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भारत का संविधान,भारत का सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा लिखित है।भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है जो भारत में शासन व्यवस्था के बारेमेंउल्लेखित है।
- संविधान सभा- संविधान निर्माण के लिए गठित प्रतिनिधि सभा को संविधान सभा कहा जाता है। संविधान सभा का प्रथम दर्शन 1895 में तिलक के'स्वराज विधेयक' में देखने को मिलता है, जबकि स्पष्ट शब्दों में सबसे पहली बार महात्मा गाँधी ने 5 जनवरी, 1922 को कहा “भारतीय संविधान भारतीयों की इच्छानुसार ही होगा'।
- भारत में औपचारिक रूप से संविधान सभा के गठन का विचार सर्वप्रथम एम.एन. राय के द्वारा रखा गया। 1934 में स्वराज्य पार्टी ने पहली बार भारत के संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा के गठन की मांग की तथा कांग्रेस ने अपने फैजपुर अधिवेशन में उक्त मांग को स्वीकार किया। पं. जवाहरलाल नेहरू ने 1938 के कांग्रेस अधिवेशन में कहा की भारतीय संविधान का निर्माण एक संविधान सभा द्वारा किया जाये। भारतीयों की मांग और कई दौर कि वार्ताओं के मद्देनजर भारत में एक कैबिनेट मिशन को भेजा गया। इस मिशन ने दो संविधान सभाओं की मांग को ठुकरा दिया।
केबिनेट मिशन की संविधान सभा के गठन के संदर्भ में योजना-
(A) वर्ष 1946 को तीन सदस्यीय केबिनेट मिशन भारत आया जिसमें निम्न सदस्य सम्मिलित थे-
(1) लॉर्ड पेथिक लॉरेंस (अध्यक्ष)
(2) सर स्टेफर्ड क्रिप्स
(3) ए.वी. अलेक्जेंडर
(B) इस मिशन ने अपनी योजना 16 मई, 1946 को प्रकाशित की। संविधान सभा के गठन के सन्दर्भ में केबिनेट मिशन ने प्रमुख व्यवस्था इस प्रकार की-
- भारत में संविधान सभा के लिए अप्रत्यक्ष निर्वाचन होगा।
- संविधान सभामें 389 सदस्य होंगे।
292 ब्रिटिश प्रान्तों के
93 देशी रियासतों
4 चीफ कमीश्नर क्षेत्र से
(C) 10 लाख व्यक्तियों(लगभग) पर संविधान-सभा में एक सदस्य होगा।
(D) देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के प्रमुखों द्वारा किया जाना था।
संविधान सभा के चुनाव-
संविधान सभा के लिए चुनाव जुलाई-अगस्त, 1946 में 296 सीटों हेतु हुआ। जिनके परिणाम निम्न प्रकार रहे-
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस- 208सीटें
- मुस्लिम लीग- 73सीटें
- स्वतंत्र सदस्य-15 सीटें
Note- देशी रियासतों ने खुद को संविधान सभा से अलग रखने का निर्णय लियाअंत: उनकों आवंटित की गई 93 सीटें भर नहीं पाईं।
निष्कर्षत: कहा जा सकता है कि संविधान सभा आंशिक रूप से चुनी और आंशिक रूप से नामांकित सभा थी।
संविधान सभा की कार्यप्रणाली-
- संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई जिसमें मुस्लिम लीग ने हिस्सा नहीं लिया था क्योंकि मुस्लिम लीग अलग पाकिस्तान की मांग कर रहा थी।
- संविधान सभा ने डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा को संविधान सभा का अस्थायी सभापति व फ्रैंक एंथोनी को उपसभापति बनाया गया।
- संविधान सभा की पहली बैठक में 211 सदस्यों ने भागीदारी की थी।
- संविधान सभा की दूसरी बैठक में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान सभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुये।संविधान सभा के दूसरे सत्र में 25 जनवरी 1947 को एच.सी. मुखर्जी को उपाध्यक्ष तथा कालान्तर में 16 जुलाई 1947 को वी.टी. कृष्णामाचारी को उपाध्यक्ष के रूप में निर्वाचित किया गया, अर्थात संविधान सभा के दो उपाध्यक्ष थे।
- संविधान सभा की तीसरी बैठक दिसंबर, 1946 को हुई। जिसमें पं. जवाहरलाल नेहरू ने 'उद्देश्य प्रस्ताव' प्रस्तुत किया, जिसे 22 जनवरी, 1947 को संविधान सभा द्वारा स्वीकार किया गया।
संविधान सभा की समितियाँ-
