ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य:-
(A) SARS (किलर निमोनिया):-
- वर्ष 2003 में चीन में यह बिमारी आई थी।
- SARS – Severe Acute Respiratory Syndrome.
- यह एक वायरस जनित रोग था जिसका नाम SARS-COV (कोरोना वायरस) था।
- यह वायरस चमगादड़ तथा बिल्लियों से मनुष्य में प्रसारित होता था।
- इस रोग में मृत्यु दर 10-15% थी।
- इस वायरस में DNA अथवा RNA होता है।
(B) MERS (Middle-East Respiratory Syndrome):-
- वर्ष 2012 में यह रोग मध्य-पूर्वी एशिया में फैला था।
- इस रोग का वायरस MERS-COV वायरस है।
- ऊँटों से यह वायरस मनुष्यों में आया था।
- इस रोग में मृत्यु दर 20-30% थी।
(C) COVID-19 (कोरोना वायरस रोग-19):-
- वर्ष 2019 में चीन के ‘वुहान’ शहर में इसका जीरो पेशेंट देखा गया।
- इस रोग के वायरस का नाम SARS-COV-2 है।
संक्रमण:-
- यह एक अत्याधिक संक्रामक रोग है, जिसमें वायरस रोगी या संक्रमित वस्तुओं से स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में मुँह तथा नाक के द्वारा प्रवेश करता है।
- इस रोग में संक्रमित अंग श्वसन पथ तथा फेफड़ें होते हैं।
लक्षण:-
- इस रोग में रोगी संक्रमित होने के बाद उसे सांस लेने में कठिनाई होती है।
- उसे जुकाम, गंध तथा स्वाद की संवेदनाएँ खत्म हो जाती है तथा रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, अत्यधिक संक्रमण की स्थिति में व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
परीक्षण:-
- RT-PCR/रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज पॉलिमरेज चेन रिएक्शन।
- रेपिड टेस्ट/Blood Test – इसमें व्यक्ति के रक्त में एटीबॉडीज Ig-G व Ig-M जो कि Covid-19 के संक्रमण के कारण शरीर में बनती है, इनकी उपस्थिति को देखा जाता है।
उपचार:-
- HCR (हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन) नामक दवाई का उपयोग किया जाता है।
- रेमडेसिविर (बांग्लादेश में सर्वप्रथम उपयोग)
- एंटी रेट्रो वायरल ड्रग्स (एड्स रोगियों को दी जाने वाली दवा)
- प्लाज्मा कॉन्वल्सेंट थैरेपी – इस थैरेपी से COVID-19 से संक्रमित हो कर ठीक हुए व्यक्तियों के प्लाज्मा का प्रयोग कर रोगी व्यक्ति का उपचार किया जाता है।
- कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन अभी उपलब्ध नहीं है।
- इस रोग में मृत्युदर 2% से कम है।

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