वन्य जीव व पारिस्थितिकी
वर्ग
- जैव - मंडल
- राष्ट्रीय उद्यान
- अभयारण्य
- जैविक उद्यान
- टाइगर रिजर्व
जैव-मंडल
- भारत में जैविक विविधता के संरक्षण हेतु 18 जीव मंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
- सर्वप्रथम वर्ष 1986 में तमिलनाडु कर्नाटक, केरल में संयुक्त रूप से नीलगिरि क्षेत्र में जीव आरक्षित क्षेत्र स्थापित किया गया।
- नीलगिरि (तमिलनाडु-केरल)
- नंदादेवी (उत्तराखंड) 1986
- नोकरेक (मेघालय) 1988
- सुन्दरवन (पश्चिमी बंगाल)
- मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु)
- ग्रेट निकोबार (अंडमान-निकोबार)
- पंचमढ़ी (मध्यप्रदेश)
- कंचनजंघा (सिक्किम)
- अगस्तमलाई (केरल-तमिलनाडु-कर्नाटक)
- डिब्रू-साइखोवा (असम)
- देहांग-देबांग (अरुणाचल प्रदेश)
- सिमलीपाल (मयूरभंज-ओडिशा)
- काजीरंगा (असम)
- मानस (असम)
- अचनकमार-अमरकंटक (मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़)
- कोल्ड डेजर्ट (हिमाचल प्रदेश) में जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
- शेषाचलम - (आंध्रप्रदेश)
- पन्ना - मध्यप्रदेश
वन एवं वन्यजीव

बाघ-परियोजना
- वर्ष 1969 में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति एवं प्राकृतिक संघटन संरक्षण संघ (IUCN) के 10वें अधिवेशन में यह निर्णय लिया गया, कि बाघों को संपूर्ण सुरक्षा दी जाए।
- भारत ने भी इसके पश्चात इस लुप्त होती प्रजाति की सुरक्षा व उसके संवर्द्धन के लिए 1 अप्रैल, 1973 को जिम कार्बेट (उत्तराखंड) राष्ट्रीय उद्यान में बाघ परियोजना की शुरुआत की। इसके लिए विश्व वन्य जीव कोष (WWF) से सहायता प्राप्त हो रही है।
- जिम कार्बेट (उत्तराखंड) दूधवा (उत्तर प्रदेश)
नामदाफा (अरुणाचल प्रदेश) सरिस्का (राजस्थान)
रणथंभौर (राजस्थान) कान्हा किसली (मध्यप्रदेश)
चद्रप्रभा (उत्तर प्रदेश) नंदनकानन (ओडिशा)
बांदीपुर (कर्नाटक) शिवप्रभा (मिर्जापुर-उत्तर प्रदेश)
पेरियार (केरल) सुन्दरवन (पश्चिम बंगाल)
सिमलीपाल (ओडिशा) बांधवगढ़ (मध्य प्रदेश)
पलामू (झारखंड) नागार्जुन सागर (आन्धप्रदेश)
पाकुई-बामेरी (अरुणाचल प्रदेश) बोरी-सतपुड़ा (मध्यप्रदेश)
भद्रावती (कर्नाटक) पेंच (महाराष्ट्र) - नल्लामलाई श्रेणी में स्थित आन्ध्रप्रदेश का नागार्जुन सागर भारत का सबसे बड़ा एवं बाघ संरक्षण उद्यान है।
- मध्यप्रदेश के वनविहार नेशनल पार्क में सफेद बाघ का संरक्षण किया जा रहा है।
- मध्यप्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों में हर वर्ष नवम्बर माह में मोगली महोत्सव मनाया जाता है जिसका मकसद बच्चों में प्रकृति से सरोकार, स्नेह और अपनत्व की भावना विकसित करना है।
- वर्तमान समय में यह बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान, पेंच टाइगर रिजर्व व पन्ना टाइगर रिजर्व में आयोजित किया गया है।
- प्रोजेक्ट क्रोकोडाइल (Project Crocodile) की शुरुआत वर्ष 1976 में की गई। वर्तमान समय में घड़ियालों के संरक्षण हेतु 11 अभयारण्य की स्थापना की जा चुकी है। मध्य प्रदेश में स्थित राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य सबसे बड़ा अभयारण्य है।
