मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद
- राज्यपाल, राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। वह मंत्रिपरिषद की सलाह से कार्य करता है जिसका प्रमुख मुख्यमंत्री होता है। मुख्यमंत्री भारतीय राज्य की कार्यपालिका का वास्तविक प्रधान होता है। वह राज्य विधानसभा का नेता होता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री को राज्य का वास्तविक शासक, सरकार का प्रमुख, शासन का प्रमुख, राज्य सरकार का प्रवक्ता आदि की संज्ञा दी जाती है।
अनुच्छेद – 163
- राज्यपाल को उसके स्व-विवेकी कार्यों को छोड़कर अन्य कार्यों में सहायता तथा सलाह प्रदान करने के लिए मंत्रिपरिषद होगी जिसका अध्यक्ष मुख्यमंत्री होगा। न्यायालय के द्वारा हर बात की समीक्षा नहीं की जा सकेगी कि मंत्रिपरिषद के द्वारा राज्यपाल को क्या तथा कब सलाह प्रदान की गई।
राज्यपाल की स्वविवेकी शक्तियाँ
संविधान प्रदत्त- अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राज्यपाल के द्वारा राज्य विधानमंडल से पारित किसी भी विधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित कर सकता है।
परिस्थिति जन्य- यदि विधानसभा के आम चुनाव के पश्चात किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हो, चुनाव के पश्चात कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में न हो, मंत्री परिषद अल्पमत में हो, मुख्यमंत्री की पद के दौरान मृत्यु हो गई हो तथा उसके किसी भी सुनिश्चित उत्तराधिकारी का चयन नहीं हो पा रहा हो, मुख्यमंत्री के विरुद्ध मुकदमा दायर करने की अनुमति प्रदान करना।
Note- संविधान के द्वारा स्वविवेकी शक्तियाँ राष्ट्रपति को नहीं अपितु राज्यपाल को प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री की नियुक्ति
- मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल के द्वारा की जाती है
- अन्य मंत्रियो की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री के परामर्श से करेगा।
Note- राज्यपाल के द्वारा विधानसभा में बहुमत दल के नेता की नियुक्ति मुख्यमंत्री के रूप में की जाती है|
- यदि किसी भी दल को विधानसभा में स्पष्ट बहुमत प्राप्त नही है तो राज्यपाल अपने विवेक का प्रयोग करते हुए सबसे बड़े दल के नेता को मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त कर उसके बहुमत सिद्ध करने का अवसर प्रदान कर सकता है। जिन राज्यों में विधानपरिषद विद्यमान है वहाँ पर मुख्यमंत्री की नियुक्ति विधानपरिषद से भी की जा सकती है परन्तु उसके दल को विधानसभा में बहुमत होना चाहिए।
मंत्रिपरिषद का आकार या संख्या
- 91 संविधान संशोधन अधिनियम 2003 के माध्यम से राज्यों में मंत्रिपरिषद के आकार को सीमित किया गया है|
- इस संशोधन द्वारा यह निर्धारित किया गया कि “मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का 15% से अधिक नहीं होगी एवं न्यूनतम संख्या 12 होगी।”
- राजस्थान में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की अधिकतम संख्या 30 हो सकती है एवं मुख्यमंत्री को छोड़कर 29 हो सकती है।
शपथ
- राज्य के राज्यपाल के द्वारा मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद को पद व गोपनीयता की शपथ प्रदान की जाएगी।
