कोयला उद्योग
कोयले का महत्त्वः भारतीय कोयला उद्योग एक आधारभूत उद्योग है जिस पर अन्य उद्योगों का विकास निर्भर करता है। वर्तमान समय में शक्ति के साधन (Source of energy) के रूप में कोयला उद्योग का महत्त्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।
नोटः भारत में कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में:
तापीय ऊर्जा (Thermal Power) : 1,32,013 MW
जल विद्युत : 38,991 MW
नाभकीय विद्युत : 4780 MW
अन्य स्त्रोत : 24,503 MW
कुल विद्युत उत्पादन क्षमता : 2,00,287 MW
अप्रैल, 2012 में झज्जर (हरियाणा) में 660 MW की नई इकाई का उत्पादन भी सम्मिलित है।
भारत में कुल ऊर्जा के उत्पादन में कोयले का अंश लगभग 67% है।
भारत में दो कोयला उत्पादन क्षेत्र हैं:
गोंडवाना कोयला क्षेत्रः
पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश।
भारत में प्राप्त कुल कोयले का 98% भाग गोंडवाना क्षेत्र से ही प्राप्त होता है।
इस क्षेत्र से एन्थ्रेसाइट और बिटुमिनस किस्म के कोयले प्राप्त होते हैं।
टर्शियरी कोयला क्षेत्रः
जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, तमिलनाडु, आसाम, मेघालय और उत्तर प्रदेश।
भारत में प्राप्त कुल कोयले का 2% भाग टर्शियरी कोयला क्षेत्र से प्राप्त होता है।
इस क्षेत्र से लिग्नाइट किस्म का कोयला प्राप्त होता है जिसे ‘भूरा कोयला’ भी कहते हैं।
कोयला उद्योग की वर्तमान स्थितिः
भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार, ‘भारत में 1 अप्रैल, 2011 तक सुरक्षित कोयले का भंडार 285.87 अरब टन
है।’
कोयला उद्योग में ₹ 800 करोड़ की पूंजी विनियोजित है तथा यह 7 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराता है।
भारत में कोयले के सर्वाधिक भंडार वाले राज्य (जनवरी, 2008 के अनुसार) हैं—(1) झारखंड, (2) उड़ीसा,
(3) छत्तीसगढ़, (4) पश्चिम बंगाल और (5) आंध्र प्रदेश।
भारत के प्रमुख कोयला क्षेत्र हैं—रानीगंज, झरिया, पू- और पश्चिम बोकारो, तवाघाटी, जलचर, चन्द्रान्वर्धा और गोदावरी की घाठी।
वर्तमान समय में भारतीय कोलया उद्योग का संचालन एव
कोयले का महत्त्वः भारतीय कोयला उद्योग एक आधारभूत उद्योग है जिस पर अन्य उद्योगों का विकास निर्भर करता है। वर्तमान समय में शक्ति के साधन (Source of energy) के रूप में कोयला उद्योग का महत्त्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।
नोटः भारत में कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में:
तापीय ऊर्जा (Thermal Power) : 1,32,013 MW
जल विद्युत : 38,991 MW
नाभकीय विद्युत : 4780 MW
अन्य स्त्रोत : 24,503 MW
कुल विद्युत उत्पादन क्षमता : 2,00,287 MW
अप्रैल, 2012 में झज्जर (हरियाणा) में 660 MW की नई इकाई का उत्पादन भी सम्मिलित है।
भारत में कुल ऊर्जा के उत्पादन में कोयले का अंश लगभग 67% है।
भारत में दो कोयला उत्पादन क्षेत्र हैं:
गोंडवाना कोयला क्षेत्रः
पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश।
भारत में प्राप्त कुल कोयले का 98% भाग गोंडवाना क्षेत्र से ही प्राप्त होता है।
इस क्षेत्र से एन्थ्रेसाइट और बिटुमिनस किस्म के कोयले प्राप्त होते हैं।
टर्शियरी कोयला क्षेत्रः
जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, तमिलनाडु, आसाम, मेघालय और उत्तर प्रदेश।
भारत में प्राप्त कुल कोयले का 2% भाग टर्शियरी कोयला क्षेत्र से प्राप्त होता है।
इस क्षेत्र से लिग्नाइट किस्म का कोयला प्राप्त होता है जिसे ‘भूरा कोयला’ भी कहते हैं।
कोयला उद्योग की वर्तमान स्थितिः
भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार, ‘भारत में 1 अप्रैल, 2011 तक सुरक्षित कोयले का भंडार 285.87 अरब टन
है।’
कोयला उद्योग में ₹ 800 करोड़ की पूंजी विनियोजित है तथा यह 7 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराता है।
भारत में कोयले के सर्वाधिक भंडार वाले राज्य (जनवरी, 2008 के अनुसार) हैं—(1) झारखंड, (2) उड़ीसा,
(3) छत्तीसगढ़, (4) पश्चिम बंगाल और (5) आंध्र प्रदेश।
भारत के प्रमुख कोयला क्षेत्र हैं—रानीगंज, झरिया, पू- और पश्चिम बोकारो, तवाघाटी, जलचर, चन्द्रान्वर्धा और गोदावरी की घाठी।
वर्तमान समय में भारतीय कोलया उद्योग का संचालन एव
