अपवाह तंत्र
- जल को एक निश्चित धारा एवं दिशा में प्रवाह अपवाह कहते हैं तथा धाराओं के जाल को अपवाह तंत्र कहते हैं।
- नदी बेसिन या जलग्रहण क्षेत्र
नदी द्रोणी
- नदी जिस क्षेत्र से जल ग्रहण करती है उसे उस नदी का जल ग्रहण क्षेत्र या Catchment Area कहते हैं।
- जल ग्रहण क्षेत्र के आधार पर नदी द्रोणियों को तीन भागों में बांटा गया है।
1. बड़ी नदी द्रोणियाँ (Large Basins) :-
- जल ग्रहण क्षेत्र 20,000 km2 से अधिक
- 14 नदी द्रोणिया à बड़ी नदी द्रोणियों में आती है।
- गंगा, गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा
2. मध्यम नदी द्रोणिया (Medium River Basins):-
- 2000-20,000 km2
- 44 नदी द्रोणियाँ
3. लघु नदी द्रोणिया (Small River Basins) :-
- जलग्रहण क्षेत्र – 2000 km2 से कम
- लगभग 55 नदी द्रोणियाँ
- जलसंभर :- बहुत छोटी नदी द्रोणिया
- जल विभाजक
- दिल्ली – अम्बाला सहारनपुर
- अरावली
- विंध्याचल
- सतपुड़ा
- पश्चिमी घाट
- अपवाह प्रतिरूप Drainage Pattern :- अपवाह तंत्र एक विशेष ज्यामिति आकार में।
- वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप (Dendritic Drainage Pattern)
- पत्ताकार अपवाह प्रतिरूप (Pinnate Drainage Pattern)
- जालीनुमा अपवाह प्रतिरूप (Trelis Drainage Pattern)
- आयताकार अपवाह तंत्र (Rectangalan Drainage Pattern)
- आरीय अपवाह तंत्र (Radial Drainage Pattern)
हिमालय नदी तंत्र
- जल का स्त्रोत – हिमनद + मानसून
- सदाबहार नदियाँ
- जल का आयतन – अधिक
- नदी द्रोणी – बड़ी नदी द्रोणी
- डेल्टा का निर्माण
प्रायद्वीपीय नदी तंत्र
- जल का स्त्रोत – मानसुन
- मानसुनी नदियाँ/मौसमी नदियाँ
- जल का आयतन – कम
- नदी द्रोणी – अपेक्षाकृत छोटी नदी द्रोणियाँ
- डेल्टा + ऐश्चुरी का निर्माण


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