- संविधान सभा ने संविधान के निर्माण से संबंधित विभिन्न कार्यों को करने के लिए कई समितियों का गठन किया। इनमें से 8 बड़ी समितियाँ थीं तथा अन्य छोटी।
- इन समितियों तथा इनके अध्यक्षों के नाम इस प्रकार हैं-
बड़ी समितियाँ -
1. संघ शक्ति समिति - जवाहरलाल नेहरू।
2. संघीय संविधान समिति - जवाहरलाल नेहरू।
3. प्रांतीय संविधान समिति - सरदार पटेल ।
4. प्रारूप समिति - डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ।
5. मौलिक अधिकारों एवं अल्पसंख्यकों संबंधी परामर्श समिति - सरदार पटेल।
(note-इस समिति की दो उप समितियाँ थी)
(a)मौलिक अधिकार उप समिति - जे.बी. कृपलानी।
(b)अल्पसंख्यक उप समिति – एच.सी. मुखर्जी।
6. प्रक्रिया नियम समिति - डॉ. राजेन्द्र प्रसाद।
7. राज्यों के लिये समिति (राज्यों से समझौता करने वाली) - जवाहर लाल नेहरू।
छोटी समितियाँ -
1. संविधान सभा के कार्यों संबंधी समिति - जी.वी मावलंकर।
2. कार्य संचालन समिति - डॉ. के.एम. मुंशी।
3. सदन समिति - बी. पट्टाभिसीतारमैय्या।
4. राष्ट्र ध्वज संबंधी तदर्थ समिति - डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ।
5. प्रारूप संविधान का परीक्षण करने वाली समिति – अल्लादी कृष्ण स्वामी अय्यर।
6. क्रीडेंशियल समिति - सर अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर।
7. वित्त एवं स्टाफ समिति - ए.एन. सिन्हा।
प्रारूप समिति(प्रमुख समिति)-
- संविधान सभा की सभी समितियों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण समिति ‘प्रारूप समिति’ थी। इससमिति का गठन 29 अगस्त, 1947 को हुआ था। इस समिति को नए संविधान का प्रारूप तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
- इससमिति में सात सदस्य थे-
1. डॉ. बी.आर. अंबेडकर (अध्यक्ष)
30 अगस्त 1947 को इनको प्रारूप समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया।
2. एन. गोपालस्वामी आयंगर।
3. अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर।
4. डॉक्टर के.एम. मुंशी।
5. सैयद मोहम्मद सादुल्ला।
6. एन. माधव राव।
7. टी.टी. कृष्णामाचारी।
- विभिन्न समितियों के प्रस्तावों पर विचार करने के बाद प्रारूप समिति ने भारत के संविधान का पहला प्रारूप तैयार किया जिसे फरवरी 1948 में प्रकाशित किया गया था।
- भारत के लोगों को इस प्रारूप पर चर्चा करने और संशोधनों का प्रस्ताव देने के लिए 8 माह का समय दिया गया। लोगों की शिकायतों, आलोचनाओं और सुझावों के परिप्रेक्ष्य में प्रारूप समिति ने दूसरा प्रारूप तैयार किया, जिसे अक्टूबर, 1948 में प्रकाशित किया गया। प्रारूप समिति ने अपना प्रारूप तैयार करने में छह माह से भी कम का समय लिया। इसदौरान उसकी कुल 141 बैठकें हुई।
अंतरिम सरकार (1946)-
- 24 अगस्त, 1946 को पं. जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारत की पहली अन्तरिम सरकार का गठन किया गया जिसमें मुस्लिम लीग की भागीदारी नहीं थी।
- वायसराय लॉर्ड वैवल को परिषद का अध्यक्ष तथा पं. जवाहरलाल नेहरू को परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया।
- पं. जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अन्तरिम सरकार के कुल 12 सदस्यों ने (पं. नेहरू व 11 अन्य सदस्य) 2 सितम्बर, 1946 को शपथ ग्रहण की । शपथ ग्रहण के समय अन्तरिम सरकार में कांग्रेस के प्रतिनिधि कुछ निर्दलीय तथा तीन गैर-मुस्लिम लीग सदस्य शामिल थे।
- 26 अक्टूबर को अन्तरिम सरकार का पुनर्गठन किया गया तथा तीन मूल सदस्यों के स्थान मुस्लिम लीग के 5 प्रतिनिधि अन्तरिम सरकार में शामिल किये गये।
संविधान का प्रभाव में आना-
- डॉ बी.आर. अंबेडकर ने सभा में 4 नवंबर, 1948 को संविधान का अंतिम प्रारूप पेश किया। इस बार संविधान पहली बार पढ़ा गया जिस पर पाँच दिन तक आम चर्चा हुई।