- पद व गोपनीयता की शपथ के बाद ही मंत्रिपरिषद कार्य कर सकती है|
वेतन और भत्ते
- इनके वेतन और भत्ते राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित होते हैं तथा मुख्यमंत्री एवं प्रत्येक सदस्य को व्यय संबंधी भत्ते, नि:शुल्क आवास, यात्रा भत्ता और चिकित्सा सुविधाएँ मिलती हैं।
मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद का कार्यालय
- इनका कार्यकाल सामान्यत: 05 वर्ष तक होता है|
- हालांकि इनका कार्यकाल विधानसभा के बहुमत रहने तक ही होता है।
योग्यता
- कोई भी व्यक्ति बिना विधानमडंल का सदस्य रहे छ: माह तक मंत्री पद को धारण कर सकता है|
- हालंकि छ: माह के भीतर उसे विधानमडंल की सदस्यता को ग्रहण करना होगा अन्यथा उसका मंत्री पद समाप्त हो जाएगा।
मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद का उत्तरदायित्व
- राज्य की मंत्रिपरिषद का प्रधान मुख्यमंत्री होता है। मंत्रिपरिषद का विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।
व्यक्तिगत उत्तरदायित्व
- राज्यपाल के प्रति अर्थात सभी मंत्री व्यक्तिगत रूप से राज्यपाल के प्रति उत्तरदयी होते है तथा मंत्री अपना त्यागपत्र राज्यपाल को सम्बोधित करते हैं।
सामूहित उत्तरदायित्व
- मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होगी अर्थात यदि मंत्रिपरिषद के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है तो समस्त मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होगा।
मुख्यमंत्री की शक्तियाँ
मंत्रिपरिषद के संबंध में
- मुख्यमंत्री के द्वारा ही मंत्रिपरिषद का गठन किया जाता है, मंत्रियों में विभागों का वितरण तथा उनमें फेरबदल किया जाता है।
- मुख्यमंत्री के द्वारा मंत्रिपरिषद की कार्यसूची का निर्धारण किया जाता है।
- मुख्यमंत्री के द्वारा मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता की जाती है
- यदि मुख्यमंत्री अपने पद से त्यागपत्र दे देता है अथवा मुख्यमंत्री की पद के दौरान मृत्यु हो जाती है एवं उसके किसी भी सुनिश्चित उत्तराधिकारी का चयन नहीं हो पाता है, तो समस्त मंत्रिपरिषद का अन्त हो जाता है।
राज्यपाल के सम्बन्ध में
- मुख्यमंत्री राज्यपाल तथा मंत्रिपरिषद के बीच मध्यस्थ की भूमिका का निर्वहन करता है|
- राज्यपाल के द्वारा सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियां मुख्यमंत्री के परामर्श से ही की जाती है।
- अनुच्छेद 167 के अन्तर्गत मुख्यमंत्री का यह दायित्व निर्धारित किया गया है कि वह राज्यपाल को समस्त प्रशासन सम्बन्धी सूचनाएं उपलब्ध करवाएं।
विधानमडंल के सम्बन्ध में
- मुख्यमंत्री विधानसभा का नेता होता है तथा इस कारण वह राज्यपाल को विधामण्डल से सम्बन्धित विधायी कार्यो जैसे – विधामण्डल के सत्र को आहूत करना उसका सत्रावसान करना विधानसभा को विघटित करना आदि मे परामर्श प्रदान करता है अर्थात उपर्युक्त सभी कार्यों का सम्पादन राज्यपाल मुख्यमंत्री के परामर्श से करता है।
अन्य शक्तियाँ
- मुख्यमंत्री राज्य योजना बोर्ड तथा मुख्यमंत्री सलाहकार परिषद का अध्यक्ष होता है
