राजस्थान का साहित्य


राजस्थान का साहित्य

  • रासो – राजाओं की प्रशंसा में लिखित ऐतिहासिक ग्रंथ
  • ख्यात – यह प्रश्नीय रचना होती है जिसमें विस्तृत इतिहास का वर्णन।
  • वात – संक्षिप्त इतिहास का वर्णन
  • प्रका श – किसी शासक विशेष अथवा राजवंश विशेष पर लिखित रचना।
  • द्ववावैत – अरबी व फारसी शब्दों के संग्रहण से लिखित रचना।
  • मरस्या – मृत्यु जानकारी से संबंधित रचना।
  • वचनिका – किसी शासक के युद्ध उपलब्धियों का वर्णन

राजस्थान साहित्य      

प्राचीन साहित्य    मध्यकालीन साहित्य आधुनिक साहित्य
13वीं से 16वीं सदी तक साहित्य16वीं से 18वीं सदी तक साहित्य18वीं सदी से वर्तमान
वीरगाथाओं का साहित्यसाहित्यकारों का कालइतिहासकारों का काल

प्राचीन साहित्य/वीरगाथा काल

  • राजस्थानी भाषा की प्रथम रचना – भारतेश्वर बाहुबली – ब्रजसेन सूरी (12वीं सदी)
  • राजस्थानी भाषा की प्रथम कहानी – विश्रांत प्रवास – शिवचन्द्र भारतीय
  • राजस्थानी भाषा का प्रथम नाटक – केसर विलास – शिवचन्द्र भारतीय
  • राजस्थानी भाषा का प्रथम उपन्यास – कनक सुंदरी – शिवचन्द्र भारतीय
  • राजस्थानी का प्रथम बारहमासा ग्रंथ – नेमीनाथ बारहमासा– पाल्हण
  • आधुनिक राजस्थान की काव्यकृति – बादली – चन्द्रसिंह बिरकाली  

पृथ्वीराज रासो

  • रचियता – चन्दबरदाई
  • यह ग्रंथ 69 सर्गो/अध्याय
  • शृंगार रस (डिंगल) / वीर रस [पिंगल]     
  • डिंगल व पिंगल साहित्य का मिश्रित ग्रंथ।
  • 12वीं सदी में लिखित।
  • वर्तमान उदयपुर पुस्तकालय में संग्रहित हैं।

   

  •  इस ग्रंथ में पृथ्वीराज III के इतिहास का वर्णन है। 
  • इस ग्रंथ के अनुसार राजपुतों/चौहानों  की उत्पत्ति अग्निकुण्ड सिद्धान्त से हुई।
  • पृथ्वीराज विजय – जयनायक भट्ट 
  • पृथ्वीराज III के युद्धों एव विजयों का वर्णन है।
  • बीसलदेव रासो – नरपति नाल्ह  
  • इस ग्रंथ में बीसलदेव व राजमति के प्रेम- प्रसंग का वर्णन है।
  • ललित विग्रहराज – सोमदेव  
  • इन्दुमति व विग्रहराज-चतुर्थ/बीसलदेव के प्रेम-प्रसंग का वर्णन है।
  • मानचित्र रासो – कवि नरोत्तम 
  • इन ग्रंथ के अनुसार हल्दी घाटी युद्ध का प्रमुख कारण प्रताप द्वारा जालोर पर आक्रमण करना था।
  • सुजाणसिंह रासो – जोगीदास  
  • बीकानेर शासक सुजानसिंह का इतिहास उल्लेखित
  • छत्रपति रासो – काशी छंगाणी
  • इस ग्रंथ में नागौर शासक अमरसिंह राठौड़ एवं बीकानेर शासक कर्णसिंह के मध्य 1644 ई. के “मतीरे की राड़” का वर्णन है। 

कयाम रासो:-

  • अन्य नाम क्याम खाँ/निय़ामत खाँ/ कविजान ,
  • निवास फतेहपुर (सीकर) 
  • इस ग्रंथ में चौहानों को वत्स गौत्रीय ब्राह्मण बताया गया।
  • नोट:- बिजौलिया शिलालेख में भी चौहानों को वत्स गोत्रीय ब्राह्मण कहा गया है।
  • इस ग्रंथ में गोगाजी के वंशज कर्मसिंह का फिरोजशाह तुगलक के काल में धर्म-परिवर्तन का उल्लेख है।