कुछ खास जीव से संबंधित अभयारण्य :
- कच्छ का छोटा रण (गुजरात) - जंगली गधा
- काजीरंगा (असम) - एक सींग वाला गैंडा
- जलदापाड़ा (असम) - एक सींग वाला गैंडा
- दाचीग्राम (जम्मू-कश्मीर) - सफेद भालू
- गिर (गुजरात) - एशियाई सिंह
- वनविहार नेशनल पार्क (मध्यप्रदेश) - सफेद बाघ
- रेगिस्तान राष्ट्रीय पार्क (राजस्थान) - ऊँट
पक्षियों के आश्रय स्थल :
- केवलादेव घाना (भरतपुर) - राजस्थान
- वेदाथांगल - तमिलनाडु
- रंगनाथिटु - कर्नाटक
- सलीम अली - तमिलनाडु
कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय पार्क व अभयारण्य :
- केबुललामजाओ राष्ट्रीय पार्क - मणिपुर
- लाओखोवा वन्य जीव अभयारण्य - असम
- ग्रेट इंडियन बस्टर्ड अभयारण्य - महाराष्ट्र
- सबरीमाला नेशनल पार्क - केरल
- साइलेन्ट वैली नेशनल पार्क - केरल
- घाटप्रभा अभयारण्य - कर्नाटक
- हेमिस हाई अल्टीट्यूड नेशनल पार्क - कश्मीर
- मेरीन नेशनल पार्क - अंडमान निकोबार
- सैंडल पीक नेशनल पार्क - अंडमान
- रॉस आइलैंड राष्ट्रीय उद्यान - रॉस द्वीप अंडमान निकोबार द्वीप
- कोल्लेरु एक्वेयरी - आंध्र प्रदेश
- गौतम बुद्ध वन्य जीव अभयारण्य - गया (बिहार)
अनुसंधान केन्द्र
- पारिस्थितिकी से संबंधित अनेक अनुसंधान केन्द्र भी स्थापित किए गए हैं। इनमें निम्न प्रमुख हैं :-
- इंदिरा गाँधी फॉरेस्ट अकादमी, देहरादून।
- सेन्ट्रल एरिड जोन रिसर्च इंस्टीट्यूट, जोधपुर।
- इंडियन फॉरेस्ट मैनेजमेंट, भोपाल।
- राष्ट्रीय पतझड़ वन अनुसंधान केन्द्र, जबलपुर।
- वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेन्टर, बेंगलुरु।
- फॉरेस्ट जेनेटिक सेन्टर, कोयंबटूर।
राष्ट्रीय पार्क
(वन्य जीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत गठित)
- काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान - असम - एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध, उदबिलाव
- मानस राष्ट्रीय उद्यान - असम - सुनहरा लंगूर व बाघ, उदबिलाव, लाल पांडा
- दूधवा राष्ट्रीय उद्यान - उत्तरप्रदेश
- राजाजी राष्ट्रीय उद्यान - उत्तराखण्ड
- भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान - ओडिशा (लवणीय मगरमच्छ)
- बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान - कर्नाटक
- बन्नरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान - कर्नाटक
- नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान - कर्नाटक
- साइलैंट वैली राष्ट्रीय उद्यान - केरल
- पेरियार राष्ट्रीय उद्यान - केरल
- गिर राष्ट्रीय उद्यान - गुजरात (एशियाई शेर)
- मेरीन राष्ट्रीय उद्यान - गुजरात (जंगली गधा)
- भगवान महावीर राष्ट्रीय उद्यान - गोवा
- दाचीग्राम राष्ट्रीय उद्यान - जम्मू-कश्मीर
- किश्तवार राष्ट्रीय उद्यान - जम्मू-कश्मीर
- मेरीन राष्ट्रीय उद्यान -तमिलनाडु