- केन्द्र के नीति आयोग व अन्तर्राज्यीय परिषद का सदस्य होता है अर्थात इनमें वह राज्य की ओर से प्रतिनिधित्व करता है।
- मुख्यमंत्री के द्वारा ही राज्य में सभी महत्वपूर्ण सरकारी नीतियों की उद्घोषणा की जाती है तथा मुख्यमंत्री संसदीय सचिव की नियुक्ति कर उसे शपथ प्रदान कर सकता है।
मुख्यमंत्री संबधित अनुच्छेद -
- 163 – राज्यपाल को सलाह एवं सहायता देने के लिए मंत्रिपरिषद।
- 164 – मंत्रियों के बारे में उपबंध
- 167 – राज्यपाल को जानकारी देने के संबध में मुख्यमंत्री के कर्त्तव्य
- वर्तमान में श्री अशोक गहलोत क्रमवार 25 वें मुख्यमंत्री है तथा वैयक्तिक रूप में 13 वें
राजस्थान के मुख्यमंत्री – एक नजर में
1. हीरालाल शास्त्री (जयपुर) | 7 अप्रैल 1949 – 5 जनवरी 1951 | राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री |
2. सी.एस. वेंकटाचारी | 6 जनवरी 1951 – 25 अप्रैल 1951 | केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त |
3. जयनारायण व्यास (जोधपुर) | 1951-1952 | नियुक्त |
टीकाराम पालीवाल (दौसा) | 1952-1952 | प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री |
जयनारायण व्यास | 1952-1954 | मनोनीत एवं निर्वाचित |
मोहनलाल सुखाड़िया (उदयपुर) | 1954-1957 | 4 बार मुख्यमंत्री एवं सर्वाधिक अवधि तक मुख्यमंत्री रहे। |
मोहनलाल सुखाड़िया (उदयपुर) | 1957-1962 | |
मोहनलाल सुखाड़िया (उदयपुर) | 1962-1967 | |
मोहनलाल सुखाड़िया (उदयपुर) | 1967-1971 | |
बरकतुल्लाह खां (जोधपुर) | 1971-1973 | भारत-पाक युद्ध (1971), कार्यकाल के दौरान ही मृत्यु |
हरिदेव जोशी (बाँसवाडा) | 1973-1977 | आपातकाल लागू हुआ। |
भैरोसिंह शेखावत (सीकर) | 1977-1980 | पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री |
जगन्नाथ पहाड़िया (भरतपुर) | 1980-1981 | पहले अनुसूचित जाति के मुख्यमंत्री |
शिवचरण माथुर | 1981-1985 | ? |
हीरालाल देवपुरा | 1985-1985 | सबसे कम अवधि (16 दिन) के मुख्यमंत्री |
हरिदेव जोशी | 1985-1988 | दूसरी बार मुख्यमंत्री |
शिवचरण माथुर | 1988-1989 | दूसरी बार मुख्यमंत्री |
हरिदेव जोशी | 1989-1990 | तीसरी बार मुख्यमंत्री |
भैरोसिंह शेखावत | 1990-1992 | दूसरी बार मुख्यमंत्री |
भैरोसिंह शेखावत | 1993-1998 | तीसरी बार मुख्यमंत्री |
अशोक गहलोत (जोधपुर) | 1998-2003 | ? |
वसुंधरा राजे सिंधिया (झालरापाटन) | 2003-2008 | पहली महिला मुख्यमंत्री |
अशोक गहलोत (जोधपुर) | 2008-2013 | दूसरी बार मुख्यमंत्री |
वसुंधरा राजे सिंधिया | 2013-2018 | दूसरी बार मुख्यमंत्री |
अशोक गहलोत | 17-12-2018 | तीसरी बार मुख्यमंत्री |
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री
क्र.सं. | उपमुख्यमंत्री का नाम | पार्टी | कार्यकाल | तत्कालीन मुख्यमंत्री |
1 | टीकाराम पालीवाल | कांग्रेस | 01 नवम्बर 1952 – 13 नवम्बर 1954 | जयनारायण व्यास |
2 | हरिशंकर भाभड़ा | भाजपा | 1993-1998 | भैरोसिंह शेखावत |
3 | बनवारी लाल बैरवा | कांग्रेस | 2002-2003 | अशोक गहलोत |
4 | कमला बेनीवाल | कांग्रेस | 2003-2003 | अशोक गहलोत |
5 | सचिन पायलट | कांग्रेस | 17-12-20018 से | अशोक गहलोत |
महत्वपूर्ण तथ्य