खुम्माण रासो-

  • दलपत विजय।
  • इस ग्रंथ में बप्पा रावल से लगाकर राजसिंह तक का इतिहास वर्णित है।
  • नोट:- चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर प्रथम विदेशी आक्रमण मामु का हुआ था।

विजयपाल रासो –

  • नल्लसिंह
  • इस ग्रंथ में करोली शासक विजयपाल सिंह का इतिहास वर्णित है।

प्रताप रासो-

  • जाचक जीवण
  • अलवर शासक प्रतापसिंह का इतिहास वर्णित है।

रणरासो:-

  • दयालदास
  • कर्णसिंह का इतिहास वर्णित

हम्मीर रासो:-

  • रणथंभौर के चौहान शासक हम्मीर देव के इतिहास का वर्णन,
  • जोधराज (18 वीं सदी)
  • सांरगधर (13 वीं सदी)

सगत रासो:-

  • गिरधर आसिया
  • मेवाड़ इतिहास से संबधित
  • मुख्यत: राजसिंह का इतिहास वर्णित है

लछिमनगढ रासो:-

  • खुशाल
  • इस ग्रंथ में अलवर शासक एवं मुगल बादशाह शाहआलम द्वितीय के मध्य युद्ध का वर्णन है।

शत्रुसाल रासो:-

  • डुंगर जी
  • इस ग्रंथ में बूँदी शासक शत्रुसाल का इतिहास वर्णित है।

बिन्हैरासो :-

  • कवि महेश दास
  • इस ग्रंथ में अलवर शासक अर्जुन गौड़ की वीरता का वर्णन है।

जवान रासो:-

  • सीताराम रत्नु
  • इस ग्रंथ में बोराज के खंगारोत एवं मराठों के मध्य 18 वीं सदी के युद्ध का वर्णन है।

रतन रासो:-

  • कुंभकर्ण
  • जोधपुर व जालौर के राठौड़ शासकों का वर्णन है।

अचलदास री वचनिका:-

  • शिवदास गाडण
  • इस ग्रंथ में हौशंहशाह एंव गागरोन शासक अचलदास खिंची के मध्य हुए युद्ध का वर्णन है।

ढोला मारू रा दोहा:-

  • कवि कल्लोल
  • डिंगल साहित्य का पहला काव्य ग्रंथ है।
  • इस ग्रंथ में भविष्य की गाथाओं का वर्णन है।

मध्यकालीन साहित्य

मुहणौत नैणसी –

  • जन्म- 1610 ई. जोधपुर
  • पिता – जयमल
  • भाई – सुन्दरदास
  • अन्य नाम – नारायण
  • राजस्थान का अबुल फजल की संज्ञा मुंशी देवी प्रसाद द्वारा दी गई।
  • राजस्थान में जनगणना का अग्रज।
  • जसवंतसिंह प्रथम के दरबारी विद्वान।
  • जसवंतसिंह प्रथम द्वारा 1 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाने पर मुहणौत नैणसी ने अपने भाई सुन्दरदास के साथ 1670 ई. में आत्म हत्या कर ली।

नैणसी री ख्यात –

  • लेखक – मुहणौत नैणसी
  • इस ग्रंथ की तुलना बाबरनामा से की जाती है।
  • डिंगल भाषा में लिखित है।
  • मुरारीदान ने इस ख्यात को प्रसिद्ध किया।
  • कुल – 1000 पृष्ठ
  • जोधपुर, पाली, सिरोही, उदयपुर, बीकानेर, इत्यादि राज्यों का इतिहास वर्णित है।
  • इस ख्यात के संदर्भ में डॉ. कानुनगो ने कहा- “इस ख्यात का महत्व केवल राजनैतिक नहीं होकर सामाजिक व आर्थिक भी है।”