- गुइंडी राष्ट्रीय उद्यान - तमिलनाडु
- सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान - पश्चिमी बंगाल
- कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान - मध्यप्रदेश (गौर)
- बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान - मध्यप्रदेश
- पन्ना राष्ट्रीय उद्यान - मध्यप्रदेश
- वन विहार राष्ट्रीय उद्यान - मध्यप्रदेश
- संजय राष्ट्रीय उद्यान - मध्यप्रदेश
- संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान - महाराष्ट्र
- केबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान - मणिपुर
- ब्लू माउंटेन राष्ट्रीय उद्यान - मिजोरम
- नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान - मेघालय
- रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान - राजस्थान
- सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान - राजस्थान
- जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान - उत्तराखण्ड
- फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान - उत्तराखण्ड
- नंदादेवी राष्ट्रीय उद्यान - उत्तराखण्ड-हिम तेंदुआ
- नार्थ बटन व साउथ बटन राष्ट्रीय उद्यान-अण्डमान एण्ड निकोबार
- माउण्ट हेरियट राष्ट्रीय उद्यान - अण्डमान एण्ड निकोबार
- मेरीन राष्ट्रीय उद्यान - अण्डमान एण्ड निकोबार
- नामदफा अभयारण्य (अरुणाचल प्रदेश) - हुलॉक गिबन व लाल पांडा
- मुंडन थराई अभयारण्य (तमिलनाडु) - शेर जैसी पूँछ वाला बंदर
- इंद्रावती राष्ट्रीय पार्क - छत्तीसगढ़ - गौर
- पिरोटन अभयारण्य - कच्छ की खाड़ी (गुजरात) - ऑक्टोपस व पपर फिस।
नोट -
- सबसे पहले वन नीति 1894 ई. में अंग्रेजी सरकार द्वारा बनाई गई है।
- आजादी के बाद पहली बार सन् 1952 में नई वन नीति बनाई गई।
- बाघ परियोजना वर्ष 1972 में प्रारम्भ की गई।
- हाथी परियोजना वर्ष 1991-92 में प्रारम्भ की गई।
- लाल पाण्डा परियोजना वर्ष 1996 में प्रारम्भ की गई।
आर्द्रभूमियाँ या जलग्रस्त भूमि (Wet lands)
- जलग्रस्त भूमि वैसे दलदली या पानीवाले क्षेत्र हैं जहाँ सालोंभर या साल के एक हिस्से में प्राकृतिक या कृत्रिम रूप से शांत या बहता हुआ, मीठा या खारा पानी वाला, समुद्री या गैर-समुद्री ऐसा जलजमाव क्षेत्र हो जिसकी गहराई 6 मी. से अधिक नहीं हो।
- अधिकांश जलग्रस्त भूमि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गंगा, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा कावेरी, ताप्ती, गोदावरी आदि जैसी बड़ी नदियों से जुड़ी हुई है।
- 1971 ई. में जलग्रस्त भूमि के संरक्षण के लिए बहु-उद्देशीय समझौता हुआ था जिसे रामसर सम्मेलन (ईरान) के नाम से जाना जाता है।
- भारत इसमें 1982 ई. में शामिल हुआ एवं पर्यावरण व वन मंत्रालय द्वारा इनके संरक्षण हेतु 1987 ई. से एक कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
रामसर आर्द्रभूमि क्षेत्र (भारत में)
- Tsomorari – J & K – 120 वर्ग किमी.
- Nokrsar – J & K – 13.75 वर्ग किमी.