- वर्तमान राजस्थान सरकार की मंत्रिपरिषद में ममता भूपेश एकमात्र महिला मंत्री हैं।
- मोहनलाल सुखाड़िया के कार्यकाल 1967 में त्रिशंकु विधानमण्डल आने के कारण राज्य में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया –
- पाँचवी विधानसभा की अवधि (आपातकाल के कारण) 5 वर्ष से अधिक बढ़ायी गयी एकमात्र विधानसभा थी जिसकी अवधि 5 वर्ष से अधिक थी –
- मोहनलाल सुखाड़िया 4 बार मुख्यमंत्री (सर्वाधिक बार एवं सर्वाधिक लम्बा कार्यकाल) रहे।
- बरखतुल्लाह खाँ राज्य के पहले एवं एकमात्र अल्पसंख्यक वर्ग के मुख्यमंत्री बने। जिनका कार्यकाल के दौरान निधन हो गया।
- भैरोसिंह शेखावत राज्य के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने (22 June 1977)
- हीरालाल देवपुरा सबसे कम अवधि के मुख्यमंत्री बने।
- श्रीमती वसुन्धरा राजे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री (2003) बनी।
शासन सचिवालय
प्रष्टभूमि
- राज्य सरकार प्रशासन की सुविधा के खयाल से विभिन्न मंत्रालयों व विभागों में बंटा हुआ है अर्थात सरकार के सभी मंत्रालयों एवं विभागों को सम्मिलित रूप से केंद्रीय सचिवालय कहा जाता है। यही कारण है की प्रत्येक राज्य में नीतियों के निर्माण तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सचिवालय का प्रावधान किया जाता है।
गठन
- सचिवालय का गठन अनेक विभागों से मिलकर होता है तथा प्रत्येक विभाग के दो प्रकार के नेतृत्व होते है।
(1) राजनीतिक नेतृत्व- उस विभाग के मंत्री के द्वारा किया जाता है।
(2) प्रशासनिक नेतृत्व- उस विभाग के सचिव के द्वारा किया जाता है जो कि भारतीय प्रशासनिक सेवा का (I.A.S.) पदाधिकारी होता है।
- सम्पूर्ण शासन सचिवालय का राजनीतिक नेतृत्व मुख्यमंत्री तथा प्रशासनिक नेतृत्व मुख्य सचिव के द्वारा किया जाता है।
कार्य
(1) नीतियो का निर्माण तथा उनका क्रियान्वयन करना।
(2) सूचनाओ का संग्रहण करना।
(3) बजट का निर्माण करना।
(4) सार्वजनिक वित्त पर नियंत्रण रखना।
(5) विभिन्न विभागों के समन्वय।
(6) केन्द्र तथा राज्यों के मध्य सम्पर्क बनाए रखना।
(7) सामान्य प्रशासन करना।
मुख्य सचिव
प्रष्टभू मि
- मुख्य सचिव का पद मूलतया ब्रिटिश शासनकालीन केंद्र सरकार की देन है। वर्ष 1799 में तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड वेलेजली ने इस पद का सृजन किया था। इस पद पर पहली बार जी.एस. बालों बैठे थे। समयांतराल पर स्वतंत्रता प्राप्ति से कई वर्ष पहले ही यह पद केंद्र सरकार से लुप्त होकर राज्य सरकार का पद बन गया था।
राजस्थान में शा सन सचिवालय व मुख्य सचिव
- राजस्थान में 13 अप्रेल 1949 को जयपुर में शासन सचिवालय का गठन किया गया तथा के. राधाकृष्णन राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिव बने।
- मुख्य सचिव राज्य सचिवालय का शासकीय प्रधान होता है। वह राज्य प्रशासन का प्रशासनिक प्रमुख होता है तथा राज्य के प्रशासनिक पदानुक्रम में उसका सर्वोच्च स्थान है।
नियुक्ति
- मुख्य सचिव की नियुक्ति मुख्यमंत्री के द्वारा की जाती है तथा मुख्यमंत्री सामान्यत: सचिवालय के सबसे वरिष्ठ सचिव को मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त करता है।