मारवाड़ परगना री विगत

  • मुहणौत नैणसी
  • इस ग्रंथ की तुलना आइने अकबरी से की जाती है।
  • इस ग्रंथ को राजस्थान का गजेटियर/जेवर कहा जाता है।
  • इस ग्रंथ में सर्वप्रथम मारवाड़ परगनों की जनगणना के आंकड़े प्रस्तुत किए गए।

पृथ्वीराज राठौड़ –

  • बीकानेर शासक कल्याणमल के पुत्र
  • अकबर ने पृथ्वीराज राठौड़ को गागरोन (झालावाड़) की जागीर प्रदान की।
  • गागरोन जागीर में “वेली किशन रुकमणी री” ग्रंथ की रचना।
  • इस ग्रंथ में भगवान श्रीकृष्ण व रूकमणी के विवाह का वर्णन।
  • इस ग्रंथ को दुरसा भाटा ने 5 वाँ वेद व 19 वाँ पुराण कहा है।

मध्यकालीन साहित्य

  • पृथ्वीराज राठौड़ द्वारा रचित प्रमुख ग्रन्थ गंगलहरी- गंगा मैया को समर्पित 80 दौहो का सग्रंहण है।
  • L.P. टैस्सीटोरी ने पृथ्वीराज राठौड़ को डिंगल भाषा का हेरोस कहा ।
  • पृथ्वीराज राठौड़ पीथल नाम से काव्य रचना करते थे।
  • पाथल-पीथल की रचना कन्हैयालाल सेठिया द्वारा रचित है।
  • इस रचना में पाथल महाराणा प्रताप तथा पीथल पृथ्वीराज राठौड़ को कहा गया है।
  • पृथ्वीराज राठौड़ अपना आराध्य देव महाराणा प्रताप को मानते थे।

दुरसा आढ़ा

  • जन्म स्थान- सांचौर (जालोर)
  • अकबर के दरबारी विद्वान
  • दूरसा आढ़ा ने अपने ग्रन्थों में महाराणा प्रताप व चन्द्रसेन की शौर्य गाथा का वर्णन किया है।
  • इनके द्वारा रचित प्रमुख ग्रन्थ-
  • विरुद्ध छतरी- इस ग्रन्थ में राणा प्रताप के शौर्य का वर्णन है।
  • किरवार बावनी- इस ग्रन्थ में तत्कालीन सामाजिक व आर्थिक कार्यो का वर्णन है।
  • अकबर के दरबार में रहते हुए इन्होंने प्रताप व चन्द्रसेन की।

कृपाराम खिड़िया-

  • इनका मूलनाम- जगराम खिड़िया था।
  • प्रमुख रचना- राजिया रा सोरठा
  • अन्य रचना- चालकनेची

पद्मनाभ

  • इनकी प्रमुख रचना कान्हड़दे प्रंबंध है।
  • यह जालोर शासक अखैराज के दरबारी विद्वान थे।

पद्मावत मलिक मोहम्मद जायसी-

  • इनके ग्रन्थ के अनुसार अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण रानी पद्मनी को पाने के लिए किया था।

बांकीदास आशिया

  • जन्म स्थान- भाण्डावास गाँव बाड़मेर
  • यह जोधपुर के शासक मानसिंह के दरबारी विद्वान  व काव्य गुरू थे।
  • इनकी प्रमुख रचनाएँ- सूर छत्तीसी, सीह बत्तीसी, दातार बावनी, बांकीदास री बाताँ, बांकीदास री ख्यात।

वीरभाण रत्नु

  • जन्म स्थान- घड़ोई गाँव
  • ग्रन्थ- राजरूपक
  • इस ग्रन्थ में जोधपुर शासक अभयसिंह एवं गुजरात के बुलंद खाँ के मध्य युद्ध का वर्णन है।
  • इस युद्ध में अभयसिंह विजयी हुआ।

करणीदान कविया

  • प्रमुख ग्रन्थ- सुरज प्रकाश

ईसरदास

  • जन्म स्थान- बाड़मेर
  • इनकी प्रमुख रचना- हरिदास, हाला-जाला री कुण्डलिया

नागरीदास

  • इनका मूलनाम- सावंतसिंह था।
  • प्रमुख रचना- नागर समुच्च
  • बणी-ठणी इनकी प्रेमिका थी।

