मूल अधिकार








मौलिक अधिकार

अनु. 22- गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण –

  • अनुच्छेद-22 गिरफ्तारी एवं निरोध के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है
    गिरफ्तारी दो प्रकार की होती है-
  1. सामान्य दण्ड विधि के अधीन
  2. निवारक निरोध विधि के अधीन
  • अनुच्छेद-22 सामान्य दण्ड विधि के अधीन गिरफ्तारी के संबंध में निम्नलिखित अधिकार प्रदान करता है-

(क) 24 घंटे से अधिक बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के विरुद्ध गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
(ख) गिरफ्तारी के कारणों से यथाशीघ्र अवगत कराया जाने का अधिकार।
(ग) अपनी रुचि के विधि-व्यवसायी से परामर्श एवं बचाव का अधिकार।

किन्तु-
(i) यह अधिकार शत्रु विदेशी को प्राप्त नहीं है।
(ii) निवारक निरोध विधि के अधीन गिरफ्तार व्यक्तियों को भी उपर्युक्त अधिकार प्राप्त नहीं हैं।

3. शोषण के विरुद्ध अधिकार(अनुच्छेद-23 से 24):
अनु. 23- मानव के दुर्व्यापार और बलात् श्रम का प्रतिषेध –

  • अनुच्छेद-23 में मानव का दुर्व्यापार और बेगार तथा इसी प्रकार का अन्य बलात श्रम निषिद्ध ठहराया गया है। अनुच्छेद-23 राज्य व निजी व्यक्तियों दोनों के विरुद्ध संरक्षण प्रदान करता है।
  • 'मानव-दुर्व्यापार' में मनुष्यों (स्त्री-पुरुष) का वस्तुओं की भाँति क्रय-विक्रय, स्त्रियों व बच्चों का अनैतिक व्यापार (वेश्यावृत्ति) करना तथा दास प्रथा शामिल है। मानव दुर्व्यापार से संबंधित कानून बनाने की शक्ति संसद को प्राप्त है।
  • अनुच्छेद-23 व्यक्तियों को बेगार व अन्य इसी प्रकार के बलपूर्वक लिये जाने वाले श्रम अर्थात् बलात् श्रम से संरक्षण प्रदान करता है।
  • अनु. 24- कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध –
  • अनुच्छेद-24 के अंतर्गत 14 वर्ष से कम आयु के बालकों को कारखानों, खनन अथवा अन्य किसी जोखिम पूर्ण कार्य में नियोजन का निषेध किया गया है।

4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार(अनुच्छेद-25 से 28):

अनु. 25- अंत:करण की और धर्म के अबाध रूप से माननेआचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता –

  • अनुच्छेद-25(1) के अनुसार  सभी व्यक्तियों को अंत:करण की स्वतंत्रता का और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का समान हक होगा। इसके प्रभाव हैं- 

(i) अंत:करण की स्वतंत्रता – किसी भी व्यक्ति को भगवान या उसके रूपों के साथ अपने ढंग से अपने संबंध को बनाने की आंतरिक स्वतंत्रता।
(ii)  मानने का अधिकार – अपने धार्मिक विश्वास और आस्था की सार्वजनिक और बिना भय के घोषणा करने का अधिकार।
(iii) आचरण का अधिकार – धार्मिक पूजापरंपरासमारोह करने और अपनी आस्था और विचारों के प्रदर्शन की स्वतंत्रता।
(iv) प्रचार का अधिकार – अपनी धार्मिक आस्थाओं का अन्य को प्रचार और प्रसार करना या अपने धर्म के सिद्धांतों को प्रकट करना।

  • अनुच्छेद-25 में दो व्याख्याएँ भी की गई हैं-

पहला- कृपाण धारण करना और लेकर चलना। सिक्ख धर्म के मानने का अंग समझा जाएगा।
दूसरा- इस संदर्भ में हिंदुओं में सिक्ख, जैन और बौद्ध सम्मिलित हैं।

अनु. 26- धार्मिक कार्यों के प्रबंधन की स्वतंत्रता –

  • अनुच्छेद-26 के अनुसार, प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त होंगे-
  • धार्मिक एवं मूर्त प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण का अधिकार।
  • अपने धर्म विषयक कार्यों का प्रबंध करने का अधिकार।

अनु. 27- किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए कर भुगतान के बारे में स्वतंत्रता –

  • किसी भी व्यक्ति को किसी विशिष्ट धर्म या धार्मिक संप्रदाय की अभिवृद्धि या पोषण में व्यय करने के लिए करों के संदाय हेतु बाध्य नहीं किया जाएगा। करों का प्रयोग सभी धर्मों के रख-रखाव एवं उन्नति के लिए किया जा सकता है।

अनु. 28- कुछ शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्वतंत्रता-

  • अनुच्छेद-28 के अंतर्गत राज्य-निधि से पूर्णत: पोषित किसी शिक्षा संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा न दी जाए। हालांकि यह व्यवस्था उन संस्थाओं में लागू नहीं होती, जिनका प्रशासन तो राज्य कर रहा हो लेकिन उनकी स्थापना किसी विन्यास या न्यास के अधीन हुई हो।

5. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार(अनुच्छेद-29 से 30): 

  • अनु. 29- अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण भारतीय संविधान में अल्पसंख्यक वर्ग स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं, परन्तु उनके संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। भारतीय संविधान में भाषायी व धार्मिक आधारों पर अल्पसंख्यकों का निर्धारण होता है।

अनु. 30- शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार –

⇒ धर्म या भाषा पर आधारित अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि के शिक्षा संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा। इन शिक्षण संस्थानों को सम्पत्ति का अधिकार होगा।
अनु. 31- सम्पत्ति का अनिवार्य अधिग्रहण (निरस्त)
अनु.31क- संपदा के अधिग्रहण के लिए कानून की सुरक्षा
अनु.31ख- कुछ अधिनियमों और विनियमनों की वैधता
अनु.31ग- नीति निदेशक सिद्धांतों पर प्रभाव डालने वाले कानूनों की सुरक्षा
अनु.31घ- राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से संबंधित कानूनों की सुरक्षा (निरस्त)