- Surinsar Mansar Lake – J & K – 3.5 वर्ग किमी.
- Wular Lake – J & K – 189 वर्ग किमी.
- चंद्रताल - H.P. – 0.49 वर्ग किमी.
- पोंग बांध झील - H.P. – 156.62 वर्ग किमी.
- रेनुका झील - H.P. – 0.20 वर्ग किमी.
- रोपड़ - पंजाब - 13.65 वर्ग किमी.
- कंजली - पंजाब - 1.83 वर्ग किमी.
- हरिके - पंजाब - 41 वर्ग किमी.
- अपर गंगा नदी - U.P. - 265.9 वर्ग किमी.
- केवलादेव राष्ट्रीय पार्क - राजस्थान - 28.73 वर्ग किमी 1.10.81 को घोषित
- सांभर झील - राजस्थान - 240 वर्ग किमी.
- भोज - मध्यप्रदेश - 32 वर्ग किमी.
- भीतरकणिका - उड़ीसा - 650 वर्ग किमी.
- चिल्का झील - उड़ीसा - 1165 वर्ग किमी.-1.10.81 को घोषित
- पूर्वी कोलकाता - P.B. – 125 वर्ग किमी.
- Deepor Beel – Assam – 40 वर्ग किमी.
- अस्तमुड़ी - केरल - 614 वर्ग किमी.
- Sasthamkotta Lake – केरल - 3.73 वर्ग किमी.
- Vembnad Kol Lake – केरल - 1512.5 वर्ग किमी.
- नालसरोवर पक्षी अभ्यारण्य - गुजरात - 123 वर्ग किमी.
- लोकटक झील - मणिपुर - 266 वर्ग किमी.
- रूद्रसागर झील - त्रिपुरा - 2.4 वर्ग किमी.
- कोल्लेरू झील - आंध्रप्रदेश - 901 वर्ग किमी.
- पोइंट केलीमेर - तमिलनाडु - 385 वर्ग किमी.
कच्छ वनस्पतियाँ या मैंग्रोव (Mangrove)
- ये उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय प्रदेशों की समुद्र तटवर्ती पश्चजलों (Backwaters), मुहानों, क्षारीय दलदलों व दलदली मैदानों की विशिष्ट पारिस्थितिकी वाले क्षार-सह्य वानिकी क्षेत्र हैं।
- राष्ट्रीय पर्यावरण नीति 2006 कच्छ (मैंग्रोव) वनस्पतियों और प्रवाल भित्तियों को महत्वपूर्ण तटीय पर्यावरण संसाधन मानता है।
- उत्तरी अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, सुन्दरवन (प. बंगाल), भीतर-कणिका, धमरा (उड़ीसा), कोरिंगा, गोदावरी डेल्टा, कृष्णा का मुहाना (आंधप्रदेश) महानदी डेल्टा (उड़ीसा), पिछावरम व कैलीमर प्वाइंट, काजूवेली, रामनद (तमिलनाडु), गोवा, कच्छ की खाड़ी (गुजरात), कुन्दापुर (कर्नाटक), अचरा रत्नगिरि, विव्ररौली, कुंडालिका रडाना, मालवन, श्रीवर्धन (महाराष्ट्र) और बेम्बानद (केरल) इनमें प्रमुख हैं।
- दो कच्छ वनस्पतियां भारत में लुप्त होने के कगार पर हैं। इनमें से एक है तमिलनाडु के पिछावरम में पाई जाने वाली राइजोफोरा अन्नामलाय और दूसरी है उड़ीसा के भीतर-कणिका में पाई जाने वाली हेरीटेरिया कनिकेंसिस।
- यूनेस्को के जीवमंडलीय के आरक्षित क्षेत्रों की विश्व सूची में पश्चिम बंगाल के सुन्दरवन को शामिल किया गया है।
- यह देश का सबसे बड़ा कच्छ (मैंग्रोव) वनस्पति क्षेत्र है।


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