महेश दधावड़िया

  • जन्म स्थल- मेड़ता (नागौर)
  • इनकी प्रमुख रचना- रामरासो

आसिया मोडजी

  • इनका प्रमुख ग्रन्थ- पाबु प्रकाश पाबू।
  • इस ग्रन्थ में पाबू जी का अन्य नाम पाल पौरासस बताया गया है।

कवि मुरारीदान

  • यह सूर्यमल्ल मिश्रण के पुत्र थे।
  • इन्होंने अपने पिता द्वारा रचित वंश भ्रास्कर की रचना पूर्ण की।
  • इनके द्वारा यशवंत यशोभूषण ग्रन्थ की रचना की गई।

केशवदास गाडण

  • इनकी प्रमुख रचना- गजरुपक

अन्य मध्यकालीन साहित्य

  • साहित्य             साहित्यकार
  • हम्मीर हठ          चन्द्रशेखर
  • हम्मीर महाकाव्य  नयन चन्द्र सूरी
  • हम्मीर प्रंबंध        कैलाश अमृत

दयालदास री ख्यात- दयालदास

  • दयालदास बीकानेर शासक रतनसिंह का दरबारी विद्वान था।
  • दयालदास री ख्यात को बीकानेर राठौडों की ख्यात कहते है।

आधुनिक साहित्य

 विजयदान देथा

  • जन्म- 1926 बोरुन्दा जोधपुर में
  • उपनाम- राजस्थान का शेक्सपियर
  • इनके द्वारा रचित प्रमुख रचनाएँ- बाताँ री कुलवारी, टिडोराव, रूँख, अलेखू हिटलर
  • विजयदान देथा को वर्ष 2004 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 2002 में बिहारी पुरस्कार से सम्मानित।
  • वर्ष 2011 में राव सीहा अवार्ड से सम्मानित।
  • वर्ष 2012 में राजस्थान रत्न से सम्मानित गया।
  • रुपायन संस्थान बोरुन्दा जोधपुर के सह संथापक थे।
  • इस संस्थान की स्थापना 1960 में कोमल कोठारी द्वारा की गई थी।
  • इस संस्थान द्वारा मरुचक्र व लोक संस्कृति नामक पत्रिका जारी की जाती है।
  • इस संस्थान का मुख्य कार्य विलुप्त हो रही राजस्थानी कलाओं का संरक्षण करना है।

आधुनिक साहित्य

सूर्यमल्ल मिश्रण/मिसल:-

  • जन्म 1815 ई. हरणा गाँव-बूँदी
  • उपनाम – राज्यकवि, रसावतार
  • आधुनिक राजस्थानी काव्य नवजागरण के पुरोधा कवि।
  • पुत्र- मुरारीदान
  • इनकी प्रमुख रचनाएँ वंश भास्कर
  • बूँदी के हाड़ा राजवंश का वर्णन।
  • यह ग्रंथ चम्पु शैली में है।
  • कुल 25000 पृष्ठों का काव्य है। 19वीं सदी में महाभारत के समान विशाल होने के कारण विश्वकोषीय ऐतिहासिक ग्रंथ कहा जाता है।

नोट:- सूर्यमल्ल मिश्रण बूँदी शासक रामसिंह-I के दरबारी कवि थे।

वीरसतसई:-

  • यह रचना वीर रस की रचना है।
  • समय शिश पल्टी नामक दोहे से रचना की शुरूआत होती है।
  • 1857 ई. की क्रांतिकारियों की घटनाओं का वर्णन।
  • यह अंग्रेजों की दासता के विरुद्ध लिखा गया ग्रंथ।
  • इस ग्रंथ में सूर्यमल्ल मिश्रण के 280 दोहे लिखे हुए हैं।
  • इस ग्रंथ की रचना मुरारीदान ने पूर्ण की थी।
  • नोट:- प्रथम वीर सतसई ग्रंथ हरि वियोगी द्वारा, दूसरा सूर्यमल्ल मिश्रण द्वारा एवं तीसरा वीर सतसई ग्रंथ नाथू/मोद्धमहियारिया द्वारा लिखा गया।
  • छंद मयूख
  • धातु रूपावली,

