महान्यावादी, नियंत्रक और महालेखा परीक्षक




प्रश्न 1   भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का कार्यकाल कितने वर्ष का है -
 (अ) पाँच वर्ष
 (ब) तीन वर्ष
 (स) छः वर्ष
 (द) दो वर्ष
 उत्तर  

प्रश्न 2   कथन (A): नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का कर्ता न केवल व्यय की वैधता सुनिश्चित करना है अपितु औचित्य भी है।
कारण (R) : उसे वित्तीय प्रशासन के क्षेत्र में संविधान और संसद के कानूनों को बनाए रखना

 (अ) (A) और (R) दोनों सही हैं किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
 (ब) (A) गलत है लेकिन (R) सही है
 (स) (A) और (R) दोनों सही हैं एवं (R), (A) की सही व्याख्या है
 (द) (A) सही है लेकिन (R) गलत है
 उत्तर  

प्रश्न 3   भारत का महान्यायवादी:
 (अ) अनुच्छेद 76 के तहत एक संवैधानिक निकाय है।
 (ब) छह साल की अवधि के लिए या 65 वर्ष की आयु जो भी पहले हो, तक पद पर रहता है।
 (स) निजी वकालत करने से वंचित किया गया है।
 (द) संसद की कार्यवाही में भाग नहीं ले सकता है।
 उत्तर  

प्रश्न 4   किस संवैधानिक पद धारक को, जो कि संसद का सदस्य नहीं होता है, संसद के समक्ष अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए बुलाया जा सकता है -
 (अ) महान्यायवादी
 (ब) नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक
 (स) मुख्य चुनाव आयुक्त
 (द) भारत का मुख्य न्यायाधीश
 उत्तर  

प्रश्न 5   भारत के नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक को उसके पद से हटाए जाने की प्रक्रिया निम्नांकित में से किसके समान है -
 (अ) लोकसभा अध्यक्ष
 (ब) भारत का महान्यायवादी
 (स) उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश
 (द) संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष
 उत्तर  

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