सीकर जिले की सम्पूर्ण जानकारी | Sikar District GK in Hindi | सीकर जिला




सीकर जिले के संस्थापक राव शिवसिंह थे। एक अन्य मत के अनुसार सीकर जिले को राव दौलत सिंह ने 17 वीं शताब्दी में बसाया था। 

  • सीकर जिले का क्षेत्रफल : 7732 वर्ग किलोमीटर। 
  • सीकर जिले की अक्षांशीय स्थिति : 27 डिग्री 21 मिनट उत्तरी अक्षांश से 28 डिग्री 12 मिनट उत्तरी अक्षांश तक। 
  • सीकर जिले की देशांतरीय स्थिति : 74 डिग्री 44 मिनट पूर्वी देशांतर से 75 डिग्री 25 मिनट पूर्वी देशांतर तक। 
  • सीकर जिले का संभागीय मुख्यालय - जयपुर। 


सीकर जिले के प्रमुख मेले एवं त्यौहार


  • बालेश्वर मेला - यह मेला सीकर जिले के बालेश्वर स्थान पर श्रावण माह में भरता है। 
  • जीणमाता का मेला - यह मेला सीकर जिले के रेवासा गांव में नवरात्रा चैत्र एवं आश्विन में भरता है। 
  • खाटू श्याम बाबा का मेला - यह मेला सीकर जिले के खाटूश्यामजी में फाल्गुन शुक्ला 11 एवं 12 को भरता है। 
  • शाकंभरी माता का मेला - यह मेला सीकर जिले के शाकंभरी में नवरात्रा के अवसर पर भरता है। 


सीकर जिले के प्रमुख मंदिर/शीर्ष मंदिर


  • श्री खाटू श्याम जी मंदिर - यह मंदिर सीकर जिले के दातारागढ़ तहसील के खाटू गांव में स्थित है। खाटू श्याम जी के मंदिर की नींव अभयसिंह जो कि मारवाड़ के राजा अजीतसिंह के पुत्र के द्वारा रखी गई थी। यहां भगवान कृष्ण के स्वरूप श्याम जी का मंदिर है। यहां श्याम जी की शीश की पूजा की जाती है। मुखाकृति दाढ़ी मूंछ से संबंधित है।
  • हर्ष नाथ का मंदिर - इस मंदिर को हर्ष भेरु का मंदिर/हर्ष महादेव का मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर सीकर जिले में हर्ष गिरी की पहाड़ियों पर स्थित है। इसका निर्माण विग्रहराज द्वितीय के काल में करवाया गया था।
  • भैरू जी का मंदिर - यह मंदिर रींगस (सीकर जिले) में है।
  • ओमल-सोमल मंदिर - यह मंदिर सलेदीपुर (सीकर) में है।
  • सूरनी धाम सूर्य मंदिर - यह मंदिर सीकर जिले के श्रीमाधोपुर तहसील में सुराणा गांव में स्थित है, इस मंदिर में उत्तर भारत की एकमात्र सूर्यपीठ है।
  • जीण माता का मंदिर - जीण माता के मंदिर का निर्माण पृथ्वीराज चौहान प्रथम के समय हट्टड़ द्वारा हर्ष की पहाड़ी (रेवासा, सीकर) पर करवाया गया था। जीण माता को चौहानों की कुलदेवी/शेखावटी क्षेत्र की लोक देवी/मधुमक्खियों की देवी के नाम से भी जाना जाता है। जीण माता का जन्म धांधू गांव में हुआ था। जीण माता को ढाई प्याले शराब चढ़ाई जाती है तथा पहले बकरे की बलि दी जाती है। वर्तमान में केवल बकरे के कान चढ़ाए जाते हैं। जीण माता के मंदिर में प्रतिवर्ष चैत्र एवं अश्विन के नवरात्रों में मेला लगता है। सभी देवी-देवताओं में जीण माता का लोकगीत सबसे लंबा है।
  • झुंझार जी का मंदिर - सीकर जिले के स्यालोदड़ा गांव में झुंझार जी का 5 स्तंभों वाला मंदिर है, जहां पर प्रति वर्ष रामनवमी को मेला लगता है। झुंझार जी का जन्म इमलोहा (नीमकाथाना, सीकर) नामक गांव में हुआ था। जुझार जी का थान प्राय: खेजड़ी वृक्ष के नीचे होता है।


