संसद

संसद


  • भारत की संघीय विधायिका को संसद कहा जाता है जो केन्द्र सरकार का विधायी अंग है तथा यह भारत की सर्वोच्च विधायिका है।
  • संविधान के पाँचवें भाग के अंतर्गत अनुच्छेद 79 से 122 में संसद के गठन, संरचना, अवधि, अधिकारों, प्रक्रियाओं, विशेषाधिकारों व शक्तियों के बारे में वर्णन किया गया है।
  • भारत में द्विसदनात्मक व्यवस्था की स्थापना की गई जिसे संविधान में “संसद” नाम दिया गया जिसके तीन अंग हैं राष्ट्रपति, राज्यसभा, लोकसभा जिसमें राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग होता है।

संसद का गठन –

  • संविधान के अनुच्छेद – 79 के अनुसार संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दोनों सदनों से मिलकर बनेगी जिनके नाम राज्यसभा और लोकसभा होंगे।
  • सन् 1954 में राज्य परिषद एवं जनता का सदन के स्थान पर क्रमश: राज्यसभा और लोकसभा शब्द को अपनाया गया था।
  • राज्यसभा में राज्य व संघ राज्य क्षेत्रों के प्रतिनिधि होते हैं, जबकि लोकसभा भारत के लोगों का प्रतिनिधित्व करती है।
  • राष्ट्रपति को संसद सत्र आहूत करने, तथा लोकसभा को भंग करने की शक्ति प्राप्त है। राष्ट्रपति संसद के किसी सदन का सदस्य नहीं होता और न ही वह किसी सदन की अध्यक्षता करता है, वह संसद का एक अभिन्न अंग होता है।
  • संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कोई विधेयक तब तक विधि नहीं बनता जब तक राष्ट्रपति उसे अपनी स्वीकृति नहीं दे देता है।
  • भारत का संविधान 26 जनवरी, 1950 को प्रवर्तित हुआ तथा इस नये संविधान के अनुसार प्रथम आम चुनाव 26 अक्टूबर 1951 से शुरू हुए जो 21 फरवरी, 1952 तक चले। इस प्रकार प्रथम लोकसभा 17 अप्रैल, 1952 को अस्तित्व में आई। वर्तमान भारत में मई, 2019 से 17 वीं लोकसभा कार्य कर रही है।

भारतीय संसद गठन एवं शक्तियाँ

राज्यसभा

लोकसभा

प्रावधान अनु. 80 में है।

प्रावधान अनु. 81 में है।

यह उच्च सदन एवं द्वितीय सदन है।

यह निम्न एवं प्रथम सदन है।

इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 250 है जिसमें 238 राज्यों से निर्वाचित तथा 12 मनोनीत होते हैं।

 

इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 552 है जिसमें 530 राज्यों से 20 संघ शासित राज्यों से तथा 2 मनोनीत होते हैं।

वर्तमान सदस्य संख्या 245 जिसमें 229 राज्यों से 4 संघ शासित प्रदेशों से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं।

वर्तमान सदस्य संख्या 545 जिसमें 530 राज्यों से और 13 संघ शासित राज्यों से और 2 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं।

सर्वाधिक सीटें-

उत्तर प्रदेश - 31

सर्वाधिक सीटें-

उत्तर प्रदेश - 80

राजस्थान -10 सीटें

राजस्थान – 25 सीटें

इनका निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से एकल संक्रमणीय गुप्त मत प्रणाली द्वारा होता है।

इसका निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से वयस्क मताधिकार के आधार पर होता है।

इनका कार्यकाल 6 वर्ष होता है। इसके एक तिहाई सदस्य प्रत्येक दो साल बाद पदमुक्त हो जाते हैं।

इनका कार्यकाल 5 वर्ष होता है।

इसका विघटन नहीं होगा।

राष्ट्रपति इसका विघटन कर सकता है।

यह एक स्थायी सदन है।

यह एक अस्थायी सदन है।

इसमें सदस्यों की न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित की गई है।

इनकी न्यूनतम आयु 25 वर्ष निर्धारित की गई है।

इनकी गणपूर्ति के लिए कुल सदस्यों का 1/10 होने चाहिए अर्थात कुल 25 सदस्य कम से कम होने चाहिए।

इनकी गणपूर्ति के लिए कुल सदस्यों का 1/10 होना चाहिए अर्थात कुल 55 सदस्य कम से कम होने चाहिए।

इसमें वर्ष में कम से कम 2 सत्र होने चाहिए 2 सत्रों के मध्य 6 माह से अधिक अन्तर नहीं होना चाहिए।

राज्यसभा के समान ही हैं।

राज्यसभा स्थायी सदन है उसका विघटन नहीं होता है।

राष्ट्रपति लोकसभा का विघटन कर सकता है।

उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।

लोकसभा अध्यक्ष पीठासीन अधिकारी होता है जिनका चयन लोकसभा सदस्यों में से ही किया जाता है।

राज्यसभा के पास कुछ विशेष शक्तियाँ हैं-

- अनुच्छेद 312 के अनुसार राज्यसभा दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर नयी अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन कर सकती है।

- अनुच्छेद 249 के अनुसार राज्यसभा दो तिहाई बहुमत से राज्य सूची के विषय को राष्ट्रीय महत्व का विषय घोषित कर सकती है।

मंत्रीपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव, अनुदान की मांग, वित्त विधेयक वार्षिक बजट लोकसभा में ही प्रस्तुत किये जाते हैं।

धन विधेयक को लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जाता है।

महत्वपूर्ण अनुच्छेद

  • अनु.79-  संसद का गठन
  • अनु.80– राज्यसभा की सरंचना
  • अनु.81– लोकसभा की संरचना
  • अनु.82– प्रत्येक जनगणना के बाद पुन: समायोजन
  • अनु.83– संसद के सदनों की अवधि
  • अनु.84– संसद की सदस्यता के लिए अर्हता
  • अनु.85– संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन
  • अनु.87– राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण
  • अनु.108– कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
  • अनु.109 धन विधेयकों के संबध में विशेष प्रक्रिया
  • अनु.110– धन विधेयकों की परिभाषा
  • अनु .111– विधेयकों पर अनुमति
  • अनु.112– वार्षिक वित्तीय विवरण
  • अनु.117– वित्तीय विधेयक