया हो,
- किसी सदन द्वारा 1/4 सदस्यों ने हस्ताक्षर करके प्रस्तावित करने का तथ्य प्रकट किया हो,
- उस सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम 2/3 बहुमत द्वारा संकल्प पारित किया गया हो।
- अनुच्छेद-62 में कहा गया है कि राष्ट्रपति के लिए निर्वाचन पदावधि की समाप्ति से पहले ही पूर्ण कर लिया जायेगा, परन्तु राष्ट्रपति अपने पद पर तब तक बना रहेगा जब तक कि उसका उत्तराधिकारी अपना पद धारण नहीं कर लेता।
- यदि राष्ट्रपति का पद किसी कारण से (मृत्यु, पद-त्याग, पद से हटाने) रिक्त हो जाता है तो उसे भरने के लिए निर्वाचन 6 महीने के अंदर हो जाना अनिवार्य है।
- राष्ट्रपति की उपलब्धियाँ और भत्ते पदावधि के दौरान कम नहीं किए जाएंगे।
- वर्ष 2018 से राष्ट्रपति का वेतन 5 लाख रुपये है, जो भारत की संचित निधि द्वारा दिया जाता है।
- राष्ट्रपति द्वारा पदत्याग देने के पश्चात या पदावधि की समाप्ति पर भी उसके वेतन का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में देने का प्रावधान है।
कार्यपालिका शक्तियाँ –
- संविधान के अनुच्छेद-53 के अनुसार संघीय कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होती है। इसके कारण राष्ट्रपति संघीय कार्यपालिका का प्रमुख होता है।
- अनुच्छेद-77 के अनुसार संघ सरकार का समस्त प्रशासन कार्य राष्ट्रपति के नाम से होता है।
- अनुच्छेद-78 के अनुसार राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री से प्रशासन के सन्दर्भ में सूचना प्राप्त करने का अधिकार है।
- राष्ट्रपति को नियुक्त और पदच्युत करने की महत्वपूर्ण शक्तियाँ प्राप्त हैं। वह प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है और प्रधानमंत्री की मंत्रणा के अनुसार अन्य मंत्रियों, उच्चतम और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, महान्यायवादी, नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, दिल्ली और डिचेरी के मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति करता है।
- वह उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य न्यायाधीशों, संघ तथा राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को भी कुछ अवस्थाओं में एक निश्चित प्रक्रिया द्वारा पदच्युत कर सकता है।
विधायी शक्तियाँ –
- अनुच्छेद-80(3) के अनुसार राष्ट्रपति राज्य सभा में 12 सदस्यों को मनोनीत करता है, जिनका संबंध साहित्य, कला, विज्ञान, समाजसेवा जैसे विषयों में विशेष ज्ञान से है।
- अनुच्छेद-85 के अनुसार राष्ट्रपति संसद के सत्र आहूत करता है, वह किसी सदन का सत्रावसान कर सकता है तथा लोकसभा को विघटित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है।
- अनुच्छेद-86 के अनुसार राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों में या एक सदन में अभिभाषण कर सकता है।
- अनुच्छेद-108 के अनुसार साधारण विधेयक पर संसद के दोनों सदनों में 6 माह से अधिक का गतिरोध होने की स्थिति में संयुक्त बैठक आहूत कराता है जिसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।
- अनुच्छेद-123 के अनुसार राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
- अध्यादेश की अधिकतम अवधि 6 माह तथा सदन की पुनर्बैठक के बाद 6 सप्ताह तक बनी रहती है। राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश को किसी भी समय वापिस लिया जा सकता है। अध्यादेश का प्रभाव वैसा ही होता है जैसा कि संसद के किसी अधिनियम का होता है।
- 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के माध्यम से अध्यादेश को न्यायिक समीक्षा से बाहर कर दिया गया है परन्तु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम,1978 के माध्यम से इसे फिर से न्यायिक समीक्षा के अंतर्गत कर दिया गया है।


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