सीकर जिले के प्रमुख दर्शनीय स्थल/पर्यटन स्थल


  • शेखावाटी विश्वविद्यालय - शेखावाटी विश्वविद्यालय की स्थापना 2012-13 में की गई थी। वर्तमान में इसका नाम 4 जुलाई 2014 को शेखावाटी विश्वविद्यालय से बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय कर दिया गया है। 
  • श्री सरस्वती पुस्तकालय - श्री सरस्वती पुस्तकालय जो अलभ्य एवं दुर्लभ साहित्य का अप्रतिम खजाना है। फतेहपुर (सीकर) में स्थित है। यह दुर्लभ प्राचीन ग्रंथों, चित्रों एवं पांडुलिपियों के विशाल संग्रह का पुस्तकालय है। 
  • लक्ष्मणगढ़ दुर्ग, सीकर - लक्ष्मणगढ़ दुर्ग का निर्माण राव राजा लक्ष्मण सिंह ने बेड़ नामक पहाड़ी पर करवाया था। 
  • फतेहपुर दुर्ग, सीकर - फतेहपुर दुर्ग का निर्माण फतेह खां कायमखानी ने 1453 ईसवी में करवाया था। यह चौहान गोगा जी के वंशज थे
  • कांतली नदी - कांतली नदी का उद्गम खंडेला की पहाड़ी रेवासा (सीकर) से होता है। कांतली नदी का बहाव क्षेत्र तोरावाटी प्रदेश कहलाता है। यह एक मौसमी नदी है। यह राजस्थान की पूर्ण बहाव की दृष्टि से आंतरिक प्रवाह की सबसे लंबी नदी है, इसकी कुल लंबाई 100 किलोमीटर है। इस नदी के किनारे गणेश्वर सभ्यता विकसित है। यह नदी सीकर जिले से बहती हुई झुंझुनू को दो भागों में विभाजित करती हुई, झुंझुनू एवं चूरू की सीमा पर समाप्त हो जाती है। 
  • सीकर जिले की प्रमुख झीलें - प्रीतमपुरी/पीथमपुरी झील, कोछोर झील  और  रेवासा झील। 
  • सीकर जिले की प्रमुख हवेलियां - पंसारी की हवेली (श्रीमाधोपुर में), बिनाणियों की हवेली, केड़िया एवं राठी की हवेली, रोनेडी वालों की हवेली, खेमका सेठों की हवेली, गोयंका सेठी की हवेली (रामगढ़) | 
  • गणेश्वर सभ्यता - इसे ताम्र युगीन सभ्यता/पूर्व हड़प्पा कालीन सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है। यह कांतली नदी के किनारे विकसित है। गणेश्वर सभ्यता की सर्वप्रथम खोज 1972 ईस्वी में रतनचंद्र अग्रवाल ने की थी तथा गणेश्वर सभ्यता का उत्खनन 1977 ईस्वी में रतनचंद्र अग्रवाल एवं श्री विजय कुमार ने किया था। यहां से सबसे प्राचीन तांबे के उपकरण प्राप्त हुए हैं, इसलिए इस सभ्यता को ताम्र सभ्यता की जननी भी कहा जाता है। 

सीकर जिले के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न/तथ्य

  • रसिक संप्रदाय, सीकर - कृष्णदास पयहारी के शिष्य अग्रदास ने सीकर जिले के रेवासा नामक स्थान पर रसिक संप्रदाय की स्थापना की थी, जो राम को रसिक नायक मानते हुए की थी। 
  • शेखावाटी क्षेत्र के प्रमुख लोक नृत्य - गीदड़ नृत्य, कच्छी घोड़ी नृत्य, लहूर-लहूर नृत्य, सेंघडा नृत्य, चंग नृत्य, डांडिया गेर नृत्य, जिंदाद नृत्य आदि। 
  • राजस्थान के सीकर जिले का आकार प्यालेनुमा/अर्धचंद्राकार है। 
  • 63 वें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2012 को दिल्ली के राजपथ पर वायु सेना की परेड का नेतृत्व करने वाली पहली भारतीय महिला सीकर जिले के अजीतगढ़ कस्बे की फ्लाइट लेफ्टिनेंट स्नेहा शेखावत थी। 
  • राजस्थान का पहला हाईटेक जिला सीकर जिला है। 
  • राजस्थान का एकमात्र एनसीसी गांव जगमालपुरा सीकर जिले में है। 
  • राजस्थान का पहला सप्त गो माता मंदिर रेवासा सीकर में है (देश का चौथा) 
  • राजस्थान में प्रथम कृषि विज्ञान केंद्र फतेहपुर शेखावाटी 1976 में सीकर जिले में स्थापित किया गया था। 
  • बंधेज का कार्य, गोटा (वार्तिक) खंडेला आदि हस्तकलाए सीकर जिले की प्रसिद्ध है। 
  • तोरावाटी बोली जो कि ढूंढाडी बोली की उपबोली है -जयपुर, सीकर एवं झुंझुनू जिलों में बोली जाती है। 
  • शेखावाटी बोली सीकर, चूरू एवं झुंझुनू जिलों में बोली जाती है

आज के इस पोस्ट में हमने "राजस्थान के जिला दर्शन" की श्रृंखला में "सीकर जिला दर्शन" को पूरी तरह से कवर करने की पूरी कोशिश की हैं। इसमें सीकर का सामान्य परिचय, सीकर के उपनाम, सीकर का क्षेत्रफल, सीकर की मानचित्र में स्थिति, सीकर में विधानसभा क्षेत्र, सीकर के मेले, सीकर के प्रमुख मंदिर, सीकर के पर्यटन स्थल एवं इसके अलावा जितने भी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकते थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया गया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी पाठकों को मेरी यह पोस्ट पसंद आयी होगी। आप सभी को यह पोस्ट कैसी लगी आप मुझे कमेंट करके जरूर बताएं।