कार्यकाल
- मुख्य सचिव का कोई सुनिश्चित कार्यकाल नहीं होता है तथा इसका कार्यकाल मुख्यमंत्री के साथ सम्बन्धों पर निर्भर होता है।
कार्य
- मुख्य सचिव का सचिवालय भवन, मंत्री से संबद्ध स्टाफ, केंद्रीय अभिलेखागार, सचिवालय के पुस्तकालय, सचिवालय के विभागों की संरक्षा और निगरानी कार्य से जुड़े स्टाफ पर प्रशासनिक नियंत्रण रहता है।
- मुख्य सचिव अपनी सरकार, केंद्र सरकार और अन्य राज्य सरकारों के मध्य संपर्क और संवाद का मुख्य माध्यम होता है।
- वह कानून और व्यवस्था तथा नियोजन से जुड़े प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- वह केंद्रीय कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में होने वाले मुख्य सचिवों के वार्षिक सम्मेलन में भाग लेता है।
- वह राज्य सरकार के प्रवक्ता का कार्य भी करता है ।
- वह राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने और केंद्र की ओर से राज्यपाल के सलाहकार का पद संभालता है।
- वह राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठकों में भी शामिल होता है।
- वह राज्य सरकार के मुख्य जन संपर्क अधिकारी का कार्य भी देखता है।
- मुख्य सचिव क्षेत्रीय परिषद में अपनी बारी के आधार पर सचिव के रूप में कार्य करता है। क्षेत्रीय परिषद में कुछ राज्य शामिल होते हैं प्रत्येक राज्य को परिषद का सदस्य माना जाता है । प्रत्येक राज्य का मुख्य सचिव बारी-बारी से परिषद के सचिव का कार्य देखता है।
- मुख्य सचिव पूरे राज्य सचिवालय को नियंत्रित तथा उसका कुशलतापूर्वक पर्यवेक्षण करता है।
राज्य का महाधिवक्ता
- अनु.165 में राज्य में महाधिवक्ता का प्रावधान किया गया है वह राज्य का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी होता है तथा भारत के महान्यायवादी का अनुपूरक होता है।
नियु क्त
- राज्य के महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है|
यो ग्यता
राज्य का महाधिवक्ता के लिए निम्नलिखित योग्यताएँ होनी चाहिए –
1. उन्हें भारत का नागरिक होना चाहिए।
2. उच्च न्यायालय में 10 साल तक वकालात का अनुभव पूरा होना चाहिए।
वेतन-भत्ते
- संविधान में महाधिवक्ता का कार्यकाल वेतन, भत्तों का उल्लेख नहीं है इनका निर्धारण राज्यपाल द्वारा किया जाता है।
कार्यकाल
- राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त कार्य करते हैं| इसके संदर्भ में उल्लेख नहीं है|
त्याग पत्र
- महाधिवक्ता स्वयं का त्याग पत्र राज्यपाल को देकर भी पद मुक्त हो सकता है।
महा धिवक्ता के कार्य
- महाधिवक्ता राज्य को विधि संबंधी सलाह देता है जो राष्ट्रपति द्वारा सौपें गये हों।
- विधिक स्वरूप में ऐसे कर्त्तव्यों का पालन करता है जिसको राज्यपाल द्वारा सौपें गये हों।
- Note- महाधिवक्ता को विधानमण्डल बिना मताधिकार बोलने व भाग लेने का अधिकार है तथा उन्हें वे सभी विशेषाधिकार एवं भत्ते मिलते हैं जो एक विधानमण्डल के किसी सदस्य को मिलते हैं।
- संविधान द्वारा प्रदान किए गए कार्यों का निर्वहन करता है।
प्रमुख तथ्य
- राजस्थान राज्य के पहले महाधिवक्ता जी.सी. कासलीवाल थे।
- महाधिवक्ता कार्यालय की मुख्य पीठ जोधपुर तथा ब्रांच जयपुर में स्थित है।


0 Comments