रामरंजाट- इसमें रामसिंह के शिकार खेलने के दृश्यों का वर्णन है।

बलवंत विलास- इस ग्रंथ में रतलाम (M.P.) के शासक बलवंत सिंह के इतिहास का वर्णन।

कन्हैयालाल सेठिया:-

  • जन्म- 1919 सुजानगढ-चूरू।
  • राजस्थानी भाषा का भिष्मपितामाह कहलाते हैं।
  • नोट- राजस्थान में पत्रकारिता का भीष्म पितामह पं. झाबरमल शर्मा को कहा जाता है। इनकी स्मृति में जयपुर में सन् 2000 में झाबरमल शोध संस्थान की स्थापना की गई।
  • सेठिया जी को कविताओं का जादूगर भी कहा जाता है।
  • सेठिया जी के जीवन की पहली रचना- वनफूल ।
  • पाथल एवं पीथल नाम से काव्य रचनाएँ सेठिया जी करते वनफूल थे।
  • पाथल – महाराण प्रताप, पीथल – पृथ्वीराज राठौड़
  • लीलटांस इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना है।
  • ‘अग्निवाणी’ की रचना के कारण इन पर बीकानेर में राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया था।
  • पुरस्कार- लीलटांस की रचना के कारण 1976 ई. में साहित्य अकादमी पुरस्कार।
  • संबद रचना के कारण इन्हे सूर्यमल्ल मिश्रण पुरस्कार दिया।
  • वर्ष – 2004 में पद्म श्री वर्ष 2012 में मरणोपरान्त राजस्थान रत्न दिया गया।
  • अन्य रचनाएँ- मेरा युग, प्रतिबिम्ब, धरती धोरा री, गिलगिचरिया, रमणियां रा दूहा, ढीठ मींझर, धर कूंचा धर मंझला

मेघराज मुकुल:-

  • जन्म- 1928 ई. में राजगढ़ (चुरू)
  • प्रमुख रचना – सैनाणी (हाड़ी रानी सहल कँवर पर लिखित रचना)

महेन्द्र भानावत:-

  • जन्म- 1937 ई. कानोड़ – उदयपुर
  • राजस्थानी प्रेम कथाओं के कवि।
  • प्रमुख रचनाऐं- अबुझा राज, देवनारायण रो भात, गहरो फूल गुलाब को, काजल भरियों कूंपला, मरवण मांडे माण्डणा।

L.P. टेस्सीटोरी:-

  • इटली के साहित्यकार।
  • 1914 ई. में भारत में सर्वप्रथम मुंबई आए।
  • राजस्थान में सर्वप्रथम 1914 ई. में जयपुर आए।
  • राजस्थान में इनकी कर्मस्थली बीकानेर रही। (शासक गंगासिंह के काल में आए)
  • गंगासिंह ने इन्हे राजस्थानी साहित्य की खोज हेतु नियुक्त किया।
  • बीकानेर संग्रहालय इनकी देन है।

लक्ष्मी कुमार चुण्डावत:-

  • जन्म – 1916 ई. देवगढ़ (राजसमंद)
  • उपनाम- राणीजी।
  • देवनारायण री बगड़ावत महाकथा की रचना के लिए 1984 ई. में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित।
  • 1978 ई. में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आयोजित “निरास्त्रिकरणों” में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त।
  • वर्ष 2012 में राज्य रत्न से सम्मानित।
  • यह राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की माँग करने वाले प्रथम व्यक्तित्व।
  • इनको विधान सभा सदस्य व राज्य सभा सदस्य होने का गौरव प्राप्त।
  • प्रमुख रचनाऐं- मूमल, टाबर री बातां, हुंकारो दो सा, कथनी करनी, राजस्थान री बातां।