- संविधान पर दूसरी बार 15 नवंबर, 1948 से विचार होना शुरु हुआ। इसमें संविधान पर खंडवार विचार किया गया।यह कार्य 17 अक्टूबर, 1949 तक चला। इस अवधि में कम से कम 7653 संशोधन प्रस्ताव आये थे।
- संविधान पर तीसरी बार 14 नवंबर, 1949 से विचार होना शुरु हुआ। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने “द कॉन्स्टीट्यूशनऐज सैटल्ड बाई द असेंबली बी पास्ड” प्रस्ताव पेश किया। संविधान के प्रारूप पर पेश इस प्रस्ताव को 26 नवंबर, 1949 को पारित घोषित कर दिया गया और इस पर अध्यक्ष व सदस्यों के हस्ताक्षर लिए गए। सभा में कुल 299 सदस्यों में से उस दिन केवल 284 सदस्य उपस्थित थे, जिन्होंने संविधान पर हस्ताक्षर किए। संविधान की प्रस्तावना में 26 नवंबर, 1949 का उल्लेख उस दिन के रूप में किया गया है जिस दिन भारत के लोगों ने सभा में संविधान को अपनाया, लागू किया व स्वयं को संविधान सौंपा।
- 26 नवंबर, 1949 को अपनाए गए संविधान में प्रस्तावना, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियाँ थीं। प्रस्तावना को पूरे संविधान को लागू करने के बाद लागू किया गया।
- नए विधि मंत्री डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने सभा में संविधान के प्रारूप को रखा। उन्होंने सभा के कार्य-कलापों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्हें भारत के संविधान के पिता के रूप में पहचाना जाता है। इस महान लेखक, संविधान विशेषज्ञ, अनुसूचित जातियों के निर्विवाद नेता और भारत के संविधान के प्रमुख शिल्पकार को आधुनिक मनु की संज्ञा भी दी जाती है।
संविधान का प्रवर्तन-
- 26 नवंबर, 1949 को नागरिकता, चुनाव, तदर्थ संसद, अस्थायी व परिवर्तनशील नियम तथा छोटे शीर्षकों से जुड़े कुछ प्रावधान अनुच्छेद 5, 6, 7, 8, 9, 60, 334, 366, 367, 379,380, 388, 391, 392 और 393 स्वतःही लागू हो गए।
- संविधान के शेष प्रावधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुए। इस दिन को संविधान की शुरुआत के दिन के रूप में देखा जाता है और इसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- इस दिन को संविधान की शुरुआत के रूप में इसलिए चुना गया क्योंकि इसका अपना ऐतिहासिक महत्व है। इसी दिन 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन (दिसंबर 1929) में पारित हुए संकल्प के आधार पर पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया था।
संविधान सभा केअन्य कार्य-
संविधान सभा ने देश के लिए संविधान के निर्माण तथा कानूनों को लागू करने के अलावा संविधान सभा ने निम्न कार्य भी किये-
1. इसने 16 मई, 1949 में राष्ट्रमंडल में भारत की सदस्यता का सत्यापन किया।
2. इसने 22 जुलाई, 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को अपनाया।
3. 14 सितम्बर, 1949 को हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्वीकृत किया गया।
4. इसने 24 जनवरी, 1950 को राष्ट्रीय गान को अपनाया।
5. इसने 24 जनवरी, 1950 को राष्ट्रीय गीत को अपनाया।
6. इसने 24 जनवरी, 1950 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में चुना। यह संविधान सभा की अन्तिम बैठक थी जिसमें संविधान पर अंतिम रूप से हस्ताक्षर किये गये।
संविधान सभा की बैठक जब विधायिका के रूप में होती थी तब इसकी अध्यक्षता जी.वी. मावलंकर करते थे तथा जब सविधान सभा के रूप में होती तो इसकी अध्यक्षता डॉ. राजेन्द्र प्रसाद करते थे।
संविधान सभा के प्रमुख निर्वाचित नेता-
- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
- पं. जवाहर लाल नेहरू
- मोहम्मद अली जिन्ना
- डॉ. भीमराव अम्बेडकर
- फ्रेंक एन्थोनी
- जगजीवन राम
- हंसा मेहता
- कामेश्वर सिंह (दरभंगा के महाराजा)


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