Hume soorat se kya matlab hum to seerat pe mrte hai,
Unse kehna tumhara husn dhal jaye toh bhi laut aana…!!
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Ye dil hi toh janta hain meri pak mohabbat ka aalam,
Ke mujhe jeenay ke liye sanso ki nahin teri zarurat hain.
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मैं उस किस्मत का सबसे पसंदीदा खिलौना हूँ,
वो रोज़ जोड़ती है मुझे फिर से तोड़ने के लिए
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क़यामत का तो सुना था के कोई किसी का ना होगा,
मगर अब तो दुनिया में भी ये रिवाज़ आम हो गया है.
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हम तो जल गये उसकी मोहब्बत में मोमकी तरह,
अगर फिर भी वो हमें बेवफा कहे…तो उसकी वफ़ा को सलाम.
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टूटे हुए सपनो और छुटे हुए अपनों ने मार दिया
वरना ख़ुशी खुद हमसे मुस्कुराना सिखने आया करती थी !!
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Hum na pa sake tujhe muddato se chahne ke baad, or
Kisi ne apna bana liya tujhe chnd rasmein nibhane k baad.
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गुरुर-ए-हुस्न की मदहोशी में उनको ये भी खबर नहीं,
कौन चाहेगा मेरे सिवा उनको उम्र ढल जाने के बाद.
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यूँ तो कोई शिकायत नहीं मुझे मेरे आज से,
मगर कभी-कभी बीता हुआ कल बहुत याद आता है.
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उसके हाथ की गिरिफ्त ढीली पड़ी तो महसूस हुआ
यही वो जगह है जहाँ रास्ता बदलना है.
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Mat puchh kaise guzar rahi hai zindagi,
Uss daur se guzar rahi hu jo guzarta hi nhi
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कुछ नहीं है आज मेरे शब्दों के गुलदस्ते में,
कभी कभी मेरी खामोशियाँ भी पढ लिया करो…!!
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Mausam ki misaal du ya tumhari,
Koi puchh baitha hai badalna kisko kehte hai
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बहुत जी लिये उनके लिये जो मेरे लिये सबकुछ थे,
अब जीनाहै बस उनके लिये जिनके लिये हम सब कुछ हैं.
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अपनी सी करो तुम भी अपनी सी करें हम भी,
कुछ तुम ने भी ठानी है कुछ हम ने भी ठानी है.
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उसने चुपके से मेरी आँखों पर हाथ रखकर पूछा….बताओ कौन हु मै
मैने धीरे से मुस्कुराकर कहा.मेरी जीने की वजह हो तुम.
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तुमने तीर चलाया तो कोई बात न थी,
ज़ख्म मैंने जो दिखाया तो बुरा मान गए…?
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काश एक खवाहिश पुरी हो जाऐ  इबादत के बगैर,
कोई मुझे भी चाहने लगे मेरी इजाजत के बगैर.
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नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की,
पता नहीं कहां से सीखी जालिम ने अदाएं रूठ जाने की.
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उड़ा भी दो सारी रंजिशें इन हवाओं में यारो,
छोटी सी जिंदगी है नफ़रत कब तक करोगे.