नोट- महेन्द्र व मूमल की प्रेमकथा मीनाक्षी स्वामी ने लिखी।

कर्नल जेम्स टॉड:-

  • राजस्थान इतिहास का जनक/पितामह
  • पुस्तक – एनल्स एण्ड एण्टिक्यूटिज ऑफ राजस्थान और द सेन्ट्रल वेस्टर्न स्टेट राजपूताना ऑफ इण्डिया (1829)
  • संपादक- विलियम क्रुक
  • समर्पित- यतिज्ञानचन्द्र
  • घोड़े वाला बाबा कर्नल जेम्स टॉड को कहा जाता है।
  • जन्म 1782 ई. इंगलगिस्टिन प्रान्त- इंग्लैण्ड
  • इनका 1798-99 ई. में सर्वप्रथम भारत आगमन (बंगाल)
  • 1806 राजस्थान आगमन (माण्डल-भीलवाड़ा)
  • यह 1813 कर्नल की उपाधि से सम्मानित।
  • 1817-1818 राजस्था में P.A. के रूप में नियुक्त।
  • 1822 ई. खराब स्वास्थय के कारण वापस इंग्लैण्ड, लौटे तथा 1835 ई. मृत्यु।

कविराजा श्यामलदास-

  • जन्म- भीलवाड़ा
  • मेवाड़ महाराणा सज्जन सिंह के दरबारी विद्वान।
  • श्यामलदास को कविराजा की उपाधि- सज्जनसिंह ने दी।
  • सज्जनसिंह के कहने पर श्यामलदास ने वीर-विनोद ग्रंथ की रचना की।
  • इस रचना के कारण E.I.C द्वारा श्यामलदास को “केसर ए हिन्द”की उपाधि।
  • इस ग्रंथ में मेवाड़ का इतिहास वर्णित है।
  • 1888 ई. में E.I.C द्वारा श्यामलदास को “महामहोपाध्याय” की उपाधि।

राजस्थान साहित्य अकादमी- उदयपुर

  • स्थापना-1958
  • इस संस्थान द्वारा साहित्य क्षेत्र में ‘मीरा पुरस्कार’ दिया जाता है जिसकी शुरुआत 1959-1960 में की गई।
  • इस संस्थान की पहली पत्रिका ‘मधुमती’ नामक पत्रिका है।

रूपायन संस्थान –

  • बोरून्दा-जोधपुर।
  • स्थापना- 1960
  • संस्थापक- कोमल कोठारी, सह संस्थापक- विजयदान देथा
  • पत्रिका- ‘मरूचक्र’ ‘लोकसंस्कृति’।

राजस्थान ज्ञानपीठ अकादमी – बीकानेर

  • इस संस्थान द्वारा ‘गंगा’ नामक पत्रिका जारी की जाती है।

राजस्थान राज्य अभिलेखागार- बीकानेर

  • स्थापना- 1955 जयपुर।
  • 1960 ई. में इसे बीकानेर जिले में स्थानान्तरित किया गया।

पंजाबी भाषा अकादमी- श्रीगंगानगर

मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान- टोंक

  • स्थापना- 1978

राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी

  • बीकानेर, स्थापना – 1983
  • इसमें जागती जोत नामक पत्रिका का प्रकाशन किया जाता है।

राजस्थान में हिंदी ग्रंथ अकादमी- 1969- जयपुर।

राजस्थान उर्दू अकादमी

  • इस संस्थान द्वारा ‘नकलिस्तान’ नामक पत्रिका जारी की है।

राजस्थान सिंधि अकादमी – जयपुर

  • इस संस्थान द्वारा सिंहादुत व रियाणा नामक पत्रिका जारी की जाती है।

राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी- जयपुर

  • ब्रजसतदल नामक पत्रिका जारी की जाती है।
  • राजस्थान भाषा बाल साहित्य प्रकाशन- लक्ष्मणगढ़-सीकर।
  • इसके द्वारा ‘पाणिहारी’ नामक पत्रिका जारी की जाती है।

राजस्थान प्रचारिणी सभा- जयपुर

  • इस संस्थान द्वारा ‘मरुवाणी’ पत्रिका जारी की जाती है।

जैन विश्व भारती-

  • लाडनूं (नागौर), स्थापना – आचार्य तुलसी द्वारा
  • इस संस्थान द्वारा तुलसी व्रत पत्रिका जारी की जाती है।

सरस्वती पुस्तकालय-

  • फतेहपुर(सीकर)

नगर श्री लोक शोध संस्थान-चूरू जगदीश सिंह गहलोत शोध संस्थान- जोधपुर